अंशुमन झा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किस तरह की कहानियों पर आपको विश्वास है?
आप मेरी फिल्म 'हम अकेले तुम अकेले देखे' तो उसमें एलजीबीटीक्यू समुदाय की आवाज उठाई है। 'लकड़बग्घा' में जानवरों की आवाज उठाई, 'मोना डार्लिंग' में सोशल मीडिया के बारे में बताया है। 'लार्ड कर्जन की हवेली' भी एक अलग ही कांसेप्ट है। इस तरह से हमारी कोशिश है कि हम छोटी सी अपनी आवाज बना लें। अभी एक रोमांटिक फिल्म कर रहा हूं, जिसे सिर्फ प्रोड्यूस कर रहा हूं। उसमे भी न तो एक्टिंग कर रहा और न ही निर्देशन।