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22 साल से कश्मीर में फिल्मों की शूटिंग करवा रहा है ये शख्स, अनुच्छेद 370 हटने का क्या होगा असर?

Sat, 10 Aug 2019 07:10 PM IST
अपूर्वा राय बीबीसी हिंदी
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फ़िल्म जब तक है जान का एक दृश्य - फोटो : social media

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पहली बार देश को संबोधित किया तो फिल्म जगत का भी जिक्र किया। उन्होंने फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों से जम्मू-कश्मीर में फिर से फिल्मों की शूटिंग शुरू करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा "जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में दुनिया का सबसे बड़ा टूरिस्ट हब बनने की क्षमता है। एक समय था जब कश्मीर बॉलीवुड के फिल्म मेकर्स के लिए सबसे पसंदीदा जगह होती थी। उस दौरान शायद ही कोई ऐसी फिल्म होती थी जिसकी शूटिंग कश्मीर में ना हुई हो।''

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पीएम मोदी ने आगे कहा "अब कश्मीर में हालात सामान्य हो गए हैं तो देश ही नहीं पूरी दुनिया से लोग कश्मीर में शूटिंग करने के लिए आएंगे। हर फिल्म कश्मीर के लोगों के लिए रोजगार के अवसर लेकर आएगी।" लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। मौजूदा हालातों की वजह से कई बॉलीवुड फ़िल्मों की शूटिंग रुकी हुई है और फिलहाल कोई निर्देशक और निर्माता जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। बॉलीवुड के कई निर्देशक और निर्माता बताते हैं कि घाटी में अचानक से हुए बदलाव के बाद बॉलीवुड का इतनी जल्दी वहां लौटना बहुत मुश्किल है।
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जाने माने निर्माता मुकेश भट्ट का कहना है "अभी ये कहना कि बहुत खुशहाली रहेगी, लोग पेड़े बांटेंगे,सड़कों पर नाचेंगे, यह सब जल्दबाज़ी होगी. जब तक कोई निर्माता ख़ुद को 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं समझेगा वो वहाँ शूटिंग करने का जोखिम नहीं उठाएगा क्योंकि निर्माता की ज़िम्मेदारी होती है कि वो पूरी यूनिट का ध्यान रखे।'' वे कहते हैं, ''इसलिए जब तक ये यक़ीन ना हो जाए कि वहां सब सही है कोई जोखिम नहीं उठाएगा। मेरी अपनी फ़िल्म सड़क 2 की इसी महीने शूटिंग शुरू होने वाली थी। मुझे शूटिंग कैंसिल करनी पड़ी। सभी कलाकारों की डेट मिल चुकी थी और उसे कैंसिल करना मुश्किल था इसलिए हमें ऊटी में शूटिंग करने का फैसला करना पड़ा। ये हमारे लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हम वहां नहीं जा सकते।''

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श्रीनगर के रहने वाले मोहमद अब्दुल्लाह 22 सालों से बॉलीवुड से जुड़े हुए हैं। पेशे से वो लाइन-प्रोड्यूसर हैं और उनकी देखरेख में जम्मू-कश्मीर में कई बॉलीवुड फ़िल्मों की शूटिंग होती आई है। वो फिल्मीं सितारों के लिए होटल, शूटिंग की जगह, सुरक्षा का ज़िम्मा, शूटिंग के लिए मंजूरी दिलवाने से लेकर कश्मीरी लोगों को जमा करने का काम करते हैं। अब्दुल्लाह कहते हैं, "इस लाइन में मुझे 20 से 22 साल हो गए हैं। सच मानिये बीते 7 सालों में बहुत सी फ़िल्में जैसे रॉकस्टार, हाईवे, रेस 3, फितूर, हैदर, उरी, कलंक, मनमर्ज़ियां, भाग मिल्खा भाग, हामिद, स्टूडेंट ऑफ द ईयर,अय्यारी, राज़ी, जब तक है जान, बजरंगी भाईजान, फैंटम, लैला मजनू , रोमियो, ट्यूबलाइट जैसी कई और फिल्मों की शूटिंग कश्मीर में होती आई हैं। हमें कभी किसी भी चीज को लेकर परेशानी नहीं उठानी पड़ी।"

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'रोज़ी रोटी बंद'

