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80 साल-80 किस्से: अपनी बेहतरीन अदाकारी के बल पर बॉलीवुड के महानायक बने शहंशाह, इन 10 फिल्मों को देख होगा यकीन

Tue, 11 Oct 2022 01:11 PM IST
पलक शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
बॉलीवुड इंडस्ट्री के महानतम कलाकारों में से एक अमिताभ बच्चन ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से फिल्मी उद्योग में एक ऐसा स्थान हासिल किया है, जिसके आगे सभी सिर झुकाते हैं। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन अपनी दमदार अदाकारी और अनोखे अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं और अपने इसी हुनर के दम पर वह इंडस्ट्री के महानायक कहलाते हैं। उनके स्वर्णिम करियर को ध्यान में रखते हुए उन्हें बीते कई वर्षों में अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। 70-80 के दशक में एंग्री यंग मैन की छवि हासिल करने वाले अमिताभ, जब भी कैमरे के सामने खड़े होकर हैं.....कहते हैं तो वह मोमेंट किसी फिल्म से कम नहीं होता। बढ़ती उम्र के बाद भी उनका जज्बा और अभिनय का जुनून कहीं से कहीं तक कम नहीं हुआ है। आज हमारे महानायक यानी अमिताभ बच्चन 80 साल के हो गए हैं। इस खास दिन को और स्पेशल बनाने के लिए 'बॉलीवुड का शहंशाह, 80 साल-80 किस्से' सीरीज के तहत हम आपको बॉलीवुड के आइकॉन की 10 आइकॉनिक फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं...      
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आनंद - फोटो : social media
फिल्म का नाम- आनंद (1971)
साल 1971 में आई फिल्म 'आनंद' अपने जमाने की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। वैसे तो फिल्म में लीड रोल में सुपरस्टार राजेश खन्ना थे, लेकिन बाबू मोशाय के साथ सहायक अभिनेता के रूप में अमिताभ बच्चन को देखा गया था। राजेश खन्ना की मौजूदगी के बावजूद अपने सशक्त अभिनय के जरिए अमिताभ ने इस फिल्म में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। 'आनंद' राजेश खन्ना की श्रेष्ठ फिल्म मानी जा सकती है, लेकिन फिल्म देखने के बाद अमिताभ भी दर्शकों के दिमाग में बस जाते हैं। साइड रोल के बाद भी अमिताभ ने बड़े ही शानदार तरीके से स्क्रीन पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। इस फिल्म में बिग बी ने डॉ, भास्कर के.बनर्जी का रोल अदा किया था। 
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जंजीर - फोटो : social media
फिल्म का नाम-जंजीर (1973)
अपने करियर की शुरुआत में ढेरों फ्लॉप फिल्में देने बाद जब सबको लगने लगा था कि अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री में अपने पैर पसारने में ना कामयाब रहेंगे। तभी साल 1973 में प्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म जंजीर रिलीज हुई थी, जिसने अमिताभ के करियर का रूप-रंग ही बदल कर रख दिया था। अपने जमाने के महान निर्देशक प्रकाश मेहरा जब इंडस्ट्री के कई दिग्गज नायकों के मुंह से फिल्म के लिए न सुनकर थक गए थे, तब हारकर उन्होंने अमिताभ को 'जंजीर' के लिए चुना था। अभिनेता प्राण के साथ जब बिग बी ने फिल्म के लिए पहला ही शॉट शूट किया था, तभी प्रकाश को एक कोने में ले जाकर कह दिया था कि यह लड़का सुपरस्टार बनेगा। बंधी हुई स्टोरी और बेहतरीन अदाकारी से सजी 'जंजीर' ने अमिताभ के एंग्री यंग मैन की नीव रखी थी, जो आज तक कायम है। फिल्म में दिखाए गए अमिताभ के तेवर को निर्माता और निर्देशकों ने फिल्मी पर्दे पर लंबे समय तक भुनाया था।  

