वो सात दिन
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'वो सात दिन'
साल 1983 में आई फिल्म 'वो सात दिन' इसका अलग उदाहरण है। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, अनिल कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे ने मुख्य रोल निभाए थे। माया (पद्मिनी कोल्हापुरे) की शादी डॉ. आनंद (नसीरुद्धीन शाह) से होती है। लेकिन, माया शादी से पहले से प्रेम (अनिल कपूर) को प्यार करती है। शादी के बाद वह सुसाइड करने की कोशिश करती है। हालांकि, उसका डॉ. पति उसे बचा लेता है, लेकिन जब इस आत्महत्या की वजह जानता है तो हैरान रह जाता है। इसके बाद सच्चाई पता चलती है कि डॉ.आनंद ने भी माया से शादी सिर्फ अपनी बीमार मां की खातिर के लिए की थी। मां की मौत के बाद डॉ. आनंद माया के प्रेमी यानी प्रेम को ढूंढने निकलता है, ताकि दोनों को मिलवाया जा सके। लेकिन, आखिर में माया इससे इनकार कर देती है और डॉ. आनंद के साथ ही रहती है। आखिर में माया को शादी की ताकत का एहसास होता है। यह फिल्म पति-पत्नी के रिश्ते अहमियत को दिलचस्प अंदाज में बयां करती है। वर्ष 1999 में आई फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' की कहानी भी लगभग ऐसी ही है। प्रेम की अहमियत बेशक जीवन में कम नहीं, लेकिन विवाह के प्रति फर्ज सबसे जरूरी हैं। इसी पर शादीशुदा रिश्ते की नींव टिकी है। 'वो सात दिन' को आप ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर देख सकते हैं।