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इस डायरेक्टर के साथ वरुण धवन ने काम करने से किया था मना, बाद में बना दी 100 करोड़ी फिल्म

Sat, 29 Dec 2018 10:45 AM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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andhadhun - फोटो : file photo
हर तरफ हिंदी सिनेमा में इन दिनों कंटेंट का जोर है। बड़े सितारे पिट रहे हैं। कहानियां हिट हो रही हैं। साल 2018 की बड़ी सुपरहिट फिल्मों में से एक रही निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म अंधाधुन। फिल्म का नाम लोगों को शुरू में समझ नहीं आया। फिर फिल्म के प्रचार में तमाम तरह की अड़चनें। फिल्म मेकिंग के बदलते दौर, क्रिएटिव स्पेस में कॉरपोरेट की दखल और तमाम दूसरे मुद्दों पर श्रीराम राघवन से अमर उजाला की बातचीत के कुछ अंश। 
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Sriram Raghavan - फोटो : file photo
श्रीराम, फिल्म हिट हो गई और बहुत बड़ी हिट हो गई तो क्या कहेंगे, काम बोलता है?
- हां, मेरा तो काम ही बोलता है। अभी दो दिन पहले एक अंग्रेजी वेबसाइट ने मेरा इंटरव्यू प्रकाशित किया, जिसे लेकर वॉयकॉम 18 में हंगामा हो गया। उनको लगा कि मैं उन्हें जानबूझकर टारगेट कर रहा हूं लेकिन, वह ये नहीं समझ पाए कि मैं एक परंपरा के खिलाफ हूं। एक निर्देशक अपने जीवन के कुछ साल देता है एक फिल्म को। जैम्स कैमरॉन की टाइटैनिक को ही ले लीजिए। निर्देशक और स्टूडियो के बीच झगड़े का ये सबसे सटीक उदाहरण है। इसी फिल्म ने स्टूडियो को नया जीवनदान भी दिया।
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Andhadhun - फोटो : file photo
लेकिन, ये तो सच है कि फिल्म अंधाधुन का वैसा प्रचार उत्तर भारत में नहीं किया गया, जिसकी आपको या फिल्म के कलाकारों को उम्मीद रही होगी?
- मैं थोड़ा साधारण किस्म का इंसान हूं। लेकिन मुझे लगता है कि ये सब अब मुझे सीखना पड़ेगा। हमारी फिल्म को एक दो टीवी शो को छोड़ दें तो इसका कहीं कोई प्रचार ही नहीं हुआ। फिल्म की रिलीज कुछ हफ्ते पहले मुझे इंडस्ट्री के एक नामी निर्देशक किसी पार्टी में मिले। उनको मैंने बताया कि मैं अंधाधुन कर रहा हूं तो उनका पहला सवाल था कि कब शूटिंग शुरू कर रहे हो। मैं तो डर गया कि फिल्म रिलीज होने वाली है और इंडस्ट्री के ही लोगों को नहीं पता कि ऐसी कोई फिल्म बन रही है। ऐसा मेरे साथ जॉनी गद्दार के समय भी हुआ, लोग फिल्म पसंद कर रहे थे लेकिन थिएटर से फिल्म दूसरे हफ्ते में ही निकालनी शुरू कर दी गई।

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AndhaDhun - फोटो : file photo
और, ये वो फिल्म थी जिसके लिए झामू सुगंध जैसा प्रोड्यूसर आपके घर तक आया?
- हां, ये वाकया सच है। एक हसीना थी कि कामयाबी के बाद मैंने संजय राउतरे को जॉनी गद्दार सुनाई थी। एक दिन मेरे पास झामू सुगंध का फोन आया कि कोई कहानी है तुम्हारे पास। उन दिनों झामू सुगंध इंडस्ट्री का सबसे बड़ा नाम हुआ करता था। बड़ी-बड़ी फिल्मों में उनका पैसा लगता था। तो मैं चौंक गया। मैंने कहा कि मिलता हूं आपसे। लेकिन, अगले ही दिन वह मेरे घर पहुंच गए। 
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sriram raghvan - फोटो : amar ujala
इसके बाद एजेंट विनोद से लेकर बदलापुर तक के सफर ने आपको क्या सिखाया?
