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समलैंगिक प्रेमी का किरदार निभाते दिखेंगे आयुष्मान खुराना, कहा- 'मैं हिट फिल्मों की गिनती नहीं करता'

Tue, 18 Feb 2020 08:33 AM IST
भावना शर्मा अमित कुमार सिंह, मुंबई
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Ayushmann Khurrana - फोटो : Social Media
लगातार सात हिट फिल्में दे चुके आयुष्मान खुराना की आठवीं फिल्म 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है। फिल्म के विषय के आम दर्शकों के बीच रुचिकर न होने की आशंकाओं को लेकर वह शुरू से सतर्क रहे हैं। इस बीच उनका मेहनताना भी काफी बढ़ गया।

परदे पर समलैंगिक प्रेमी का किरदार चुनने के पीछे कोई खास वजह?
समाज को इस फिल्म की जरुरत है। हमारे यहां समलैंगिक व्यक्तियों को बचपन से ही तंग किया जाता है। यह हर एक इंसान का अधिकार और आजादी है कि वह कैसी जिंदगी जीना चाहता है, किसके साथ रहना चाहता है किससे शारीरिक सम्बंध रखना चाहता है। इससे किसी और को दिक्कत नहीं होनी चाहिेए। कॉलेज के वक्त मेरा एक दोस्त था जिससे में नोट्स भी साझा करता था। उसे बहुत परेशान किया जाता था। 
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आयुष्मान खुराना - फोटो : सोशल मीडिया
आप लगातार सात हिट फिल्में दे चुके हैं, क्या दिमाग में सुपरस्टार राजेश खन्ना के 15 हिट फिल्मों के रिकॉर्ड को तोड़ने जैसे विचार आते हैं?
उस समय के जैसा स्टारडम आज के समय में मुश्किल है। तब फिल्में हफ्तों तक सिनेमाघरों में चलती थीं। अब तीन-चार हफ्ते टिक जाए वही बहुत बड़ी बात है। वह मेगा स्टारडम का दौर पूरी तरह से अलग था जिसकी हम किसी भी तरह से बराबरी नहीं कर सकते हैं। हां, यह जरूर है कि मैं लगातार अच्छी फिल्में देना चाहता हूं। जो दर्शकों को पसंद आए। मैं खुद हिट फिल्मों की गिनती भी नहीं रखता हूं। 
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Ayushmann Khurrana - फोटो : amar ujala, mumbai
समाज के किस तबके को ध्यान में रखकर आप फिल्में करते हैं? 
मैं हमेशा ऐसी फिल्में करता हूं जो मध्यम वर्ग वाले परिवारों पर असर छोड़ सके। वह हमारे देश का सबसे बड़ा तबका है। जिसके अंदर पढ़ने से लेकर आगे बढ़ने की चाहत होती है साथ ही अपनी संस्कृति के साथ बने रहनी की कोशिश रहती है। यह मध्यम वर्ग की पहचान भी है और घमंड भी है।  

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Ayushmann Khurrana - फोटो : amar ujala
आप जैसे कलाकार सुपरस्टार बनने के बाद रंगमंच से नाता क्यों तोड़ लेते हैं?
मैं शुरू से ही फिल्म अभिनेता बनना चाहता था। कॉलेज के समय में थियेटर मेरे लिए एक अभ्यास था। मैंने कभी प्रोफेशनल थियेटर नहीं किया हां, आज भी जब मैं कॉलेज वापस जाता हूं वहां जूनियर्स से मिलता हूं। उनसे बात करता हूं। बताता हूं क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए। इसके अलावा थियेटर से मेरा बहुत अधिक नाता नहीं रहा है। 
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ayushmann khurrana - फोटो : social media
चर्चा है कि आपने अपनी फीस पांच गुना तक बढ़ा दी है। सच क्या है?
फिल्में सफल होती है तो फीस अपने आप बढ़ ही जाती है। ऐसा कुछ नहीं है कि आपको कुछ अलग करना पड़ता है। मुझे लगता है कि फिल्म के अर्थशास्त्र का जो समीकरण है आपको बस उसी में सटीक बैठना चाहिए। ऐसी मांग नहीं करनी चाहिए जो उससे बाहर चली जाए। जो दायरे में हो वह हो सकता है। 

आपकी लिखने पढ़ने और शेरो शायरी का अगला पड़ाव क्या किसी फिल्म की पटकथा होगी?
स्क्रिप्ट लिखना सबसे मेहनत का काम है। मेरे पास समय बहुत ही कम समय होता है। इतने समय में मैं दो पंक्तियां ही लिख पाता हूं जो अभी तक ट्विटर और और अधिक से अधिक गानों तक सीमित हैं। जो कलाकार ये काम करते हैं वे काफी काबिल हैं और मुझसे भी कहीं बेहतर कर रहे हैं।
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