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जान्हवी ने छोड़ी ‘धड़क’ के डायरेक्टर की फिल्म, भूमि बोलीं, ‘संदेश देने वाली फिल्में करती रहूंगी’

Thu, 01 Apr 2021 12:27 PM IST
अमरीन हुसैन अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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भूमि पेडनेकर, शशांक खेतान, जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हिंदी सिनेमा में इन दिनों कलाकारों के बीच एक नया मुकाबला चल रहा है और ये मुकाबला है सामाजिक मनोरंजन वाली फिल्मों में काम करने की हिम्मत दिखाने का। अक्षय कुमार ऐसा ‘पैडमैन’ जैसी फिल्मों के जरिए यदा कदा करते रहते हैं। आयुष्मान खुराना ‘आर्टिकल 15’, ‘शुभ मंगल सावधान’ और ‘बधाई हो’ जैसी फिल्मों के जरिए इसकी एक बड़ी लकीर खींच चुके हैं। राजकुमार राव उससे लंबी लकीर अपनी ‘शाहिद’, ‘अलीगढ़’ और ‘न्यूटन’ जैसी फिल्मों में खींच चुके हैं और अब हिंदी सिनेमा की सामाजिक संदेशों वाली फिल्मों की पोस्टर गर्ल बनने की बारी भूमि पेडनेकर की है, जिन्होंने खबरों के मुताबिक निर्देशक शशांक खेतान की नई फिल्म साइन कर ली है।

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भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वरुण धवन और आलिया भट्ट के साथ बैक टू बैक दो हिट फिल्में ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ और ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ देने वाले निर्देशक शशांक खेतान की जान्हवी कपूर और ईशान खट्टर के साथ बनी मराठी फिल्म ‘सैराट’ की रीमेक ‘धड़क’ सुपरफ्लॉप फिल्म रही। तब से वह अपनी नई फिल्म शुरू करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। वरुण धवन के मना करने के बाद वह अपनी इस निर्माणाधीन फिल्म में विकी कौशल को ले आए हैं। अब खबर ये है कि जान्हवी कपूर ने भी ये फिल्म छोड़ दी है और उनकी जगह ले ली है भूमि पेडनेकर ने। फिल्म में इसके निर्माता करण जौहर की खासमखास कियारा आडवाणी का भी लीड रोल है।
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जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सामाजिक संदेश देने वाली फिल्में चुनने के बारे में भूमि कहती हैं, "मैं अधिकतर ऐसी फिल्में चुनती हूं जिनमें सशक्त सामाजिक संदेश छिपा होता है लेकिन साथ ही मैं ऐसे प्रोजेक्ट्स को चुनने के बारे में सोचती हूं जो कॉमर्शियली भी अच्छा करे। फिल्मों का संदेश और मकसद लोगों तक पहुंचें इसके लिए यह जरूरी है कि अधिक से अधिक लोग इन फिल्मों को देखें। मैं दोनों के बीच संतुलन वाली फिल्में करने की कोशिश कर रही हूं।”

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जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
भूमि पेडनेकर के मुताबिक ‘टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ उनकी कॉमर्शियल के साथ-साथ सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्मों में से एक है। लेकिन फिल्म की जैसी पहुंच थी या जिस तरह का उसका प्रभाव था, उसको देखकर मैं अचंभित थी। फिल्म रिलीज होने के बाद ऐसे कैंपेन चलाए गए, जिनमें मां-बाप ये कहते हुए सबसे आगे दिखे कि शौचालय नहीं, तो दुल्हन नहीं। यह वास्तव में गजब का अनुभव था।
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जान्हवी कपूर, भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
भूमि बताती हैं कि अब वह ऐसी फिल्में करना चाहती हैं जो सिनेमा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कहानी को बदल दे। वह कहती हैं, “अपने सिनेमा के माध्यम से मैं वास्तविक महिलाओं को दिखाने की कोशिश करती हूं। सिनेमा में महिलाओं को अच्छे प्रतिनिधित्व की जरूरत है। मैं देखती हूं कि महिलाओं को स्क्रीन पर सही प्रतिनिधित्व नहीं मिलता रहा है।”
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