- एजेंट विनोद चली नहीं तो उसके कई कारण हैं। किसी बड़े स्टार से दोस्ती करना और फिर उसके साथ फिल्म बनाना। दोनों अलग अलग बातें हैं। दोस्ती यारी में फिल्म बनाते वक्त आप बहक जाते हैं। सेट पर और सेट के अलावा भी एक ऐसा माहौल बन जाता है कि आप जो कुछ कर रहे हैं, सही कर रहे हैं। बदलापुर बनकर तैयार हुई तो एक कॉन्टेस्ट किया फिल्म की मार्केटिंग टीम ने कि आप बदलापुर क्यों देखना चाहते हैं, ऑप्शन में वरुण धवन, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, हुमा कुरैशी और आखिर में मेरा नाम भी था। मुझे केवल एक वोट मिला इस कॉन्टेस्ट में। लेकिन, वह एक वोट मेरे लिए जीवन का सबसे कीमती वोट है। मैं आज भी उस शख्स से मिलकर उसे धन्यवाद देना चाहता हूं।
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Ayushmann Khurrana - फोटो : file photo
कामयाबी के बाद कदम न बहकें, इसके लिए क्या सावधानियां बरतते हैं? ये सवाल इसलिए कि आपने रामगोपाल वर्मा जैसे निर्माता निर्देशक के साथ करियर शुरू किया और उनका करियर खराब करने में उनकी हां में हां मिलाने वालों की बहुत बड़ी भूमिका रही है।
- रामू का मेरे करियर में बड़ा योगदान रहा है। अनुराग कश्यप ने मेरी फिल्म रमन राघव रामू को दिखाई थी। उसके बाद हम लंबे समय तक मिलते रहे। कहानियों पर काम करते रहे। मैंने एक फिल्म लिखी थी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक पर। नाम था – दया। मेरे लिए इसका मतलब था करुणा। इसमें मैं अनिल कपूर को लीड लेना चाहता था। ये अब तक 56 से कई साल पहले की बात है। पर रामू ने तब मना कर दिया। मैं उदास हो गया तो उन्होंने मुझे एक हसीना थी की कहानी दी। 
बतौर निर्देशक आगे बढ़ते रहने के लिए मेरा समय के साथ संबंध बना रहना जरूरी है। मेरी टीम में तमाम 20-25 साल के लोग है, जिनसे मैं खुलकर बात करता हूं और उनसे भी खुलकर अपनी बात कहने को कहता हूं। मैं जानता हूं कि अगर उनकी नौ बातें बेहूदी भी हुईं तो 10वीं बात मेरे लिए फायदेमंद हो सकती है। किसी भी क्रिएटिव इंसान को समय के साथ बदलते रहना जरूरी है। ठहराव में क्रिएटिविटी (सृजन) नहीं है।
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ayushmann khurrana - फोटो : file photo
अंधाधुन के लिए जब आप कलाकार ढूंढ रहे थे तो वरुण धवन ने आपको मना किया, फिर आयुष्मान खुराना ने खुद आगे आकर आपसे ये रोल पा लिया। अब अंधाधुन के बाद किन बड़े सितारों के संदेश आ रहे हैं? और क्या करने की प्लानिंग है?
- वरुण के काम की बदलापुर में खूब प्रशंसा हुई। अंधाधुन लेकर भी मैं उससे मिला था लेकिन, वह शायद अब बड़े बजट की फिल्मों में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। आयुष्मान ने मुझे टेक्स्ट मैसेज भेजा था और बाकी कहानी अब तो पूरी दुनिया को पता है। मेरा कंफर्ट कहानी को लेकर है। मैं अपनी कहानी वैसे ही पर्दे पर देखना चाहता हूं जैसी कि मैंने सोची है। किसी कॉरपोरेट हाउस या किसी बड़े निर्माता या फिर चाहे कोई बड़ा स्टार ही क्यों न हो, उसे मैं अपनी क्रिएटिविटी में छेड़छाड़ करने के सख्त खिलाफ हूं। मैं किसी सुपरस्टार या किसी बड़े कॉरपोरेट हाउस के आभामंडल में आने वाला निर्देशक नहीं बनना चाहता। 
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