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आत्मा और मोबाइल का मेल है 2.0, फिल्म के ये हैं वो 5 सीन जो हजम नहीं होंगे

Thu, 29 Nov 2018 07:30 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम/ दिल्ली
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2.0
साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत और खिलाड़ियों के खिलाड़ी अक्षय कुमार की फिल्म 2.0 ने सिनेमाघरों में रिलीज होते ही धमाका मचा दिया है। पहले दिन के कलेक्शन भी काफी अच्छे बताए जा रहे हैं। रिलीज से पहले ही आधा बजट निकाल चुकी फिल्म को जब हमने बड़े परदे पर देखा तो फिल्म में तकनीक तो कमाल की है, लेकिन कुछ सीन ऐसे हैं, जो हजम नहीं होंगे। 

 
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2.0 - फोटो : twitter
पैडमैन और टायलेट एक प्रेम कथा की तरह अक्षय कुमार इस फिल्म के माध्यम से भी सामाजिक मैसेज देने में कामयाब रहे कि मोबाइल के बढ़ते प्रयोग के चलते बढ़ाई जा रही रेडियो फ्रीक्वेंसी आकाश में उड़ रहे पक्षियों के लिए घातक है। अक्षय कुमार फिल्म में मुख्य विलेन 'पक्षीबाज' की भूमिका में हैं, लेकिन उनका जन्म कैसे हुआ। उन्हें असीम ताकतें कैसे मिलीं। हालांकि साइंटिफिकली समझाने की कोशिश की गई, लेकिन ऐसा असंभव प्रतीत होता है।
 
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2.0
एक सीन में हीरो जड़ा मोबाइल एक मंत्री का कत्ल कर देता है, लेकिन एक्सरे में भी वह मोबाइल पकड़ में नहीं आता। डाक्टर भी इससे हैरान हो जाते हैं कि जब इनके शरीर में कुछ नहीं है तो इन्हें सांस क्यों नहीं आ रहा। उधर सांस न आने के चलते मंत्री दम तोड़ देते हैं। दम तोड़ते ही मोबाइल शरीर के अंदर नजर आने लगता है। जब मोबाइल अंदर था तो स्कैनिंग में क्यों नहीं आया।
 

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2.0
रोबोट फिल्म में देखने को मिला था कि एक सीन में चिट्टी दैत्याकार रूप धारण कर लेते हैं, ऐसे में 2.0 में भी चिट्टी को जब दैत्याकार रूप लेना था तो उन्हें मैगनेट सिस्टम क्यों एक्टीवेट करना पड़ा, जिससे शहर का सारा लोहा, सिक्के, वाहन उड़कर उनके शरीर से टकराए और वे दैत्याकार 'पक्षीबाज' को टक्कर देते हैं। वह भी तब, जब चिट्टी को इस फिल्म में काफी मॉडीफाइड दिखाया है। 
 
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2.0 - फोटो : twitter
'पक्षीबाज' को टक्कर देने के लिए चिट्टी साइंस से तो कुछ भी बना सकता था, जो उसने किया, लेकिन इतनी संख्या में पक्षी वह कहां से लाया, जिससे कि वह 'पक्षीबाज' को टक्कर दे पाया। मनोरंजन के हिसाब से तो दर्शकों ने इस सीन पर जमकर तालियां बजाईं, लेकिन सीन कुछ ऐसा बन गया जो दिखने में बेहद असंभव से प्रतीत हुआ।
 
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2.0 - फोटो : twitter
'इंसाफ न मिलने पर सुसाइड जैसा कदम उठा लो' ये बिल्कुल नकारात्मक विचार हैं, लेकिन फिल्म का मुख्य विलेन यही कदम उठाता है और अपने तर्कों के माध्यम से ये बताने का प्रयास करता है कि वह जो कर रहा है बिल्कुल ठीक हैं। पक्षियों को बचाने के मकसद से एक सीन में वह निर्दोष लोगों को मारने को भी तैयार हो जाता है। ये सीन भी लोगों को कम ही हजम होगा।
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