भूमि पेडनेकर
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भूमि कहती हैं, ‘लॉकडाउन के दौरान घर की चारदीवारी में समय बिताकर हमें इस बात का एहसास हुआ कि बाहर निकलने और घूमने-फिरने से हम तरोताज़ा महसूस करते हैं और इसी वजह से हमारे भीतर अपनी धरती के लिए हमदर्दी कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। पिछले साल हम सभी ने पर्यावरण पर गहराते संकट को करीब से देखा, जिससे हमें अगली पीढ़ी के लिए आने वाले कल को और बेहतर बनाने की प्रेरणा मिली। इस संबंध में युवाओं की आवाज को बुलंद करने और उन्हें सकारात्मक नजरिए के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन देने की सख्त जरूरत है, क्योंकि आज उनकी छोटी-से-छोटी कोशिश भी भविष्य में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।’