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अराधना से जब वी मेट तक, वो फिल्में जहां ट्रेन साबित हुई कहानी की असल हीरो

Sun, 18 Apr 2021 01:56 AM IST
विजयाश्री गौर एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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बॉलीवुड फिल्मों में ट्रेन के खास सीन - फोटो : सोशल मीडिया
16 अप्रैल की तारीख भारतीय रेलवे के लिए बेहद खास है क्योंकि इस दिन को भारतीय रेलवे के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। 16 अप्रैल 1853 में भारत में पहली बार यात्री ट्रेन बोरीबंदर से थाने के लिए निकली थी। भारत में रेल सिर्फ लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का ही काम नहीं करती बल्कि हिंदी सिनेमा में भी इसका खास महत्व रहा है। प्यार में डूबे दो प्रेमी को कहीं भागना हो या फिर किसी अंजान के हाथ में हाथ देकर जिंदगी का सफर तय करना रहा हो, ट्रेन हमेशा से बॉलीवुड फिल्मों के रोमांस का एक अहम हिस्सा रही।
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डीडीएलजे, जब प्यार किसी से होता है - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्मों में ट्रेन को सिर्फ ट्रेन की तरह नहीं दिखाया गया। कभी जाती हुई ट्रेन ने बताया कि कोई अपना दूर जा रहा तो कभी बताया कि कैसे दो अजनबी एक ट्रेन के सफर में हमसफर भी बन सकते हैं। फिल्ममेकर हों या संगीतकार हिंदी सिनेमा में ट्रेन को रोमांस, उम्मीद और आजादी के नजरिए से ही देखा गया। आज आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही खास फिल्मों के बारे में जहां ट्रेन किसी किरदार की तरह नजर आई।
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छलिया - फोटो : सोशल मीडिया
छलिया

मनमोहन देसाई की फिल्म छलिया की शुरूआती सीन में दिखाया गया कि एक ट्रेन लाहौर से दिल्ली की ओर आती है। इस फिल्म की हीरोइन नूतन लाहौर में फंस रहती है और इस ट्रेन में मौजूद रहती हैं। जैसे ही ट्रेन पाकिस्तान की सरहद छोड़ भारत में आती है तो नूतन के चेहरे पर खुशी छा जाती है। वो खुशी रहती है अपने देश लौट आने की। वो खुशी रहती है इस उम्मीद की कि वो दोबारा अपने परिवार से मिल पाएंगी। 

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जब प्यार किसी से होता है - फोटो : सोशल मीडिया
जब प्यार किसी से होता है

1961 में रिलीज हुई फिल्म 'जब प्यार किसी से होता है' में ट्रेन के सीन को बेहद रोमांटिक अंदाज में दिखाया गया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे देवानंद ट्रेन से छलांग लगाते हुए कार की छत पर आ जाते हैं और शर्माती हुई आशा पारेख से कहते हैं, 'जिया ओ जिया कुछ बोल दो....'। आशा पारेख ट्रेन के दरवाजे पर खड़ी उनके दिल का हाल सुनती रहती हैं। फिल्म का ये गाना आज भी यादगार है और ट्रेन का ये सीन भी।
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अराधना - फोटो : सोशल मीडिया
अराधना

ट्रेन हमेशा से रोमांस का हिस्सा रही और इसका एक और उदाहरण फिल्म 'अराधना' में भी देखने को मिला। ट्रेन की खिड़की के पास बैठीं शर्मिला टैगोर को देखते हुए जब राजेश खन्ना ने गाया 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू....'तो दर्शकों के दिल में खुशी की लहर दौड़ गई। खिड़की के पास बैठी शर्मिला कभी किताब पढ़ते तो कभी गीत के बोल सुनकर शर्माती नजर आईं। ट्रेन के बराबरी में राजेश खन्ना की गाड़ी चलती नजर आई और जब तक ये साथ बना रहा गीत के जरिए दिल के हालात कहे गए। फिर ट्रेन ने दूसरा रास्ता पकड़ लिया और गीत गाता शख्स ट्रेन में बैठी शर्मिला के लिए एक खूबसूरत याद बन गया।
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अजनबी - फोटो : सोशल मीडिया
अजनबी

