बॉलीवुड में वैसे तो कई चाइल्ड आर्टिस्ट रहे जिन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी, लेकिन एक ऐसा चाइल्ड आर्टिस्ट था जिसके फिल्मों में कदम रखते ही सफलता कदम चूमने लगी और देखते ही देखते वो सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाला एक्टर बन गया।
क्या आप जानते हैं कि वो एक्टर कौन था ?
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रतन कुमार
ये थे मास्टर रतन कुमार जो पाकिस्तान के रहने वाले थे। नाम से बेशक आपको रतन कुमार के बारे में कुछ याद ना आए, लेकिन 'बूट पॉलिश', 'दो बीघा जमीन' और 'जागृति' जैसी फिल्में देख आपको मास्टर रतन कुमार का वो भोला चेहरा और जबरदस्त एक्टिंग याद आ जाएगी।
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रतन कुमार
रतन कुमार की डायलॉग डिलीवरी ऐसी होती थी कि बड़े-बड़े स्टार भी देखते रह जाते थे। इन फिल्मों की बदौलत रतन कुमार 50 के दशक में छा गए थे।
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रतन कुमार
1954 में हिंदी फिल्म 'जागृति' की रिलीज के बाद रतन कुमार पाकिस्तान चले गए। उनकी ये फिल्म सुपरहिट रही जिसके बाद इसे पाकिस्तान में 'बेदारी' नाम से बनाया गया। पाकिस्तान में भी इस फिल्म ने सफलता के झंडे गाड़े। बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट तो रतन कुमार सुपरस्टार रहे, लेकिन लीड हीरो के तौर पर वो नहीं चल पाए। शायद ही उनकी कोई फिल्म रही हो जो लीड हीरो के तौर पर हिट रही हो।
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रतन कुमार
- फोटो : cineplot
जब लीड हीरो के रूप में रतन कुमार ने अपनी शुरुआत की तो शादी भी कर ली। शादी से उनकी एक बेटी हुई, लेकिन एक हादसे में उनकी बेटी की मौत हो गई। बेटी की मौत ने रतन कुमार को इस कदर तोड़ दिया कि वो खुद को संभाल नहीं पाए और फिल्म इंडस्ट्री को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
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रतन कुमार
- फोटो : cineplot
फिल्में छोड़ उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू किया और कारपेट बेचने लगे। बिजनेस के सिलसिले में वो यूरोप से लेकर पाकिस्तान तक ट्रेवल करते, लेकिन इसके बाद वो यूएसए जाकर बस गए।
रतन कुमार की पॉपुलैरिटी इस कदर थी कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के सालों बाद भी निर्माता-निर्देशक उनके फिल्मों में लौटने का इंतजार करते रहे...पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
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रतन कुमार
1996 में उनके फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। उस वक्त तो इलाज के बाद सब ठीक हो गया लेकिन साल 2000 में फिर से रतन कुमार के फेफड़ों में कुछ कमी आई और इस बार स्थिति बेहद खतरनाक हो गई। रतन कुमार पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो गए और 8 दिनों तक कोमा में रहे....लेकिन वो कहावत है ना 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय', रतन कुमार ठीक हो गए और सब नॉर्मल हो गया।