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दो हिस्सों में बंटी हुई फिल्म इंडस्ट्री आज हो गई एकजुट, मीडिया ट्रायल के खिलाफ खोला मोर्चा

Tue, 13 Oct 2020 10:56 AM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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एक्टर और फिल्म निर्माता - फोटो : फाइल फोटो
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के निर्माताओं की प्रॉड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया सहित चार एसोसिएशन और 34 फिल्म निर्माताओं ने अर्णब गोस्वामी, प्रदीप भंडारी, उनके चैनल रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ के राहुल रविशंकर और नविका कुमार के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इन्हें बॉलीवुड के खिलाफ गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने की मांग की है।

करण जौहर, शाहरुख खान, सलमान खान, अनिल कपूर, विशाल भारद्वाज, अजय देवगन, रोहित शेट्टी पिक्चर्स, जैसे कई सितारों के प्रोडक्शन हाउस सहित यशराज फिल्म्स, विनोद चोपड़ा फिल्म्स,एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ सिने-टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन, द फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स काउंसिल और स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन ने एक साथ मिलकर दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। इस शिकायत में कहा गया है कि बॉलीवुड इंडस्ट्री और उनमें काम कर रहे लोगों पर अपमानजनक और गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियां की गई और मीडिया ट्रायल किया गया।
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आमिर, शाहरुख और सलमान खान - फोटो : फाइल फोटो
IMPPA (इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन) तो मुकदमा करने वाले समूहों में शामिल नहीं है लेकिन संस्था के अध्यक्ष और फिल्म निर्माता टीपी अग्रवाल ने बॉलीवुड के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि, "हमें खुशी है कि बॉलीवुड ने ये कदम उठाया है। बहुत पहले ही ये फैसला लेना चाहिए था। किसी एक दो की वजह से पूरी इंडस्ट्री को बदनाम कर दिया मीडिया ने। सबको एक साथ मिलकर इन पत्रकारों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और आवाज उठानी चाहिए।"

काफी समय बाद एक ऐसा मौका देखने को मिल रहा है जब फिल्म इंडस्ट्री एक प्लेटफार्म पर खड़ी नजर आ रही है और ये सब एक साथ मिलकर उन लोगों के खिलाफ खड़े हुए हैं जो इनके खिलाफ सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एक तरह का अभियान चला रहे थे। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद और उससे पहले भी पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड में दो तरह की खेमेबंदी जाहिर तौर पर उभर कर सामने आने लगी थी।
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कंगना रणौत, स्वरा भास्कर - फोटो : instagram: kanganaranaut/ reallyswara
यह सिलसिला टेलीविजन मीडिया के जरिए करीब साढ़े तीन महीने तक अपने उफान पर दिखा लेकिन पिछले सप्ताह ही देश के सामने सुशांत सिंह राजपूत के मौत की एक गुत्थी सुलझने तक यह सिलसिला जारी था। एम्स के साथ-साथ सीबीआई की ओर से कहा गया कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या नहीं हुई। तब कंगना रणौत चुप थीं मगर दूसरी ओर स्वरा भास्कर, फरहान अख्तर जैसी हस्तियां कंगना पर तंज कसती नजर आईं।

एम्स की रिपोर्ट आने के बाद स्वरा भास्कर ने ट्वीट किया, "अब तो सीबीआई और एम्स दोनों ही इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि सुशांत सिंह राजपूत का दुखद निधन सुसाइड था। कुछ लोग सरकार द्वारा दिये गए पुरस्कारों को वापस करने की बात कर रहे थे, न?"

