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पाठकों के सवाल पर बोले छिछोरे के निर्देशक, काश! मैं मधुबाला का हीरो बन पाता, पढ़ें-ऐसे 10 सवाल-जवाब

Sat, 03 Aug 2019 12:23 PM IST
भावना शर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई
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nitesh tiwari - फोटो : social media
अमर उजाला पाठकों के लिए हम एक नई श्रृंखला शुरू कर रहे हैं, सितारों से पूछिए सवाल। इसमें फिल्मी सितारे अमर उजाला के पाठकों के 10 बेहतरीन सवालों के जवाब दिया करेंगे। श्रृंखला की शुरुआत हम कर रहे हैं मशहूर निर्देशक नितेश तिवारी से, जिनकी पहली फिल्म चिल्लर पार्टी ने ही राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता और आमिर खान की फिल्म 'दंगल' के बाद तो वह पूरी दुनिया में मशहूर हो गए।
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chhichhore - फोटो : social media
पिलखुआ की प्रेरणा कंसल, सीतापुर के आशुतोष त्रिपाठी और आगरा के राहुल कुमार का सवाल है कि आपकी अगली फिल्म का नाम छिछोरे ही क्यों रखा गया?

फिल्म छिछोरे कीे कहानी का एक बड़ा हिस्सा कॉलेज और हॉस्टल लाइफ पर आधारित है और ये मैंने अपनी हॉस्टल लाइफ में भी देखा है। इसी को मैंने परदे पर उतारने की कोशिश की है। अगर आप हॉस्टल में रहे हैं तो आपको एहसास होगा कि हर एक बच्चे में किसी ना किसी स्तर पर एक छिछोरा छुपा रहता है। छिछोरा का मतलब गलत ना लें।  इस शब्द के जरिए मैं कहना चाहता हूं बदमाश और शरारती लेकिन मुझे छिछोरे शब्द काफी अच्छा लगा इसीलिए फिल्म का नाम छिछोरे रखा गया है। 
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nitesh tiwari - फोटो : social media
हापुड़ के विशाल शर्मा जानना चाहते हैं कि फिल्म छिछोरे की जो टैगलाइन है ‘कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी’ इसका विचार आपको कहां से आया?

हॉस्टल में आप दोस्त बनाते हैं। उनमें से कुछ जिंदगी भर साथ रहते हैं। आप ज़िंदगी में किसी भी मुकाम पर पहुंच जाएं आप उससे वैसे ही मिलेंगे जैसे तब मिला करते थे। उदाहरण के तौर पर अगर आप अपने दोस्त को चिढ़ाने के लिए दर्द कुमार के नाम से बुलाते थे तो आप उसको जब भी मिलेंगे, उसकी पीठ पर धौल जमाकर यही बोलेंगे, ‘और भई दर्द कुमार क्या हाल हैं तेरे, मोटा होगया है तू तो।’ यानी दोस्ती जैसी थी वैसी ही रहती है। कभी बदलती नहीं है।उम्र के साथ दोस्ती नहीं बदल सकती। 

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nitesh tiwari - फोटो : social media
मेरठ से अहमद खान जानना चाहते हैं कि सौ करोड़ की फिल्मों पर हल्ला मच जाने वाले दौर में आपकी फिल्म दंगल ने दुनिया भर में 2200 करोड़ रुपये कमाए। क्या आप मानते हैं कि हर कहानी को कहने के लिए एक एक्सपर्ट टीम की जरूरत होती है?

आप कभी भी यह विचार लेकर नहीं चल सकते कि आपकी फिल्म 2200 करोड़ ही कमाएगी। मेरे लिए शुरूआती दौर में यही सोच रहती है कि एक अच्छी फिल्म बनानी है। एक ऐसी फिल्म बनानी है जिसे थियेटर में जाकर देखने वाले लोगों का मनोरंजन हो और उसके साथ साथ वह कुछ सीखें भी। उसके बाद हर एक फिल्म का अपना सफर होता है। हमें कभी भी यह सोचकर फिल्म नहीं बनानी चाहिए कि वह इतने पैसे कमा पाएगी या नहीं। फिल्म बनाने का मकसद अच्छी कहानी पेश करना है। 
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nitesh tiwari - फोटो : social media
शुक्लागंज, उन्नाव के अंकित झा जानना चाहते हैं कि आप अपनी अब तक की सफलता का क्रेडिट किसे देना चाहेंगे?

मैं अपनी कामयाबी के श्रेय का एक बड़ा हिस्सा अपने टीम मेम्बर्स को ही दूंगा। एक निर्देशक अपनी टीम के बिना कुछ नहीं है। जो फिल्म होती है एक गाड़ी की तरह होती है। गाड़ी का अगर एक भी पुर्जा ठीक से काम न करे तो पूरी गाड़ी बंद पड़ जाती है। 

गुरुग्राम, हरियाणा के मनोज सोनी का सवाल है कि आपको किस अभिनेता के साथ काम करना बहुत अच्छा लगता है औऱ क्या ऐसे भी अभिनेता है जिनको आप बार बार अपनी फिल्मों लेते हैं या लेना चाहते हैं?

