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हिंदी सिनेमा के 'मोगैंबो' से दर्शकों को भी हो गया प्यार, ये हैं अमरीश पुरी के 10 दमदार किरदार

Sun, 12 Jan 2020 10:18 AM IST
shrilata biswas रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
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amrish puri
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हिंदी सिनेमा के महाखलनायक कहे जाने वाले अभिनेता अमरीश पुरी आज के ही दिन दुनिया को अलविदा कह गए थे। 80 और 90 के दशक में कोई भी फिल्म इनकी क्रूरता के बिना पूरी तरह से संतुष्टि नहीं देती थी। इसी लोकप्रियता की वजह से इन्होंने अपने पूरे हिंदी सिनेमाई करियर में 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। इनकी दुर्जनता की चर्चा तो हॉलीवुड तक मशहूर थी। हॉलीवुड के सबसे बड़े निर्देशकों में से एक स्टीवन स्पीलबर्ग ने एक इंटरव्यू में कहा, 'अमरीश मेरे सबसे पसंदीदा विलेन हैं। ऐसा विलेन न तो कभी हुआ है और न ही होगा!' अमरीश पुरी की पुण्यतिथि पर हम आपको उनके सबसे अच्छे किरदारों में से कुछ किरदारों के बारे में बताते हैं।  
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अमरीश पुरी, मेरी जंग - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार: जी डी ठकराल 
फिल्म: मेरी जंग (1985)

इस फिल्म में अमरीश पुरी एक जाने माने वकील की भूमिका में नजर आए। एक ऐसा वकील जिसके लिए झूठ को सच और सच को झूठ साबित करना मामूली बात है। उस वकील की असली परीक्षा तब होती है जब उसका खुद का बेटा एक मर्डर केस में फंसता है और उसको बचाने में ठकराल की सारी चालें पतझड़ में पत्तों जैसी बिखर जाती हैं। वकील के किरदार में शानदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।     
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amrish puri - फोटो : social media
किरदार: मोगैंबो 
फिल्म: मि. इंडिया (1987)

मोगैंबो खुश हुआ...! अमरीश पूरी का दूसरा नामकरण मोगैंबो इसी फिल्म से हुआ। यही वह किरदार है जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा। एक विलेन के तौर पर इस फिल्म में बोला गया उनका संवाद 'मोगैंबो खुश हुआ' हर बच्चे, बूढ़े और जवान की जुबान पर चढ़ गया था। एक विलेन को क्रूरता के गुर अगर सीखने हों तो वह इस किरदार का अनुसरण करके सफलता हासिल कर सकता है।    

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अमरीश पुरी, त्रिदेव - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार: भुजंग/ भैरव सिंह 
फिल्म: त्रिदेव (1989)

कहने को तो यह कहानी करण (सनी देओल), रवि (जैकी श्रॉफ) और जय (नशीरूद्दीन शाह) की है, लेकिन इन तीनों की जिंदगी बदहाल करना और उसमें तूफान लेकर आना भुजंग (अमरीश पुरी) का ही काम है। छोटी सी जगह से उठकर पाप का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा करके भुजंग बहुत शक्तिशाली विलेन बन गया था। अपने चिर परिचित अंदाज में अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया। 
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अमरीश पुरी, सौदागर - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार: चुनिया मामा 
फिल्म: सौदागर (1991)

इस फिल्म में अमरीश पुरी की नकारात्मकता उनके अजीब से नाम और अजीब से मेकअप से ही झलकती है। अंदाजा तो पहले सीन से लग जाता है कि इस फिल्म में आग लगाने का काम इन्हीं को सौंपा गया है। थोड़ी ही देर में वह अपना असली रंग दिखाकर आपके अंदाजे पर सत्यता की मुहर भी छाप देते हैं। एक गृह क्लेश में भी वह इतनी सफाई से अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं कि शायद ही कोई विलेन ऐसे कलेवर में ढल पाए। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ विलेन के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।   
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अमरीश पुरी, तहलका - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार: जनरल डोंग 
फिल्म: तहलका (1992)

डोंग कभी रोंग नहीं होता...! फिल्म में शुरू से लेकर अंत तक यह संवाद दर्शकों के कानों में गूंजता रहता है। जनरल डोंग ने वादियों में कहीं डोंगरीला नामक मौत का एक काल्पनिक साम्राज्य बसा रखा है। वह अमरीश पुरी की दमदार आवाज ही है जिसके साथ मिलकर ये वादियां खुद के जिंदा होने का एहसास कराती हैं। इस एडवेंचरस फिल्म में अपनी कड़क आवाज से लोगों के दिल दहलाने के लिए अमरीश पुरी को सर्वश्रेष्ठ विलेन के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।   
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अमरीश पुरी - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार: बैरिस्टर इंद्रजीत चड्ढा 
फिल्म: दामिनी (1993)