कंगना ने स्वरा के इस तंज का जवाब देते हुए लिखा "ये है मेरा इंटरव्यू.. अगर याददाश्त कमजोर हो तो फिर से देखें। अगर मैंने एक भी झूठा या गलत आरोप लगाया हो तो मैं अपने सारे अवार्ड्स वापस कर दूंगी। ये एक क्षत्रिय का वचन है। राम भक्त हूं। जान जाए पर वचन न जाए।"

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रिया चक्रवर्ती - फोटो : Twitter: @instantbolly
सुशांत की मौत के लिए भारतीय मीडिया के बड़े तबके ने सबसे बड़ा जिम्मेदार उनकी खास दोस्त रही रिया चक्रवर्ती को ठहराने की कोशिश की। एक तरह से उनका ही सबसे ज्यादा मीडिया ट्रायल हुआ। ड्रग्स मामले में रिया जेल गईं मगर अदालत से जमानत मिलने के बाद फरहान अख्तर ने ट्वीट किया, "क्या वो एंकर्स माफी मांगेंगे जिन्होंने रिया और उनके परिवार पर आरोप लागए थे। मुझे नहीं लगता। मगर अब उन्हें गोल पोस्ट को शिफ्ट करते हुए जरूर देखना। वे इसके लिए कुख्यात हैं।"

दरअसल सुशांत सिंह की मौत के बाद बॉलीवुड में एक अजीब सा हंगामा खड़ा हो गया था। किसी की मौत पर फिल्म इंडस्ट्री में कभी झगड़े या आरोप प्रत्यारोप नहीं लगते थे मगर इस बार गंगा उल्टी बहती हुई दिखी। एक तरह फिल्म इंडस्ट्री दो हिस्सों में बंट गई। सुशांत की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की, जांच में बिहार पुलिस की भी एंट्री हुई और फिर मौत की इस गुत्थी को सुलझाने के लिए सीबीआई के हाथों में केस सौंपा गया। मीडिया के बड़े हिस्से ने एक भी दिन इस केस को अपने स्क्रीन और पन्नों से हटने नहीं दिया।
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रवि किशन और अनुराग कश्यप - फोटो : PTI
जब तक मौत की जांच आत्महत्या की दिशा में थी तब तक कंगना ने नेपोटिज्म का एंगल जोड़ दिया। हर तरफ शोर मचा कि बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों ने सुशांत सिंह राजपूत को मजबूर किया आत्महत्या के लिए। ये भी कहा जाने लगा कि सुशांत सिंह राजपूत से कई फिल्में छीनी गईं और बड़े सितारों से लेकर बड़े फिल्मकारों ने सुशांत को आगे बढ़ने से रोका क्योंकि यहां परिवारवाद चरम पर है और सुशांत छोटे से शहर के रहने वाले हैं। इसके लिए यशराज फिल्म्स और संजय लीला भंसाली जैसे फिल्मकार से पूछताछ भी हुई। उसके बाद जांच एजेंसी ने हत्या का एंगल भी ढूंढना शुरू किया जिसके रास्ते ड्रग्स की गलियों तक पहुंच गए। ड्रग्स का मामला संसद में भी उछला।

जब तक सुशांत के लिए इंसाफ की मांग हो रही थी तबतक सबकुछ ठीक था मगर कभी बॉलीवुड माफिया, कभी नेपोटिज्म और कभी ड्रग्स, आरोप और प्रत्यारोप इस तरह शुरू हुए कि लगा कि फिल्म इंडस्ट्री दो हिस्सों में बंट कर खड़ी हो गई। एक ग्रुप बन गया कंगना रणौत का जिसे पहले दिन से ही बीजेपी का समर्थन मिल रहा था। और दूसरा ग्रुप बन गया जया बच्चन, अनुराग कश्यप और स्वरा भास्कर जैसी हस्तियों का।
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प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Twitter @BJPLive
यह सब फिल्म इंडस्ट्री में इससे पहले इतना मुखर होकर नहीं दिखा था। क्योंकि यहां से केवल मनोरंजन का सामान ही निकलता था। माना जाता रहा है कि इस इंडस्ट्री में कोई धर्म नहीं होता, कोई जाति नहीं होती, यहां सिर्फ सितारे जगमगाते है। सलमान खान अगर ईद की नमाज पढ़ते हैं तो गणेश चतुर्थी पर अपने घर गणपति भी बिठाते हैं। इस इंडस्ट्री में शाहरुख खान की पत्नी अगर गौरी हैं तो सैफ अली खान की बेगम करीना कपूर हैं।

