सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में विकीपीडियो को लेकर जो अहम टिप्पणी की है, वह एक तरह से देखा जाए तो उन सारे पोर्टल्स को लेकर भी उपयोगकर्ताओं को सतर्क करती है, जिन पर कोई भी यूजर कुछ भी सामग्री बिना किसी रोकटोक के अपलोड कर सकता है। कुछ ऐसा ही हाल फिल्मों की रेटिंग जारी करने वाले पोर्टल आईएमडीबी का है। इस वेबसाइट पर मिलने वाली रेटिंग फिल्मों को सैटेलाइट और ओटीटी पर ऊंचे दामों में बहुत काम आती है। ये अलग बात है कि ये रेटिंग कैसे बढ़ाई जाती है, ये अब सबको पता चल चुका है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर इस तरह की रेटिंग एक छलावा है। फिल्में अच्छी रेटिंग दिखाकर ओटीटी की मोटी डील तो कर लेती हैं, लेकिन सच यही है कि ऐसी फिल्मों को देखने के लिए सिनेमाघरों को दर्शक तक नहीं मिलते हैं। थोड़ा सच आप भी समझिए..