आपने कॉमेडी खूब कर ली, आपका संजीदा अंदाज भी लोगों ने देख लिया, कुछ ऐसा है जिसकी अभिनय में तलाश बाकी है?
दर्शकों ने अभी तक मेरा रोमांस नहीं देखा है। मैं समझता हूं कि मैं परदे पर रोमांस बहुत अच्छा कर सकता हूं। यह बात अलग है कि अभी तक मुझे इसका मौका नहीं मिला लेकिन मैं मौका तलाश रहा हूं। लेकिन, इसके लिए न तो मेरी तरफ से कोई हड़बड़ी है और न ही जल्दबाजी, मुझे सही मौके का इंतजार है। इसके अलावा मेजर ध्यानचंद की बायोपिक में टाइटल रोल करने की भी मेरी दिली तमन्ना है।
किसी भी गैरपरंपरागत क्षेत्र में करियर बनाने के लिए घरवालों का साथ कितना जरूरी है?
अभिनय में अपना करियर बनाने का रास्ता मैंने स्वेच्छा से चुना। घर पर मैं और मेरा भाई कभी कभार रामलीला में छोटे मोटे रोल कर लिया करते थे। थिएटर भी शौकिया ही शुरू हुआ। फिर मेरा मन अभिनय में रमने लगा तो पिताजी को यह उचित नहीं लगा। फिर मैंने पिताजी से बात की। उनको मनाया, मां से मदद ली और दोनों की रजामंदी से ही मुंबई आया। मेरा तो यही मानना है कि काम वही करना चाहिए जिसमें आपको रस मिलता हो।