अमिताभ बच्चन
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अमिताभ ने आगे लिखा, 'ट्रेन से नीचे उतरने के बाद अपना सारा सामान अपने सिर और पीठ पर लादकर अपने रिश्तेदारों के घर जाता था, जो स्टेशन से कुछ ही दूरी पर रहा करते थे। उस वक्त कोई ट्रांसपोर्ट भी नहीं हुआ करता था। रिक्शा और तांगा मेरी आर्थिक पहुंच से बाहर था। लेकिन, वह काफी अच्छे दिन थे। उस यात्रा का दर्द और तकलीफ सब दूर हो जाती है, जब वो खुशी के साथ आपका स्वागत किया करते थे।'