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Gulzar Birthday: गुलजार ने महकाया बॉलीवुड में 'इश्क का गुलशन', कभी किया करते थे गैराज में काम

Tue, 18 Aug 2020 01:45 AM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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गुलजार
संपूर्ण सिंह कालरा जिन्हें विश्वभर में गुलजार के नाम से जाना जाता है। गुलजार का कोई दायरा नहीं है, वो बहुत सारी विधाओं में निपुण हैं और लगातार उनमें काम भी कर रहे हैं। गुलजार का नाम लेते ही दिलो- दिमाग पर एक अलग ही छवि गढ़ जाती है। एक शायर, लेखक, गीतकार, निर्माता, निर्देशक सहित कई पहचान उनके नाम के साथ जुड़ी हुईं हैं। गुलजार का जन्म 18 अगस्त 1934 को पंजाब के झेलम में हुआ था। जो अब पाकिस्तान में है। बंटवारे के समय उनका पूरा परिवार अमृतसर में आकर बस गया था। लेकिन गुलजार का मन अमृतसर में ना लगा और वो मुंबई चले आए।
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गुलजार
गुलजार ने अपने गीतों से बॉलीवुड में 'इश्क का गुलशन' महकाया है। तो वहीं उन्होंने अपने शब्दों से लोगों की आंखों को नम भी किया है। 'आपकी आंखों में कुछ महके हुए से राज हैं...', 'तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं मैं...' से लेकर 'छपाक से पहचान ले गया...' तक उन्होंने अपने गीतों के बोल को असल जिंदगी के मायने दिए हैं। गुलजार के नाम से ही इश्क की चाशनी सी घुल जाती है फिजाओं में। ऐसे लेखक साहित्य जगत में कम ही हुआ करते हैं जो अपने शब्दों में शहद सी मिठास घोल देते हैं। गुलजार के लिखने का हर एक लहजा बेहद नर्म है जैसे मखमल। अदब और अदा दोनों का मिश्रण उनके लेख में मिलता है।
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गुलजार
गुलजार को बचपन से ही शेरों- शायरी और कविताओं का काफी शौक था। इसी शौक ने संपूर्ण सिंह कालरा को गुलजार बना दिया। अमृतसर से मुंबई पहुंचे गुलजार ने तंगहाली के दिनों में गैराज में भी काम किया। लेकिन जब भी उन्हें मौका मिलता वो अपना शौक पूरा करते। गैराज में काम के दौरान गुलजार जब भी फ्री रहते थे तो कविताएं लिखा करते थे। इसके बाद गुलजार ने अपने करियर की शुरुआत साल 1961 में विमल राय के सहायक के रूप में की। उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी और हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर भी काम किया।

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गुलजार
गीतकार के रूप में गुलजार ने 1963 में अपनी शुरुआत की विमल राय की फिल्म 'बंदिनी' से। इस फिल्म के लिए उन्होंने पहला गाना 'मोरा गोरा अंग लेई ले' लिखा था। ये गाना उस समय में सुपरहिट हुआ। गाने के बोल लोगों को बहुत पसंद आए। इसके बाद गुलजार ने जो भी लिखा वो अपने आप में इतिहास बनता चला गया। बतौर निर्देशक गुलजार ने 1971 में 'मेरे अपने' फिल्म से करियर की शुरुआत की थी। निर्देशन के क्षेत्र में भी गुलजार ने बेहतरीन काम किया और लोगों को अपना मुरीद बना लिया।
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गुलजार
गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्में:
गुलजार ने हिंदी को बहुत कुछ दिया है। अनगिनत भुलाए ना जाने वाले गीतों के साथ ही फिल्में भी। उन्होंने बता दिया है कि वो केवल लेखन तक ही सीमित नहीं बल्कि उनका कोई दायरा ही नहीं है। गुलजार ने बॉलीवुड को कई फिल्में दी हैं । गुलजार की लिस्ट में, 'कोशिश', 'परिचय',  'मेरे अपने', 'अचानक', 'खूशबू', 'आंधी', 'मौसम', 'किनारा', 'मीरा', 'किताब', 'नमकीन', 'अंगूर', 'इजाजत', 'लिबास', 'लेकिन', 'माचिस' और 'हू तू तू' सहित कई और फिल्में शामिल हैं।

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