जॉय बिमल रॉय
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जॉय लिखते हैं, ‘एक भूत था लेकिन नहीं भी था। एक दोस्त था जो दोस्त नहीं था। एक पत्नी जो पत्नी नहीं है और एक कत्ल जो कत्ल ही नहीं है। जो कुछ लटक रहा है, वह वैसा है नहीं। और, सबसे बड़ी बात कि एक गलत आदमी एक गलत औरत से शादी कर लेता है। गनीमत यही रही कि एक मौत है जो वाकई मौत है। लेकिन, ये आखिर में हुआ, जब तक मेरी खुद की आधी जान निकल चुकी थी। मैंने खुद को खुश करने के लिए 20 रुपये की चोकोबार भी खरीदी, लेकिन जिस बात ने मुझे वाकई खुश किया वह था जब किसी ने कहा कि इससे खराब फिल्म मैंने जीवन में नहीं देखी। यानी कि ऐसा महसूस करने वाला मैं अकेला नहीं था।’