आयुष्मान खुराना
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
ये देखा गया है कि पुरुष को अध्यापक और स्त्री को अध्यापिका लिखने वाले तमाम लोग विधायक अगर स्त्री हुई तो उसे विधायिका या फिर निर्देशक अगर स्त्री हुई तो निर्देशिका लिख जाते हैं। जबकि, विधायिका या निर्देशिका शब्द बिल्कुल अलग मायनों में प्रयुक्त होते हैं। पुरस्कारों में लिंग निर्धारण समाप्त करने की एक बड़ी पहल इस साल बर्लिन फिल्म फेस्टिवल से हुई है। वहां अब सर्वश्रेष्ठ अभिनेता या सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की बजाय पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ अभिनय को मिलेगा और इसे जीतने वाला स्त्री या पुरुष में से कोई भी हो सकता है। ऐसे दो पुरस्कार बर्लिन फिल्म फेस्टिवल आयोजन समिति ने तय किए, एक सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनय और दूसरा सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनय। आयुष्मान मानते हैं कि ये फैसला दूरगामी होगा और इसका अनुसरण दूसरे देशों को भी करना चाहिए।