कुछ साल या कहें नरेंद्र मोदी की सरकार बनने से पहले तक, पहले बॉलीवुड में विनोद खन्ना और धर्मेंद्र जैसे अभिनेता बीजेपी से सांसद थे तो सुनील दत्त, दिलीप कुमार और राजेश खन्ना कांग्रेस में थे मगर कभी भी इनमें राजनीतिक मंशाओं को लेकर कोई आमने सामने का टकराव देखने को नहीं मिलता था। लेकिन हाल के सालों में इंडस्ट्री में एक दूसरे के खिलाफ खेमेबाजी का दूसरा ही रूप देखने को मिला है।
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गजेंद्र चौहान, नीतीश भारद्वाज, मुकेश खन्ना - फोटो : द कपिल शर्मा शो, instagram/iammukeshkhanna
फिल्म और टीवी के मशहूर एक्टर सुशांत सिंह ने इस चलन पर कहा, "मुझे लगता नहीं है कि फिल्म इंडस्ट्री में जो हो रहा है वो असल बहस है। ये बनाई हुई बहस है और इसके लिए जिस तरह ध्रुवीकरण के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाने लगा वो देखने वाला है। पूरी दुनिया में ऐसा ही हो रहा है।

वहीं फिल्मकार अविनाश दास कहते हैं, "हमारी फिल्म इंडस्ट्री भी वैसी ही है जैसे हमारा समाज है। पुराने जमाने में एक ओर राज कपूर जैसी हस्तियां थीं जो नेहरूवियन विचारों से प्रभावित थीं वहीं दूसरी ओर बिमल रॉय जैसे वाम विचार या प्रोग्रेसिव लोग भी थे जिनकी फिल्में भी वैसी होती थीं मगर इनके बीच टकराव नहीं था। दुखद यह है कि नफरत के नाम पर लोग बंट गए हैं, समाज में भी और फिल्म इंडस्ट्री में भी।"

दूसरी ओर भीष्म पितामह और शक्तिमान जैसी भूमिका निभा चुके मुकेश खन्ना का मानना है कि "हमारी इंडस्ट्री में कभी भी बंटवारा नहीं था और एक परिवार की तरह थे। मुझे नहीं लगता कि इंडस्ट्री में बंटवारा हुआ है। सुशांत मामले में ड्रग्स का मुद्दा सामने आया है और मैं कहता हूं कि ड्रग्स इंडस्ट्री में है जिसे खत्म करना चाहिए। कोई लिख कर नहीं दे सकता कि इंडस्ट्री में ड्रग्स नहीं है।"

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कंगना रणौत, रवि किशन, जया बच्चन - फोटो : instagram/kanganaranaut, twitter@ravikishann, ANI
ड्रग्स के मुद्दे पर ही जया बच्चन ने संसद में बयान दिया जिसको लेकर कंगना रणौत ने उनसे भी निजता के स्तर वाले सवाल पूछे थे। इस मामले में एक तरफ कंगना राणौत और रवि किशन जैसे कलाकार सामने आए जो बीजेपी के सांसद भी हैं। दूसरी ओर जया बच्चन और अनुराग कश्यप जैसे लोग नजर आए। अनुराग वैसे भी शुरुआत से ही मोदी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे हैं। जया बच्चन भी समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं। इन सबके बीच ही अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप भी लगा जिसकी जांच जारी है। हालांकि अनुराग के समर्थन में कई अभिनेत्रियों ने बयान भी जारी किए।