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दीवार - फोटो : social media
फिल्म का नाम- दीवार (1975)
फिल्म 'जंजीर' के रिलीज होने के दो साल बाद फिल्मी पर्दे पर अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की फिल्म 'दीवार' ने दस्तक दी। 'जंजीर' के बाद एक बार फिर अमिताभ का नाम इस फिल्म में विजय ही रखा गया था। उस समय हीरो फिल्मों में नकारात्मक भूमिका निभाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन 'दीवार' में अमिताभ बच्चन का किरदार ग्रे-शेड का था। दरअसल, फिल्म में अमिताभ ने अपने ईमानदार भाई के मुकाबले अपराध की दुनिया को चुना, जिसके बाद उसकी मां भी उसका साथ छोड़ देती है। फिल्म में नकारात्मक किरदार निभाने के बावजूद भी अमिताभ ने दर्शकों की सहानुभूति बटोर ली थी। इस फिल्म का भगवान पर गुस्सा होने और मंदिर की सीढ़ियों पर मां की गोद में दम तोड़ते हुए अमिताभ आज भी हिंदी फिल्मों के उम्दा दृश्यों में से एक है।    
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शोले - फोटो : social media
फिल्म का नाम- शोले (1975)
'दीवार' के बाद साल 1975 में ही एक फिल्म रिलीज हुई, जिसने उस जमाने में हिंदी सिनेमा के मायने ही बदल दिए थे। फिल्म में दोस्त जय-वीरू की जोड़ी से लेकर विलेन गब्बर तक आज भी प्रसिद्ध हैं। जय-वीरू और गब्बर का नाम सुन आप समझ गए होंगे की हम 'शोले' की बात कर रहे हैं। फिल्म में जय और वीरू की जोड़ी ने कमाल ढा दिया था। अमिताभ ने इस फिल्म में अपनी अदाकारी का उम्दा प्रदर्शन किया था। बिना बोले अपनी आंखों और चेहरे के भावों के जरिए अमिताभ ने कई दृश्यों को यादगार बना दिया। गब्बर को पकड़ने के लिए और अपने दोस्त की जान बचाने के लिए जय का खुद की जान की बाजी लगा देना सभी के आंसू निकाल देता है।   
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अमर अकबर एंथोनी - फोटो : social media
फिल्म का नाम- अमर अकबर एंथोनी (1977)
 मनमोहन देसाई की कमाल की फिल्मों में से एक 'अमर अकबर एंथोनी' में बिग बी एंथोनी गोंसालविस की भूमिका में थे। इस फिल्म में अमिताभ का एक सीन, जिसमें घायल बिग बी आइने के सामने खड़े होकर मिरर में मौजूद अपने अक्स की मरहम-पट्टी कर देते हैं। अकेले अमिताभ ने फिजूल की बातें करते हुए दर्शकों को खूब हंसाया था। यह एक ऐसा दौर था, जब अमिताभ पर्दे पर कुछ भी करते थे, वही दर्शकों को पसंद आ जाता था।     
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अग्निपथ फिल्म - फोटो : social media
फिल्म- अग्निपथ (1990)
विजय चौहान का नाम आज भी दर्शकों को अमिताभ के बेस्ट किरदारों में गिना जाता है। 'अग्निपथ' बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी, लेकिन बाद में टीवी पर खूब देखी गई थी। इस पिल्म को अमिताभ की यादगार फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में अमिताभ ने पिछले कई वर्षों से चली आ रही अपनी अभिनय शैली में परिवर्तन किया था। 'अग्निपथ' में अमिताभ ने आवाज को बदल कर बोला था। हालांकि उनका यह प्रयोग दर्शकों को पसंद नहीं आया और यही फिल्म की असफलता का मुख्य कारण माना गया था। बाद में अमिताभ ने अपने संबाद उसी अंदाज में डब किए जिस अंदाज में पसंद किए जाते हैं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस फिल्म के लिए अमिताभ को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।    

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शक्ति फिल्म - फोटो : social media
फिल्म का नाम- शक्ति (1982)
साल 1982 में आई फिल्म 'शक्ति' को कुछ खास सफलता नहीं मिली थी, लेकिन दर्शकों को दो महान अभिनेताओं को साथ देखने का यह बेहतरीन अवसर था। इस फिल्म में अमिताभ के साथ उनके आदर्श दिलीप कुमार थे। इस फिल्म में उनके लिए दिलीप के साथ काम करना आसान नहीं था उन्हें कई बार रीटेक देने पड़ते थे। हालांकि फिल्म में अमिताभ के अभिनय की खूब तारीफ हुई थी।   

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ब्लैक - फोटो : social media
फिल्म का नाम- ब्लैक (2005) 
साल 2005 में आई संजय लीला भंसाली की फिल्म 'ब्लैक' में अमिताभ ने देबराज सहाय की भूमिका निभाई थी। इस रोल के बारे में अमिताभ का कहना था कि 'देबराज सहाय की भूमिका निभाकर अपने अभिनय के शिखर को छुआ था।' यह फिल्म एक ऐसी न देखने और न सुनने वाली लड़की के सख्त टीचर का रोल निभाया था। इस फिल्म में अमिताभ के अभिनय की कोई सीमाएं नहीं हैं। ऐसा माना जाता है इस करिदार को सिर्फ और सिर्फ अमिताभ ही निभा सकते थे।  

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पा फिल्म - फोटो : social media
फिल्म का नाम- पा (2009)
साल 2009 में आई इस फिल्म में अमिताभ ने 12 वर्ष के एक लड़के का किरदार निभाया था, जो एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था। इतनी कम उम्र ही वह 70 साल के किसी बूढ़े जैसा दिखता था। फिल्म में अमिताभ का मेकअप कुछ इस तरह किया गया था कि स्क्रीन पर उन्हें पहचान पाना बहुत मुश्किल था। उनके मेकअप के साथ-साथ उनकी एक्टिंग ने इस किरदार में ऐसी जान डाली थी, जिसकी तारीफ करते लोग नहीं थकते हैं। यह अमिताभ के लिए काफी चैलेंजिंग कोल रहा था। इस फिल्म में अपने उत्कृष्ट अभिनय के लिए अमिताभ ने ढेर सारे पुरस्कार भी जीते थे, जिसमें बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल है।  
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पीकू फिल्म - फोटो : social media
फिल्म का नाम- पीकू (2015)
इस लिस्ट में आखिरी नंबर फिल्मी पर्दे पर अमिताभ की तीसरी पारी में रिलीज हुई फिल्म 'पीकू' का है। साल 2015 में रिलीज हुई इस फिल्म में अमिताभ ने एक बंगाली का किरदार निभाया था, जिसे कॉन्स्टिपेशन की बीमारी होती है। अपनी बीमारी के चलते वह अपनी बेटी की शादी भी नहीं होने देना चाहता क्योंकि उसे डर है उसके बाद उसकी देखभाल कौन करेगा। इस फिल्म में अमिताभ ने अपना किरदार बड़ी ही काबिलियत से निभाया है, जिसे देख दर्शक भी दंग रह गए थे। इस फिल्म में किए गए बेहतरीन अभिनय के लिए अमिताभ को नेशनल अवॉर्ड भी मिला है।
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