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कंगना बंगला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी से पूछा- क्या बाकी मामलों में भी इतनी तेजी दिखाई?

Mon, 28 Sep 2020 09:35 PM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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कंगना रणौत - फोटो : Twitter @KanganaTeam
नौ सितंबर को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने कंगना रणौत के ऑफिस मणिकर्णिका फिल्म्स का कुछ हिस्सा अवैध बताते हुए 'तोड़फोड़' की थी। इसके बाद ये मामला बंबई उच्च न्यायालय पहुंच गया था। इस केस में हाई कोर्ट के आदेश पर संजय राउत को इस केस में मुख्य आरोपी बनाया गया है। कंगना रणौत बनाम एनबीसी केस की सुनाई न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति आर आई चागला की पीठ ने की।
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कंगना रणौत - फोटो : Twitter @KanganaTeam
अभिनेत्री कंगना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता बीरेंद्र सर्राफ ने अदालत को बताया कि बीएमसी ने नोटिस का जवाब देने के लिए केवल 24 घंटे का समय दिया था। सर्राफ ने आगे कहा कि बीएमसी ने जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना ही कार्रवाई शुरू कर दी। सर्राफ ने कहा कि कंगना के बंगले में कथित अवैध निर्माण का ब्यौरा बीएमसी की रिपोर्ट में नहीं है जबकि यह बताना अनिवार्य है।
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कंगना रणौत - फोटो : PTI
बीरेंद्र सर्राफ ने कार्रवाई के समय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि संजय राउत ने आठ सितंबर को एक न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि कानून क्या है? कंगना को सबक सिखाने की जरूरत है। बीरेंद्र ने कहा, 'उसी दिन दोपहर करीब साढ़े तीन बजे बीएमसी के अधिकारी निरीक्षण के लिए बंगले पर पहुंच गए। नौ सितंबर को ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया और संबंधित प्रति 10 बजकर 34 मिनट पर बंगले के प्रवेश द्वार पर चस्पा की गई जबकि बीएमसी के अधिकारी ध्वस्तीकरण के उपकरणों के साथ 10 बजकर 19 मिनट पर ही बंगले के बाहर उपस्थित थे।'

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कंगना रणौत - फोटो : PTI
न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति आर आई चागला की पीठ ने बीएमसी की ओर से अधिवक्ता अस्पी चिनोय से पूछा कि क्या पहचान रजिस्टर पर कथित अनियमितता दर्ज की गई है। बीएमसी के वकील ने हां में जवाब दिया तब पीठ ने कहा, 'हम यह जानना हैं कि क्या अन्य मामलों में (पहचान रजिस्टर) में इतनी ही तेजी से कार्रवाई हुई।' न्यायमूर्ति कथावाला ने इसके बाद टिप्पणी करते हुए कहा, 'क्या ध्वस्तीकरण वैसे ही हुआ जैसे अधिवक्ता प्रदीप थोराट के मुवक्किल (संजय राउत) चाहते थे। अगर नगर निकाय ने इतनी ही तेजी अन्य मामलों में दिखाई होती तो शहर बहुत अलग होता।'
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कंगना रणौत के ऑफिस की अंदर की तस्वीरें - फोटो : instagram/team_kanganaranaut
वहीं अदालत ने कंगना के वकील को अगली सुनवाई में तस्वीर और अन्य सामग्री जमा करने को कहा जिससे यह पता चले कि ध्वस्त किए गए सभी हिस्से जनवरी 2020 से ही मौजूद थे। अदालत यह जानना चाहती है कि ध्वस्त किया गया हिस्सा- कानूनी या गैर कानूनी- निर्माणधीन था यह उनका निर्माण पहले ही हो चुका था क्योंकि यह मुख्य बिंदु है। बीएमसी कानून की धारा-354ए के तहत महानगरपालिका केवल गैर कानूनी तरीके से चल रहे निर्माण कार्य को ही रोक सकती है।
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कंगना रणौत - फोटो : PTI
गौरतलब है कि कंगना ने अपनी संशोधित याचिका में कहा  कि उनके पास जनवरी 2020 में बंगले में की गई पूजा की तस्वीर और अप्रैल-मई 2020 में एक पत्रिका में प्रकाशित फोटोज हैं, जो दिखाती है कि ध्वस्त किया गया हिस्सा पहले से ही मौजूद था। इसके साथ ही कंगना ने अपनी याचिका में कहा कि इस प्रकार बीएसमी का यह आरोप गलत है कि वहां निर्माण चल रहा था। बीरेंद्र सर्राफ ने पीठ के समक्ष शुक्रवार को कहा था कि जब नगर निकाय ने ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया तब केवल वाटरप्रूफिंग का कुछ काम चल रहा था और इसकी अनुमति पहले ही उनकी मुवक्किल ने ले रखी थी।
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कंगना रणौत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि बीएसमी ने अपने हलफनामे में कहा कि कंगना ने भूतल पर प्रवेश द्वार की स्थिति बदली लेकिन भूतल की अन्य चीजों को भी ध्वस्त किया गया। अदालत ने कहा, 'हम इस बारे में सोच रहे हैं कि कैसे भूतल को ध्वस्त किया गया जब वहां कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा था।' पीठ ने कहा, 'उन्होंने भूतल को लेकर जो हलफनामे में आरोप लगाए हैं वे पहले ही हो चुके थे, फिर भूतल को कैसे तोड़ा गया।'  बता दें कि इस मामले की सुनवाई सोमवार को भी जारी रहेगी।
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