असल में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के टकराव की झलक पहली बार तब देखी गई जब 2014 में बीजेपी की सरकार आने के बाद अवॉर्ड वापसी की शुरुआत हुई। कला क्षेत्र, बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और मनोरंजन से जुड़े ढेरों लोगों ने असहिष्णुता के नाम पर अपने अपने पुरस्कार लौटाए थे। उस समय भी अभिनेता अनुपम खेर ने दिल्ली में सहिष्णुता मार्च निकाला था जो मोदी सरकार के समर्थन के लिए था।

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कंगना रणौत - फोटो : ANI
2019 में देश में बढ़ रही मॉब लिंचिंग पर संज्ञान लेने के लिए श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, कोंकणा सेन शर्मा, अनुराग कश्यप सहित करीब 49 कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था। इस पत्र में पीएम मोदी से भीड़ द्वारा हो रही हत्याओं को रोकने की अपील की गई थी। तब भी बॉलीवुड की 61 हस्तियों ने पलटवार किया था और खुला पत्र लिख कर चुनिंदा बातों पर आक्रोश जताने और झूठी कहानियां बनाने का आरोप लगाया था। 61 हस्तियों में कंगना रणौत, मधुर भंडारकर, लेखक और गीतकार प्रसून जोशी शामिल थे।

वैसे बंटी हुई इंडस्ट्री की झलक कपिल शर्मा के शो पर भी खूब दिखी। इस शो में वरिष्ठ पत्रकार और एंकर अर्णब गोस्वामी का खूब मजाक उड़ाया गया क्योंकि सुशांत सिंह राजपूत की मौत को इस चैनल ने महीनों तक उछाले रखा। कपिल शर्मा के शो में बतौर मेहमान टीवी के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत के कई कलाकार बुलाए गए मगर भीष्म पितामह की भूमिका निभाने वाले मुकेश खन्ना शो में नजर नहीं आए। मुकेश खन्ना ने इस शो को फूहड़ कहा। मुकेश खन्ना ने कई ट्वीट किए और शो की आलोचना की। महाभारत में युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान ने मुकेश खन्ना को आड़े हाथों लिया और दोनों का झगड़ा सरेआम हो गया।
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सुशांत सिंह राजपूत - फोटो : PTI
जिस इंडस्ट्री में यूसुफ ख़ान का नाम दिलीप कुमार हो और पूरा देश उन्हें अभिनय सम्राट मानता रहा हो वहां ऐसी बातें करने वालों के अलावा बॉलीवुड में एक तीसरा खेमा भी नजर आया, जो ना किसी के साथ है और ना ही किसी से अलग है। इस ग्रुप में करण जौहर, आदित्य चोपड़ा, साजिद नाडियाडवाला, सलमान खान, शाहरुख खान, रणबीर कपूर जैसी हस्तियां थीं। ये वो ग्रुप है जो बॉलीवुड का क्रीम कहलाता है। ये हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ऊंचे मुकाम पर बैठे हैं जो किसी भी तरह की राजनीति से अपने आपको दूर रखने की कोशिश करते हैं।

यही वजह है कि भले ही सरकारें बदल जाएं, ये सभी सरकारों के साथ होते हैं। सलमान खान कभी नरेंद्र मोदी के साथ पतंग उड़ाते नजर आते हैं तो उद्धव ठाकरे के साथ भी उनके अच्छे रिश्ते हैं। राज ठाकरे से सलमान खान की दोस्ती भी पुरानी है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में रह चुके अमिताभ बच्चन गुजरात के पर्यटन का प्रचार करते है। करण जौहर अगर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हैं तो वहां से फिल्मों में करण जौहर के योगदान की सराहना भी होती है।

मगर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद इनपर इतने कीचड़ उछले कि इन सभी ने भी एक मैदान पकड़ लिया और बॉलीवुड को एक बार फिर एक धागे में बांधने का प्रयास किया जा रहा है जिसका प्रमाण सामने है जब बॉलीवुड की 34 बड़ी हस्तियां एकजुट होकर अदालत पहुंची हैं।

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