saat hindustani
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अब्बास को अपनी फिल्म के लिए ऐसे युवक की तलाश थी जो एक्टिंग के गुर जानता हो, दिखने में दुबला-पतला हो, ख़ूबसूरत और जोशीला हो। बात 1969 से पहले की है, उस वक़्त अमिताभ बच्चन कलकत्ता की 'बर्ड एंड को' कंपनी में काम किया करते थे। सुबह से शाम दफ्तर में काम और शाम को थिएटर करते। एक्टिंग का शौक अमिताभ को लग चुका था। अमिताभ बच्चन ने कुछ साल पहले अपने ब्लॉग में लिखा था, "मैंने मैगज़ीन फ़िल्मफ़ेयर-माधुरी की प्रतियोगिता के लिए फ़ोटो भेजी जो फिल्म में जगह बनाने वाले चेहरों के लिए अच्छा मंच होता था। मेरी फ़ोटो रिजेक्ट हो गई, क्या ये कोई अचरज की बात थी।'
अमिताभ ने फिल्म में किस्मत आज़माने का मन बना लिया था। वो कलकत्ता में अपनी ठीक ठाक नौकरी छोड़ मुंबई आ गए। उन्हीं दिनों केए अब्बास गोवा की आज़ादी के संघर्ष पर फ़िल्म 'सात हिंदुस्तानी' बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्हें सात हीरो चाहिए थे जो एक दूसरे से एकदम जुदा हों। एक रोल के लिए अब्बास साहब ने नए लड़के टीनू आनंद को लिया था जो उनके दोस्त और मशहूर लेखक इंदर राज के बेटे थे। टीनू आनंद की एक दोस्त थी नीना सिंह, जो मॉडल थी। सातवें हिंदुस्तानी के लिए नीना को लिया गया। अमिताभ बच्चन दूर दूर तक फ़िल्म का हिस्सा नहीं थे।