साल 1974 में राजेश खन्ना ने एक बार फिर ट्रेन का सहारा लिया और दुनिया को अपने प्यार के बारे में बता दिया। जीनत अमान के साथ मालगाड़ी की छत पर बैठे जब राजेश खन्ना ने कहा, 'हम दोनों दो प्रेमी दुनिया छोड़ चले' तो दर्शकों के दिल में वो एक याद बन गई। वो ट्रेन का सफर आजादी का एहसास था। इस सफर ने बताया कि प्यार में डूबे दो लोग कैसे अपनी दुनिया बसाने की बात कहते हुए ये दुनिया छोड़ने की बात कह रहे हैं।
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दिल से - फोटो : सोशल मीडिया
दिल से 

ट्रेन और रोमांस का साथ सिर्फ 70-80 के दशक तक ही सीमित नहीं रहा। देवआनंद और राजेश खन्ना के बाद शाहरुख भी ट्रेन को अपने रोमांस का जरिया बनाते रहे। फिल्म 'दिल से' में शाहरुख और मलाइका अरोड़ा पर फिल्माया गया 'चल छैया छैया' गाना खूब मशहूर हुआ था। रफ्तार में भागती ट्रेन की छत पर एक पूरा गाना फिल्माया गया जिसे लोगों ने खूब पसंद किया।

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दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, चेन्नई एक्सप्रेस - फोटो : सोशल मीडिया
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और चेन्नई एक्सप्रेस

'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' में अगर ट्रेन को एक अहम किरदार मान लें तो ये अतिश्योक्ति नहीं होगी। राज और सिमरन की पहली मुलाकात एक ट्रेन में होती है जहां ट्रेन छूट जाने के डर से सिमरन एक अंजान शख्स यानी राज को अपना हाथ दे देती है। वहीं जब राज अंत में एक ट्रेन से सिमरन से दूर जा रहा होता है तो बाऊजी उसका हाथ छोड़ देते हैं और एक बार फिर सिमरन राज के हाथ में अपना हाथ दे देती है। उस वक्त भागती हुई ट्रेन ये बताती है कि सही समय पर हाथ ना पकड़ो तो आपका प्यार आपसे कितना दूर जा सकता है। वहीं चेन्नई एक्सप्रेस में एक बार फिर इसी सीन को शाहरुख ने दीपिका के साथ रिक्रिएट किया था। दोनों की मुलाकात ऐसे ही एक ट्रेन से होती है और फिर उनकी कहानी इसी सफर के ईर्द-गिर्द घूमती रहती है।
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जब वी मेट - फोटो : सोशल मीडिया
जब वी मेट

साल 2007 में शाहिद और करीना की हिट फिल्म में भी ट्रेन का बेहद खास किरदार था। गीत यानी करीना पहली बार आदित्य यानी शाहिद को ट्रेन में मिलती है।उसकी मदद करने के चक्कर में उसकी ट्रेन छूट जाती है। फिर गीत को सही सलामत घर पहुंचाने के लिए आदित्य उसके साथ पंजाब जाता है। जाती हुई ट्रेन गीत के लिए उसके मन की दशा बताती है, पकड़ ली तो राहत और छूट गई तो आफत। जब उसे अंत में आदित्य से अपने प्यार का एहसास होता है तो वो कहती है ऐसा लग रहा था जैसे कोई ट्रेन छूट रही है। उसने छूटती हुई ट्रेन को अपने दिल का हाल समझा और फिर अपने दिल की बात कह दी। इस ट्रेन ने हमेशा से ही दो दिलों को मिलाया है और बताया है कि ट्रेन का सफर सिर्फ एक सफर नहीं होता बल्कि एक कहानी होती है, ऐसी कहानी जिसे हम याद रखते हैं और जिसे कभी भूल नहीं सकते।
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