हिंदी सिनेमा में निर्देशक सुधीर मिश्रा की फिल्म ‘इस रात की सुबह नहीं’ से शुरू हुई मेट्रो शहरों में पनपने वाली अपराध दुनिया की नई तस्वीर खींचने वाली फिल्मों की लहर को आगे ले जाने में निर्माता निर्देशक राम गोपाल वर्मा का योगदान उल्लेखनीय रहा है। ‘शिवा’, ‘सत्या’, ‘रंगीला’, ‘कंपनी’ और ‘सरकार’ जैसी एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्मे देने वाले राम गोपाल वर्मा बीते एक दशक से मुख्यधारा की सिनेमा से विरत होकर फिल्में बना रहे हैं। कोरोना संक्रमण काल में वह मुंबई छोड़ गोवा में जा बसे। और, अब फिर से हिंदी सिनेमा के कारोबार में लौट रहे हैं दो युवतियों की समलैंगिक प्रेम की कहानी 'डैंजरस' लेकर। राम गोपाल वर्मा हैदराबाद से हैं। और, इन दिनों अपनी नई फिल्म से ज्यादा चर्चा में हैं हिंदी सिनेमा बनाम दक्षिण सिनेमा विवाद में घी डालने को लेकर। उन्होंने शनिवार को सीधा हमला बोला हिंदी सिनेमा की सामग्री को लेकर और कहा कि हिंदी सिनेमा में वह दम नहीं है जो दक्षिण जाकर वहां की फिल्मों को टक्कर दे सके।