पाखी हेगड़े
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बिना पारिश्रमिक मिले भी किया काम
पाखी हेगड़े कहती हैं, 'अगर कोई कलाकर टैलेंट के आधार पर काम करता है, तो उसके लिए उसे काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। अपना एक संघर्ष तो होता ही है, उसके बाद हम यह सोचते हैं कि अगर हम मुंबई जैसे शहर में रह रहे हैं तो हमारे उसी हिसाब से खर्चे भी है। अगर उसके हिसाब से पैसे कम मिले तो काम करने का क्या मतबल? जब आप कहीं दूसरी जगह से अच्छी कमाई कर सकते हो, तो कम पैसे में क्यों काम करना। ऐसा नहीं है कि हमने सिर्फ पैसे को ही तवज्जो दी। हमने पहले तो बिना पेमेंट के भी सिर्फ उम्मीद के सहारे ही काम किया। काम अच्छा मिला तो काम किया, लेकिन इस तरह से आप कितने समय तक काम करोगे। इसलिए जितना काम मुझे समझ में आया और अच्छा लगा उतना काम किया।’