asrani
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आज के जमाने में किसी का हास्य अभिनय आपको प्रभावित करता है?
आज सब कुछ हीरो कर रहा है। हीरोइन भी करती है और विलेन भी करता है। आप देख लीजिए कि कॉमेडी जैसे औरत के कपड़े पहनना और चुटकुले छोड़ना, यह सब कुछ अब एक हीरो कर रहा है तो कॉमेडियन का सिनेमा में काम ही क्या है। हिंदी फिल्मों में कॉमेडियन अब बस एक साइडकिक बनकर रह गया है।
हीरो तो आप भी रहें, कुछ बताइए ना उन दिनों के बारे में?
मैं पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से आया था दो साल का कोर्स करके। बंबई में पहली फिल्म गुड्डी मुझे पांच साल के संघर्ष के बाद मिली। फिर गुजराती फिल्में मिलीं जिनमें मैंने हीरो के रोल किए लेकिन मेरा मन मुंबई में था तो वापस यहां आकर कॉमेडी करने लगा। निर्देशन भी किया, लेकिन वहां भी मामला जमा नहीं। अब मैं चरित्र अभिनेता के तौर पर ही काम कर रहा हूं।