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एक सीन में इस एक्टर ने की थी असली नोटों से पैसों की बारिश, बाद में तंगी के चलते बेचना पड़ा था बंगला

Wed, 01 Aug 2018 11:03 AM IST
श्रीलता बिश्वास, अमर उजाला
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भगवान दादा
भगवान दादा का नाम सुनते ही उनकी कॉमेडी और डांस की अलग स्टाइल जेहन में उभर आती है। भगवान दादा का जन्म 1 अगस्त 1913 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता एक टेक्सटाइल मिल में काम करते थे। घर में आर्थिक मदद के लिए भगवान दादा ने भी कुछ समय तक मजदूरी की लेकिन उनका रुझान शुरू से ही फिल्मों की ओर था।
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भगवान दादा
भगवान दादा का असली नाम भगवान आभाजी पालव था। उन्होंने मूक सिनेमा के दौर में फिल्म 'क्रिमिनल' से डेब्यू किया। फिल्मों में एक्टिंग के साथ-साथ उन्होंने फिल्में प्रोड्यूस करनी भी शुरू कर दीं। साल 1951 में उन्होंने फिल्म 'अलबेला' का निर्माण किया। फिल्म का गाना 'शोला जो भड़के' आज भी काफी फेमस है। इसमें उनके अपोजिट गीता बाली लीड रोल में थीं। 
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भगवान दादा
भगवान दादा शेवरले कारों के इतने शौकीन थे कि उन्होंने 'शेवरले' नाम की फिल्म में भी काम किया था। कभी मजदूरी करने वाले भगवान दादा ने फिल्मों से खूब कमाई की। उनके पास उस दौर में 7 कारें थीं जिनसे वो हफ्ते के हर एक दिन एक कार से सेट पर पहुंचते थे। उनके डायरेक्शन की एक फिल्म के एक सीन में पैसों की बारिश दिखानी थी इसके लिए उन्होंने असली नोटों का इस्तेमाल किया था। फिल्म के प्रोड्यूसर भगवान दादा खुद थे।

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भगवान दादा
भगवान दादा हॉलीवुड फिल्म एक्टर डगलस फेयरबैंक्स के बहुत बड़े प्रशंसक थे। डगलस से प्रेरित होकर भगवान दादा अपनी फिल्मों में बॉडी डबल के बजाय अपना स्टंट खुद करते थे। उनके द्वारा किए गए स्टंट इतने असली लगते थे कि राज कपूर तो उन्हें इंडियन डगलस कहकर पुकारते थे।
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भगवान दादा
बाद में एक वक्त ऐसा आया जब भगवान दादा की फिल्में कुछ कमाल नहीं कर पा रही थीं। फिल्मों से उन्हें इतना नुकसान उठाना पड़ा कि उन्हें जुहू स्थित बंगला और अपनी कारें बेचनी पड़ीं। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें मुंबई के चॉल में गुजारा करना पड़ा।
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भगवान दादा - फोटो : इंडियन एक्सप्रेस
भगवान दादा के आखिरी वक्त में ज्यादातर लोगों ने उनका साथ छोड़ दिया। केवल संगीतकार सी रामचंद्र, एक्टर ओम प्रकाश और गीतकार राजेंद्र कृष्ण उनके साथ रहे और उनसे मिलने के लिए चॉल में जाते थे। 4 फरवरी 2002 को हार्ट अटैक से भगवान दादा का निधन हो गया। 
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