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नेपोटिज्म के खिलाफ मुहिम चलाने वाले अनुराग ने ऐसे बदल लिया पाला, पढ़िए उनके जीवन की ये 10 दिलचस्प कहानियां

Thu, 10 Sep 2020 11:03 AM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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अनुराग कश्यप - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक अनुराग कश्यप आजकल अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने बयानों के चलते चर्चाओं में रहते हैं। वह देश और दुनिया में होने वाली तकरीबन सभी घटनाओं पर अपनी राय रखते है। इस वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें खूब ट्रोल भी किया जाता है। उन ट्रोलर्स का भी जवाब अनुराग पूरी जिंदादिली के साथ देते हैं। अनुराग अभी ऐसे नहीं बने हैं, बल्कि वह बचपन से ही कुछ अलग ही प्रवृत्ति के रहे। उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी के कुछ अनसुने किस्से सुनाते हैं।
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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से पुराना नाता
अनुराग कश्यप का बचपन कुछ ऐसी ही जगहों पर गुजरा है जैसी लोकेशन उन्होंने अपनी फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की शूटिंग के लिए चुनी थीं। अनुराग उसी इलाके के आसपास पले बढ़े हैं जहां उन्होंने अपनी इस फिल्म की शूटिंग की है। फिल्म में जिस घर में अभिनेत्री ऋचा चड्ढा अपने बच्चे को जन्म देती हैं, उस घर में अनुराग के भाई अभिनव का जन्म हुआ। बचपन में अनुराग अक्सर उसी पहाड़ पर बैठे रहते थे जहां फिल्म में नवाजुद्दीन का किरदार फैजल खान बैठा नजर आता है।
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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
स्कूल से ही शुरू कर दी दादागिरी
स्कूलों में बड़े बच्चों का छोटे बच्चों को परेशान करना बहुत ही आम बात है। जब अनुराग स्कूल जाते थे तो वह भी अपने सीनियरों से बहुत परेशान होते थे। धीरे-धीरे अनुराग समझने लगे थे कि यह आम बात है। बताते हैं कि जब अनुराग की उम्र कोई 15 साल रही होगी तब उन्होंने भी एक सीनियर बनकर अपने जूनियर को परेशान करने की ठानी। हालांकि, यह उनका पहला ही मौका था जब उन्होंने एक बच्चे को परेशान किया और उस बच्चे ने अपने माता-पिता से शिकायत कर दी। अनुराग की इस हरकत पर उस बच्चे के माता-पिता ने आपत्ति जताई और उनको शर्मनाक बताया। यह पहली ही घटना थी जिसके बाद से अनुराग ने खुद पर शर्म महसूस की और अपने आचरण में बदलाव भी लाए।

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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
कम बजट की फिल्में बनाने की वजह
अनुराग कश्यप की बनाई हुई फिल्में ज्यादातर कम बजट की होती हैं। इसका कारण भी एक इंटरव्यू में खुद अनुराग ने ही बताया था। उन्होंने कहा था कि जब किसी बड़े बजट की फिल्म की घोषणा होती है तो उस पर सबकी निगाहें रहते हैं। फिल्म की जानकारियां बाहर लीक होने लगती हैं और लोगों तक खबरें पहुंचती रहती हैं। जब मीडिया इन खबरों को लिखता है तो एक फिल्म निर्माता के तौर पर दबाव बढ़ने लगता है। शुरुआत में उस फिल्म को बनाने का जो सपना और जो लक्ष्य बनाया होता है वह धीरे-धीरे बदल जाता है। और, शुरुआत से अच्छी चलने वाली सभी चीजें बिगड़ जाती हैं। इस वजह से वह अपनी ज्यादातर फिल्में कम बजट में बनाते हैं जिससे के लोगों का ध्यान उनकी तरफ न जाए।
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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram/anuragkashyap10
नेपोटिज्म पर साधा पहला निशाना
फिल्मों के जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर के बारे में अनुराग कश्यप की धारणा तब तक अलग थी, जब तक कि वह उनके साथ ही काम नहीं करने लगे। हिंदी सिनेमा में अनुराग पहले निर्देशक थे जो नेपोटिज्म के खिलाफ खुलकर बोलते थे। घर में होने वाली पार्टियों में वह हिंदी सिनेमा के दिग्गज लोगों को भद्दी भद्दी गालियां दिया करते थे। उन दिनों उनके आसपास फैनब्वॉय पत्रकारों की पूरी एक पौध उग आई थी। फिर एक दिन बागी अनुराग कश्यप ने पाला बदल लिया। वे तमाम लोग जो अनुराग कश्यप के झंडे के पीछे बागी बनकर खड़े थे, उन्हें समझ ही नहीं आया कि अब क्या करें। हालांकि, इनमें से तमाम लोगों की अनुराग ने खुद मदद की। कई की नौकरियां भी लगवाईं।
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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
अनुराग के जन्म का किस्सा
अनुराग कश्यप के पिता श्री प्रकाश सिंह की अनुराग की मां से शादी की भी एक अलग ही कहानी है। अनुराग के माता-पिता पहली बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में मिले थे। यूं लिखा मिलता है कि अनुराग के पिताजी हॉस्टल में अपने एक दोस्त के साथ रहते थे। उस दोस्त की ही बहन थीं अनुराग की मां। श्री प्रकाश सिंह ने सीधे अपने दोस्त से ही उसकी बहन के साथ शादी की बात चला दी। हालांकि अनुराग की मां के घर वालों की शर्त थी कि वह शादी तभी करेंगे जब श्री प्रकाश के पास कोई सरकारी नौकरी हो। श्री प्रकाश उन दिनों मैनचेस्टर जाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन, शादी जब का बन गई तो उन्होंने  सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दीं। अनुराग की मां जब 18 साल की थीं तब पैदा हुए थे अनुराग कश्यप।
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अनुराग कश्यप, अभिनव सिंह कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
छोटे भाई अभिनव को चाकू लेकर दौड़ाया
अनुराग के भाई अभिनव कश्यप भी एक फिल्म निर्देशक हैं। वह अनुराग से उम्र में दो साल छोटे हैं। इनकी एक बहन अनुभूति कश्यप भी फिल्में लिखती और बनाती हैं। अनुराग और उनके भाई अभिनव की सोच एकदम अलग है। अभिनव महाराष्ट्र में आरएसएस के प्रचारक बन चुके हैं। और अनुराग के निशाने पर हमेशा भगवा ब्रिगेड होती है। दोनों के बीच बचपन से लेकर बड़े होने तक लड़ाइयां होती रही हैं। अब भी दोनों के रिश्ते सामान्य नहीं हैं। बचपन के एक किस्से का जिक्र करते हुए अनुराग ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह किसी बात की वजह से अभिनव से बहुत खफा हो गए थे। और, उन्हें मारने के लिए उनके पीछे चाकू लेकर दौड़े थे। तब इन दोनों भाइयों का झगड़ा उनके पिता ने शांत करवाया था।

