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Amitabh Bachchan-Bal Thackeray: जब मुश्किल में थी अमिताभ की जान, देवदूत बनकर सामने आए थे बाला साहेब ठाकरे

Tue, 11 Oct 2022 09:48 AM IST
वर्तिका तोलानी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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बाला साहेब ठाकरे और अमिताभ बच्चन - फोटो : अमर उजाला
शिवसेना के संस्थापक और दिवंगत नेता बाला साहेब ठाकरे का बॉलीवुड स्टार्स के साथ काफी गहरा कनेक्शन रहा है। लेकिन, फिल्मी दुनिया के शहंशाह अमिताभ बच्चन के साथ उनका रिश्ता कुछ खास था। आखिर हो भी क्यों न? वह बाला साहेब ठाकरे ही थे, जिन्होंने बिग बी को दूसरा जन्म दिया था। अमिताभ बच्चन ने खुद इस बात का खुलासा करते हुए बाला साहेब से जुड़ा यह किस्सा सुनाया था। तो चलिए अमिताभ के 80वें जन्मदिन पर 'बॉलीवुड का शहंशाह, 80 साल-80 किस्से' सीरीज के तहत पढ़ते हैं यह किस्सा-
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बाला साहेब ठाकरे और अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
अमिताभ की फिल्म 'कुली' की शूटिंग चल रही थी। एक फाइटिंग सीन को शूट करते वक्त अमिताभ बच्चन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हें तुरंत ही अस्पताल ले जाना था। लेकिन, उस दिन मुंबई का मौसम खराब होने की वजह से एंबुलेंस उन तक पहुंच नहीं पा रही थी। हर कोई परेशान था। ऐसे में बाला साहेब ठाकरे मदद के लिए आगे आए।
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बाला साहेब ठाकरे और अमिताभ बच्चन - फोटो : Social Media
उन्होंने उस वक्त बिग बी की मदद के लिए शिवसेना की एंबुलेंस भेजी और उन्हें वक्त रहते अस्पताल पहुंचाया। अमिताभ बच्चन ने बाला साहेब ठाकरे को याद करते हुए खुद यह पूरा किस्सा सुनाया था। उन्होंने कहा था, 'बाल ठाकरे ने मेरी तब मदद की जब मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी। अगर उस वक्त उन्होंने मेरी मदद न की होती तो आज मैं जिंदा नहीं होता।' इतना ही नहीं, अमिताभ बच्चन ने अपने और बाला साहेब के रिश्ते के बारे में बात करते हुए कहा था कि ‘ठाकरे परिवार के साथ मेरा पारिवारिक संबंध रहा है। बाला साहब के परिवार के साथ हम सब भी एक परिवार की तरह ही रहे हैं।'
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अमिताभ बच्चन, जया बच्चन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अमिताभ ने कहा था, 'जया और मेरा जब विवाह हुआ तब बाला साहेब ने मुझे बुलाया। मैं उनसे मिलने पहुंचा तो वह बोले तुमने अब विवाह कर लिया है तो अपनी पत्नी को लेकर घर आओ। मैं उनके घर गया और आई ने जिस तरह अपने घर में जया का स्वागत किया वह बिल्कुल ऐसा था कि उनकी खुद की बहू घर आई हो। तभी से हमारा ठाकरे परिवार के साथ पारिवारिक संबंध बना। उनका स्नेह, आदर, प्यार और उनकी देख रेख की कमी मुझे हमेशा याद रहती है। जब भी मेरे जीवन में कोई ऐसी घड़ी आई जब हमें उनसे थोड़ी सी प्रेरणा लेनी हो तो हम उनके पास पहुंच जाते थे और वह हमारा हाथ पकड़कर हमें मार्गदर्शन देते थे।’
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