सबसे पहले तो मेरे लिए फिल्म की कहानी महत्वपूर्ण होती है। मेरा शुरूआती खयाल यही होता है कि क्या मेरे पास एक अच्छी कहानी है। उसके बाद फिर मैं सोचता हूं कौन वह कलाकार होगा जो इस कहानी के किरदार को अच्छे से निभा पाएगा। मैं अपने आपको बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि जो भी कहानियां अभी तक मैंने किसी कलाकार के साथ बनाने की सोची,  वह सभी कलाकार एक बार में ही उसे करने के लिए राजी हो गए। उम्मीद करता हूं की आने वाले समय में भी मेरे साथ ऐसा ही होता रहे। 
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नितेश तिवारी - फोटो : social media
मलिहाबाद लखनऊ के अरशद अब्दुल गफ्फार पूछ रहे हैं कि आपकी किसी खास एक्टर के साथ काम करने की कोई ख्वाहिश है क्या और जितने लोगों के साथ आप काम कर चुके हैं उनमें से सबसे अच्छा मिजाज किसका लगा?

मैं अपने आपको बहुत खुशकिस्मत मानता हूं। जितने भी बड़े सितारों के साथ मैंने काम किया है  उन सभी के साथ मेरा समय अच्छा बीता। कभी भी इन कलाकारों ने मुझे ऐसा लगने नहीं दिया कि मैं इतने बड़े सितारों के साथ काम कर रहा हूं। बात रही किस कलाकार के साथ मैं काम करना चाहता हूं तो मैं इस वक्त आलिया भट्ट के साथ काम करना चाहता हूं। 

अलीगढ़ के नुरूज्जमा अरशद जानना चाहते हैं कि फिल्म चिल्लर पार्टी का आइडिया आपको कैसे आया? फिल्मी और रीयल सोसाइटी में आप कितना फर्क पाते हैं?

मेरी फिल्में अक्सर समाज का आइना ही रहती हैं। जो भी मेरे किरदार रहते हैं उन्हें मैं अपने इर्द गिर्द से ही बटोरकर प्रसतुत करता हूं। थोड़ा बहुत नाम मात्र का ही बदलाव करता हूं। चिल्लर पार्टी में भी जो बच्चों के किरदार थे, उन सभी किरदारों को मैने कहीं ना कहीं पहले देखा है। जैसे सैकेंड हैंड जो बच्चा है जिसको अपने बड़े भाई के उतरे हुए कपड़े मिलते हैं, मैने खुद अपने बचपन में नए कपड़े बहुत कम पहने थे। सब बड़े भाई के पुराने कपड़े ही आल्टर करवाकर पहनने को मिलते थे। बहुत सार बच्चे ऐसे भी हैं जो चड्ढी पहनना पसंद नहीं करते हैं तो जांघिया का किरदार वहीं से निकलकर आया। ये सब किरदार हमारे इर्द गिर्द ही फैले हुए हैं, आपको बस उन्हें उठाना है और एक अच्छे तरीके से प्रस्तुत करना है। 
 
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nitesh tiwari - फोटो : social media
गजरौला, मुरादाबाद के संजीव सिंह धारीवाल का सवाल थोड़ा गंभीर है। वह जानना चाहते हैं कि क्या छात्रों को पढ़ाई के लिए कर्ज न मिल पाने की समस्या पर कभी कोई फिल्म आप बनाना चाहेंगे?.

अगर इस तरह की किसी कहानी को मैं अच्छे प्रस्तुत कर पाऊं तो बिल्कुल बनाउंगा। पर अभी तक मैने इस तरह की कहानी पर कुछ सोचा नहीं है। कभी कुछ अच्छी कहानी मिलेगी तो जरूर बनाउंगा। एक फिल्मकार होने के नाते मैं हर तरह के विचार पर फिल्म बनाना चाहूंगा। 

कानपुर के आदिल खान ने सवाल पूछा है कि आपके अब तक के फिल्मी करियर का कोई ऐसा संस्मरण बताएं जो आपके चाहने वालों के प्रेरणादायी हो और आप भी इसे अब तक न भूले हों?

मेरी हर एक फिल्म मेरे लिए अविस्मरणीय है। क्योंकि मैने कभी सोचा नहीं था कि मैं फिल्में बनाऊंगा। दूसरे कभी यह भी नहीं सोचा था कि मैं उन लोगों के साथ फिल्में बनाउंगा जिनका मैं बहुत बड़ा फैन रह चुका हूं। इसलिए मैं यह कहूंगा कि मैं एक सपनों की दुनिया में ही जी रहा हूं, जहां मेरा हर सपना साकार हो रहा है। 
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nitesh tiwari - फोटो : social media
और आखिरी सवाल आगरा के राहुल कुमार का। थोड़ी देर के लिए अगर मान लिया जाए कि आपको कोई निर्देशक बतौर हीरो साइन कर लेता है तो आपके जेहन में अपनी हीरोइन के तौर पर सबसे पहला नाम किसका आएगा?

सबसे पहले तो मुझे हीरो लेकर फिल्म बनाने वाले से मैं यही कहूंगा कि फिल्म बनाने के जो भी पैसे उनके पास हैं, वह मुझे दे दें क्योंकि बतौर हीरो मेरी फिल्म कोई देखने वाला नहीं। लेकिन सवाल पूछा ही है और अगर कल्पना में भी ऐसा हुआ तो मैं स्वर्गीय मधुबाला के साथ हीरो बनना चाहूंगा। काश, ऐसा हो पाता।

(सितारों से सवाल पूछने के लिए फेसबुक पर अमर उजाला बिंदास पेज (https://www.facebook.com/AmarUjalaBindas) फॉलो और लाइक करें)
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