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इमरान हाशमी के गाने से फेमस हुए इस सिंगर की फीस है लाखों रुपए, पहले गाने के मिले थे केवल 1500

Sat, 14 Apr 2018 03:32 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मर्डर
बॉलीवुड स्टार सिंगर्स कुणाल गांजावाला का जन्म आज ही के दिन 1972 में हुआ था। उन्होंने ज्यादातर गाने हिंदी, कन्नड़ और मराठी भाषा में गाए हैं। उन्हें पहचान मिली 2004 में आई मर्डर के गाने 'भीगे होंठ तेरे' से। यह उनकी पहली बड़ी हिट थी। इस गाने के लिए कुणाल को जी सिने अवॉर्ड का बेस्ट प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार मिला। आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।
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कुणाल गांजावाला
कुणाल गांजावाला ने अपने करियर की शुुरुआत जिंगल गाने से की थी। उन्होंने कई एड फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी। एक इंटरव्यू में कुणाल ने बताया कि 'मैंने एक जिंगल गाया था- 'दूध-दूध', जिसके लिए मुझे 1500 रुपए मिले थे। वह मेरी पहली कमाई थी। इसके अलावा 'साथिया' फिल्म का 'हम-दम सुनियो रे', 'कुछ-कुछ होता है' का 'कोई मिल गया' और 'सलाम-ए-इश्क' फिल्म का टाइटल ट्रैक इनके पॉपुलर गाने में शुमार हैं। 
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कुणाल गांजावाला
कुणाल गांजावाला ने बताया, 'कभी नहीं सोचा था कि मैं सिंगर बनूंगा। मैंने कोई ट्रेनिंग नहीं ली, न कभी किसी कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया। मुंबई के एलफिन्स्टन कॉलेज में फर्स्ट ईयर में था तब कुछ सीनियर्स ने रोका और रैगिंग के नाम पर गाना गाने को कहा। मैं डरा हुआ था। मैंने जैसे-तैसे 'नजर के सामने' और 'इक दिन बिक जाएगा' गाने गाए। वह मेरी आवाज से काफी इंप्रेस हुए और मुझे कॉलेज के फेस्टिवल में गाना गाने को कहा। वहीं से मुझे लगा कि मैं गा भी सकता हूं।'

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कुणाल गांजावाला
उन्होंने आगे बताया, '1995 की बात है, मुझे स्टूडियो जाने के लिए रोज पुणे से अंधेरी जाना पड़ता था। मैंने पापा से बोला कि बस-ट्रेन में दिक्कत होती है, एक कार खरीद दीजिए। उन्होंने कहा- बेटा अगर मैंने दिला दी तो तुम कभी उसकी कीमत नहीं समझोगे। खुद सेविंग करो और खरीदो। चार साल की सेविंग्स के बाद 1999 में मैंने मारुति एस्टीम कार खरीदी। उस कार को खरीद कर जो खुशी मिली थी वह आज मर्सडीज में चलते हुए भी नहीं मिलती। मैंने पापा से कहा- आप सही थे।'
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कुणाल गांजावाला
जब उनसे पूछा गया कि अब उन्होंने गाना कम क्यों कर दिया है, इस पर उन्होंने कहा, 'मैंने हजार से ज्यादा गाने गाए, कई शो भी किए। चाहे क्रिकेट हो या बॉलीवुड इंडस्ट्री हो या कोई और क्षेत्र, लोगों की च्वॉइस बदलती है। किशोर कुमार आए तो रफी साहब को गाने मिलना कम हो गए लेकिन उनकी आवाज आज भी लोग पसंद करते हैं। मेरा भी दौर अब चला गया है।'
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