कियारा आडवाणी
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लिज्जत पापड़ की शुरुआत वर्ष 1959 में मुंबई की रहने वाली सात महिलाओं ने अपने परिवार का भरण पोषण ठीक प्रकार से करने की नीयत से शुरू की थी। इन सात महिलाओं का नाम जसवंतीबेन पोपट, जयाबेन विठलानी, पार्वतीबेन थोड़ानी, उजामबेन कुंडलिया, बानुबेन तन्ना, सी गवाड़े और लागूबेन गोकानी है। इन सात बहनों ने अपना काम एक दिन में पापड़ों की चार पैकेट बनाने से शुरू किया था। कुछ ही महीनों में वह दो सौ तक पहुंचीं और आज के समय में लगभग 45 हजार महिलाएं उनके लिए काम करती हैं।
इस प्रेरणादायक कहानी के लिए आशुतोष गोवारिकर की पहली पसंद कियारा आडवाणी ही थीं। उन्हें लगता है कि कियारा ही वह अभिनेत्री हैं जिसमें नम्र स्वभाव और सख्त स्वभाव दोनों को दिखाने की प्रचुर क्षमता है। आशुतोष को चाहिए कि मध्यम वर्गीय महिलाओं के लड़ने की उस प्रवृत्ति को कोई अभिनेत्री अच्छे से पर्दे पर दिखा सके। उनके लिए वह सिर्फ कियारा ही कर सकती हैं।