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'भूमि' की सफलता के पीछे संजय दत्त-अदिति राव नहीं, बल्कि ये 'भूतहा बावड़ी'

Sun, 24 Sep 2017 08:07 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
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चांद बावड़ी
अभिनेता संजय दत्त की कमबैक फिल्म 'भूमि' की सफलता के पीछे बाप-बेटी के प्यार की जगह एक 'भूतहा बावड़ी' है, जो क्लाईमैक्स में फिल्म को रोमांचक बनाती है। जानिए, इस बावड़ी के बारे में...
 
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चांद बावड़ी
बावड़ी के बारे में वैसे तो कई अनसुलझी कहानियां हैं। इसे चांद बावड़ी भी कहते हैं। कोई कहता है कि यहां से एक पूरी बारात गायब हो गई थी,तो कभी कहा जाता है कि यह जगह भूतों ने एक रात में ही बनाई थी।
 
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चांद बावड़ी - फोटो : Twitter
राजस्थान में दौसा के पास आभानेरी में एक खास बावड़ी है। इसे चांद बावड़ी भी कहा जाता है। यह बावड़ी भूल भूलैया भी मानी जाती है। मान्यता है कि इस बावड़ी की सीढ़ियां इस तरह बनी हैं कि जिस रास्ते से आदमी नीचे जाता है। उस रास्ते से ऊपर नहीं आ पाता है।
 

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BHOOMI - फोटो : SELF
कहा जाता है कि इस बावड़ी को एक रात में ही बनाया गया था। किवदंती है कि यहां एक बार एक बारात आई, बावड़ी में नीचे उतरी और फिर बाहर नहीं आ पाई। ऐसी एक नहीं कई कहानियां जुड़ी हैं चांद बावड़ी से, जहां पर संजय दत्त की इस फिल्म की शूटिंग की गई है। शूटिंग देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी थी। संजय दत्त की इस फिल्म में बाप बेटी के रिश्ते की संवेदनाओं को दिखाया गया। फिल्म में संजय दत्त की बेटी का किरदार अदिति राव हैदरी ने निभाया है।
 
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Film Bhoomi
ऐसा नहीं है कि पहली बार चांद बावड़ी को फिल्मों में देखा गया है। इससे पहले भी कई फिल्मों में यह नजर आ चुकी है। अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म भूल-भुलैया में भी यह बावड़ी नजर आई थी, तो वहीं अंग्रेजी फिल्म द फॉल में भी इसे दिखाया गया था। कहा जाता है कि युद्ध के समय राजा एवं उनके सैनिकों द्वारा इस सुरंग का इस्तेमाल किया जाता था। इस बावड़ी में एक सुरंग भी है जिसकी लंबाई लगभग 17 कि.मी. है जो पास ही स्थित गांव भांडारेज में निकलती है।  
 
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चांद बावड़ी
इसे अंधेरे उजाले की बावड़ी भी कहा जाता है। चांदनी रात में यह बावड़ी एकदम सफेद दिखाई देती है। तीन मंजिला इस बावड़ी में राजा के लिए नृत्य कक्ष तथा गुप्त सुरंग बनी हुई है। बावड़ी की तह तक पहुंचने के लिए करीब 1300 सीढि़यां बनाई गई हैं। यह 19.8 फुट गहरी है। बावड़ी की सबसे निचली मंजिल पर बने दो ताखों में स्थित गणेश एवं महिसासुर मर्दिनी की भव्य प्रतिमाएं इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। 
 
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