अखिलेंद्र मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
लालटेन के उजाले में नाटक
अखिलेन्द्र मिश्र ने अभिनय की शुरुआत अपने गांव से ही कर दी। वह बताते हैं, 'नाटक हमने पेट्रोमैक्स के उजाले में किया और नाटक का रिहर्सल लालटेन के उजाले में। फिर इप्टा के साथ जुड़कर काफी समय तक थिएटर किया। अस्सी का दशक और बिहार का ब्राहण परिवार, ऐसे में सिनेमा और नाटक के बारे में सोचना ही अच्छा नहीं माना जाता था। पढ़ लिखकर कोई नाटक, नौटंकी करे तो उसका कोई सम्मान ही नहीं था। आज भी गांव में सिनेमा करने वालों को अच्छा नहीं मानते हैं। आज आईएएस, पीसीएस , डॉक्टर, इंजीनियर का गांव में जो सम्मान है वह सिनेमा वालो को नहीं मिलता है। आज सिनेमा में कितना भी नाम और पैसा कमा लो लेकिन आज भी लोगों का नजरिया वैसा ही है।'