अनुराग कश्यप
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हिंसा से होने वाली कॉम्प्लिकेशंस को बताते हुए अनुराग कश्यप ने कहा, 'हिंसा मुझे बहुत प्रभावित करती है। असल जिंदगी में मैं खून देखलूं, तो बेहोश हो जाता हूं। एक्सीडेंट देखता हूं, तो बेहोश हो जाता हूं। मुझे अंतिम संस्कार में शामिल होने से डर लगता है। मेरा हिंसा के साथ बहुत कठिन रिश्ता है, यही वजह है कि मेरी फिल्मों में हिंसा चरम पर होगी, लेकिन ऑफ-स्क्रीन मेरा उससे कोई नाता नहीं है। मैंने हमेशा हिंसा को अपनी जिंदगी से बाहर रखा है। प्वाइंट ऑफ इंपैक्ट हमेशा ऑफ स्क्रीन रहा है... रमन राघव, अग्ली, पांच वगैरह में... आप सिर्फ रोष देखते हैं, असर नहीं। मेरी पूरी बात यह है कि दर्शकों की कल्पना इतनी विशद है, कि यह और भी डरावनी होगी। अगर हम इसे स्क्रीन पर रखते हैं, तो हम इसे सीमित कर रहे हैं। जब हम इसे स्क्रीन पर नहीं उतारते हैं, तो उनकी कल्पना इसे और डरावना बना देती है।'