इस फिल्म की जान सनी देओल का मशहूर संवाद 'तारीख पर तारीख' है, लेकिन इस संवाद को पूरे जोश और जज्बातों से बोलने की भूमिका इंद्रजीत चड्ढा ने अपनी उपस्थिति से बनाई। इस फिल्म में अमरीश पुरी इतने हावी हैं कि कुछ भी अच्छा होगा! ये सोचना भी दर्शकों के लिए दुर्लभ होता है। वो वक्त ही ऐसा था जब विलेन के रूप में अमरीश पुरी लगभग हर फिल्म में दिखाई देते थे। इस फिल्म में उन्होंने अपनी विरासत कायम रखी और उन्हें सर्वश्रेष्ठ विलेन के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।

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Amrish Puri - फोटो : file photo
किरदार: ठाकुर दुर्जन सिंह 
फिल्म: करण अर्जुन (1995)

इस फिल्म में तो उनके नाम से ही दुर्जनता टपकती है। एक पूरे परिवार को बेरहमी से मारकर एक मां को मरने के लिए अकेला छोड़ देने वाला कोई सज्जन तो होगा नहीं लेकिन इसी के लिए तो अमरीश पुरी की हिंदी सिनेमा में पहचान थी। उनकी हंसी और कड़क आवाज से सबका दिल दहल जाता है। पर्दे पर उनकी मौजूदगी ही कुछ बुरा होने का अंदेशा देती है। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ विलेन के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।

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amrish puri - फोटो : file photo
किरदार: चौधरी बलदेव सिंह 
फिल्म: दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995)

जा सिमरन जा...जी ले अपनी जिंदगी...! अपनी औलादों को देसी पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से चौधरी बल्देव सिंह (अमरीश पुरी) लंदन छोड़कर भारत लौट आते हैं। अपने देश के प्रति उनका प्यार इतना था कि वह लंदन में रहकर हर चीज की तुलना भारतीय चीजों से करते थे। उन्हें अपनी बेटियों के लिए दूल्हा भी देसी ही चाहिए था। आपको वह कुछ देर के लिए विलेन लगेंगे लेकिन एक पिता की जगह खुद को रखकर अगर आप सोचेंगे, तो इस फिल्म के हीरो वही हैं। इस फिल्म के लिए अमरीश पुरी को सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।

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अमरीश पुरी - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार: शम्भूनाथ
फिल्म: घातक (1996)

वाराणसी में मास्टरी करने वाले शम्भूनाथ अपने टीबी के इलाज के लिए बेटे काशीनाथ (सनी देओल) के साथ मुंबई आते हैं। महात्मा गांधी के अनमोल वचनों का पालन करने वाले इस सीधे-साधे मास्टर का पाला मुंबई के सबसे बड़े गुंडे कात्या (डैनी डेन्जोंगपा) और उसके भाइयों से पड़ता है। एक बेबस बाप के रूप में कात्या के सामने गिड़गिड़ाना शम्भूनाथ के रूप में अमरीश पुरी के अभिनय का सबसे यादगार पल है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।

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sunny deol, amrish puri - फोटो : social media
किरदार: मेयर अशरफ अली 
फिल्म: गदर : एक प्रेम कथा (2001)

1947 के भारत के दो हिस्सों में बंटवारे के वक्त के दोनों हिस्सों में पैदा हुए तनाव और मारकाट के बीच अशरफ अली (अमरीश पुरी) की बेटी सकीना (अमीषा पटेल) और एक भारतीय तारा सिंह (सनी देओल) के बीच पनपे प्यार को जब अशरफ अली नहीं मानते तो वह इस फिल्म के सबसे बड़े विलेन लगते हैं। वहीं दूसरी तरफ जब वह समझ जाते हैं कि प्यार किसी सीमा को नहीं देखता और समझता, तो वह इस रिश्ते को मंजूरी देकर सबके हीरो जैसे बन जाते हैं। थोड़ा हीरो कम दिखते हैं इसलिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ विलेन के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।   

बॉलीवुड पर अमरीश पुरी ने विलेन बनकर किया था राज, इस वजह से बेटे को रखा फिल्मों से दूर
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