महेश भट्ट की फिल्म सड़क 2 की ही तरह धर्मा प्रोडक्शन की फ़िल्म शेरशाह (कैप्टेन विक्रम बत्रा की बायोपिक) की शूटिंग लद्दाख में होने वाली थी जो अब रद्द हो गई है। अब्दुल्लाह कहते हैं, "मैं गोपनीयता की वजह से आपको फ़िल्मों के नाम नहीं बता सकता हूँ, लेकिन कई फ़िल्में, कई ऐड और कुछ दक्षिण भारतीय फिल्में थीं जिनकी शूटिंग अब रद्द हो गई है।'' वो कहते हैं, ''पूरा कश्मीर पर्यटन पर निर्भर करता है और अब जब टूरिस्ट ही नहीं आएंगे तो हम क्या करेंगे? मेरे साथ 60 लोग हैं और उनके साथ 500 लोग और सबकी रोजी-रोटी इसी से जुड़ी हुई है और फिलहाल सब बंद है।

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कम फिल्मों की शूटिंग
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अब्दुल्लाह कहते हैं, "जब यहां फिल्मों की शूटिंग होती है तो लोग खुश होते हैं क्योंकि इससे कश्मीर का प्रमोशन हो जाता है और पर्यटक बढ़ते हैं। बस एक बार फिल्म हैदर के वक़्त यहाँ के लोगों ने थोड़ा बहुत हंगामा किया था। वो भी गलतफहमी थी। उन्हें लगा था कि ये फिल्म कश्मीर के खिलाफ है लेकिन जब उनको कहानी पता चली तो उन्होंने पूरा सहयोग किया था।'' अब्दुल्लाह 60 से ज़्यादा फिल्मों की शूटिंग में हिस्सा ले चुके हैं। वो कहते हैं, "1998 से लेकर 2005 तक लोगों में डर था कि यहाँ शूटिंग करना ख़तरनाक हो सकता है लेकिन जब लोगों को पता चला कि यहाँ सब ठीक है तो बॉलीवुड से जुड़े लोग यहाँ आने लगे।
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kashmir ki kali - फोटो : Twitter
अब्दुल्लाह कहते हैं कि कश्मीर में बॉलीवुड की कई यादगार फ़िल्में जैसे कश्मीर की कली, जंगली, बॉबी, जब जब फूल खिले जैसी सदाबहार फ़िल्में भी बनी हैं लेकिन हॉलीवुड फ़िल्मों की शूटिंग कभी नहीं हुई है। वो कहते हैं कि यहां के हालात को देखते हुए हॉलीवुड एडमिनिस्ट्रेशन इसके लिए मंजूरी नहीं देता है। वो कहते हैं, "इन हालात से अगर कश्मीर बाहर निकल गया तो फिर सब कुछ ठीक हो जाएगा। आगे चलकर कुछ भी ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आग लग जाए।''

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चुंबकीय पहाड़ी, लद्दाख - फोटो : Social media
जाने माने फिल्म निर्देशक और निर्माता सुधीर मिश्रा का कहना है, "मुझे कभी कोई परेशानी नहीं हुई. हम उनकी ज़िंदगी में दखल देते हैं ना कि वो। वहाँ के लोगों ने हमें कभी परेशान नहीं किया है। हमने जो भी किया अनुमति के साथ किया। अब बिना अनुमति के कोई कुछ करेगा तो उसे भुगतना तो पड़ेगा ही। हमें तो पूरा सहयोग मिला है वहां के लोगों से।'' जम्मू में 5 सिनेमाघर हैं जबकि कश्मीर में पहले एक या दो सिनेमाघर थे लेकिन अब सभी बंद हैं। यही हाल लद्दाख वासियों का भी है। इंटरटेनमेंट के लिए उनके पास सिर्फ़ टीवी है और इंटरनेट का सहारा है।
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कुछ ऐसे हैं घाटी के हालात - फोटो : Social media

जाने माने ट्रेड एक्सपर्ट, बिजनेस एनालिस्ट गिरीश जौहर कहते हैं, "सरकार के इस फैसले से ज़्यादा फिल्में बनेंगी और लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार अब इसको तवज्जो देगी तो हमें भी अहमियत मिलेगी। प्रायोजक आएंगे। हमें कई ज़्यादा सुविधाएं मिलेंगी और बिना किसी रोकटोक के सरकार फ़िल्मों की शूटिंग को और ज़्यादा बढ़ावा देगी।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद कई निवेशकों ने खुशी जाहिर की है। कार्निवाल सिनेमा के एमडी पीवी सुनील का कहना है, ''हमारी योजना है कि 30 थिएटर जम्मू और कश्मीर में और 5 थिएटर लद्दाख में बनाएंगे। हमने सही लोकेशन ढूंढ़ने का काम भी शुरू कर दिया है।''

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