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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
अनुराग की मनोवृति की पहली झलक
जिस तरह की कहानियों पर अनुराग फिल्में बनाते हैं, उस तरह की कहानियां लिखने का शौक उन्हें बचपन से ही था। अनुराग ने अपने स्कूल के समय में  'अपेक्षित' शीर्षक वाली कहानी लिखी। इस कहानी में एक लड़का होता है जो हर रोज पेड़ पर लटकी इमलियों को पत्थर से निशाना बनाता है। हालांकि, उसका निशाना कभी लगता नहीं। लोग उसके ऊपर हंसते थे। एक दिन जब वह लड़का ऐसे ही इमली तोड़ने की कोशिश कर रहा था तो वह पत्थर एक दूसरे लड़के के सिर पर जाकर लगा। जिस लड़के के सिर पर जाकर वह पत्थर लगा था वह लड़का अक्सर इस इमली तोड़ने वाले लड़के को परेशान करता था। बाद में पता चला कि इमली तोड़ना तो एक बहाना था। वह तो इतने दिन से यही अभ्यास कर रहा था कि उस लड़के के सिर को कैसे फोड़ा जाए।

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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
विदेशी फिल्मों ने बदला अनुराग का नजरिया
अनुराग जिन कहानियों पर आधारित फिल्में बनाते हैं, वह एकदम अलग ही होती हैं। अनुराग हिंदी फिल्में देखकर ही बड़े हुए। जिस तरह की कहानियां वह अपने दिमाग में सोचते थे उस तरह की कहानियां कभी हिंदी फिल्मों में पर्दे पर नहीं दिखाई जाती थीं। इससे उन्हें समझ आया कि सिनेमा में उनकी जगह नहीं है। हालांकि, जब उन्होंने वर्ष 1993 में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के दौरान विदेशी फिल्मों को देखा, तब उन्हें समझ आया कि जिस तरह की कहानियां बहुत सोचते हैं, वह कहानियां दूसरी जगहों पर तो बनती हैं लेकिन अपने देश में नहीं। तब उन्होंने फैसला किया कि वह भी अब फिल्मों की तरह बढ़ेंगे और जो कहानियां यहां पर्दे पर नहीं दिखाई जाती हैं, उसी तरह की कहानियां दिखाएंगे।

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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
कहानियां तो चलीं लेकिन गीत नहीं
अनुराग अपनी ज्यादातर फिल्मों की कहानियां खुद लिखते हैं, उनका निर्माण और निर्देशन भी करते हैं। ऐसी ही एक फिल्म रही वर्ष 2010 में आई 'उड़ान'। इस फिल्म का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी ने किया है। भले ही अनुराग बहुत अच्छे कहानीकार हैं लेकिन इस फिल्म में उन्होंने गीत लिखने की भी कोशिश की। हालांकि फिल्म के निर्देशक विक्रमादित्य को अनुराग का लिखा गीत जंचा नहीं इसलिए उन्होंने इस फिल्म से उस गीत को निकाल दिया। इस फिल्म की कहानी अनुराग और विक्रमादित्य ने साथ मिलकर लिखी और फिल्म के निर्माण में अनुराग के साथ रॉनी स्क्रूवाला भी रहे। 
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अनुराग कश्यप - फोटो : instagram: anuragkashyap10
अनुराग कश्यप की लव स्टोरी
अनुराग कश्यप बहुत भावुक इंसान हैं। बहुत जल्दी दिल लगा बैठते हैं और बहुत जल्दी सामने वाले का दिल तोड़ भी देते हैं। उनकी कम लोगों से ही पटती है और ये बात उनके निजी रिश्तों में भी झलकती है। पिछले कुछ साल से अनुराग की दोस्ती अपने से 21 साल छोटी शुभ्रा शेट्टी से चल रही है। उससे पहले अभिनेत्री कल्कि केकलां से उन्होंने शादी की। दोनों अब अलग हो चुके हैं। और, उससे पहले अनुराग की शादी फिल्म एडीटर आरती बजाज से हुई। इस शादी से उन्हें एक बेटी आलिया है। 

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