अपने दमदार अभिनय से तकरीबन हर फिल्म में तालियां बटोरने वाली अभिनेत्री नुसरत भरूचा की नई फिल्म 'अकेली' युद्धग्रस्त इराक में फंसी एक लड़की की सत्य घटना पर आधारित फिल्म है। नुसरत ने इस फिल्म उस असल भारतीय लड़की की भूमिका निभाई है, जो युद्धग्रस्त इराक में नौकरी करने जाती है और वहां अकेली फंस जाती है। आईएस के चंगुल के आने के बाद वहां से निकलने के लिए उसका संघर्ष ही फिल्म की असल कहानी है। इजरायली सीरीज 'फौदा' से मशहूर हुए अभिनेता त्साही हलेवी और अमीर बुट्रोस इस फिल्म से हिंदी सिनेमा में अपनी शुरुआत कर रहे हैं। फिल्म का निर्देशन प्रणय मेश्राम ने किया है और इसे प्रणय मेश्राम ने ही गुंजन सक्सेना के साथ मिलकर लिखा भी है। प्रणय से हमने जानने की कोशिश इस फिल्म की मेकिंग के बारे में...
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अकेली
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
नाम सार्वजनिक न करने की शर्त
फिल्म 'अकेली' एक सत्य घटना पर आधारित फिल्म है। निर्देशक प्रणय मेश्राम कहते हैं, 'मैं किसी काम के सिलसिले में साल 2016 दुबई में गया हुआ था। वहां मेरी मुलाकात एक युवती से हुई, उनका नाम मैं नहीं बता पाऊंगा क्योंकि उनकी शर्त यही थी कि उनके नाम को सार्वजनिक न करूं। वह जॉब के लिए इराक गई थी और उनके साथ वहां क्या-क्या हुआ? किस तरह से वह सभी बाधाओं के बावजूद जिंदा रहने के लिए संघर्ष करती रहीं और अपने देश वापस आईं, यही फिल्म ‘अकेली’ की कहानी है।'
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अकेली
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विदेश मौका नहीं धोखा भी हो सकता है
प्रणय मेश्राम कहते हैं, 'हम यहीं सोचते हैं कि लोग बाहर कमाने जाते हैं, वहां उनकी जिंदगी अच्छी होती होगी, लेकिन ऐसा नहीं होता है। हमेशा सबकी जिंदगी अच्छी नहीं होती। बाद में मैंने इस विषय पर और रिसर्च की तो मुझे पता चला कि जब सुषमा स्वराज विदेश मंत्री थी तो अपने कार्यकाल में इराक से कई लोगों को सुरक्षित निकालकर लाईं थी। उनमें कई लड़कियां भी शामिल थीं। यह ऐसी कहानी है, जिसके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं है। मैंने सोचा कि इस पर फिल्म बनानी चाहिए।'
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प्रणय मेश्राम
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उज्बेकिस्तान में ‘अकेली’ की शूटिंग
फिल्म 'अकेली' की 90 प्रतिशत शूटिंग उज्बेकिस्तान में हुई है। निर्देशक प्रणय मेश्राम कहते हैं, 'चुकी फिल्म की पृष्ठभूमि इराक की है। इराक में तो शूटिंग कर नहीं सकते थे। इसलिए मुझे इराक जैसे दिखने वाली लोकेशन की तलाश थी,। उसके लिए मेरे पास तीन चार लोकेशन थे, जिसमें तुर्की, जॉर्डन, अबू धाबी और उज्बेकिस्तान था। जब फिल्म के लिए नुसरत की डेट मिली तो उस वक्त मेरे पास सिर्फ 48 दिन बाकी थे। शुरुआत में तुर्की और अबू धाबी में काफी कोशिश की। लेकिन कुछ कारण वश वहां नहीं जा पाए और उज्बेकिस्तान से हमें अच्छा सपोर्ट मिल रहा था। इसलिए हमने वहां शूटिंग की।'
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प्रणय मेश्राम
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उज्बेकिस्तान के लोगों ने किया अभिनय
अभिनेता विद्युत जमवाल की फिल्म 'खुदा हाफिज' के बाद 'अकेली' दूसरी ऐसी फिल्म है जिसकी शूटिंग उज़्बेकिस्तान में हुई है। प्रणय मेश्राम कहते हैं, 'उस देश के लोगों को शूटिंग के बारे में ज्यादा पता नहीं होता है। वहां के लोग न तो हिंदी बोलते हैं और न इंग्लिश बोलते हैं, इसलिए भाषा को लेकर बहुत समस्या हुई। कुछ किरदार और जूनियर आर्टिस्ट हमने वहीं से लिए हैं। उनको न तो शूटिंग के बारे में कुछ पता था और न ही रंगमंच के कलाकार थे लेकिन उन्होंने फिल्म में इतनी अच्छी एक्टिंग की है, उनको देखकर लगता है कि सधे हुए कलाकार हैं।’
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नुसरत को ध्यान में रखकर लिखी फिल्म
निर्देशक प्रणय मेश्राम दुबई में जिस युवती से मिले थे, उसकी कद काठी बिलकुल नुसरत भरूचा की जैसी थी। वह कहते हैं, 'जब मैं कहानी लिख रहा था तो सोच रहा था कि इस तरह की कद काठी में फिट होने वाली कौन सी आर्टिस्ट हो सकती है? उस वक्त नुसरत दिमाग में थी और कहानी नुसरत को ही ध्यान में रखकर लिख रहा था। लेकिन उस समय मेरे दिमाग में यह बात नहीं थी कि वह फिल्म करेंगी भी या नहीं क्योंकि इससे पहले उसने इस तरह के किरदार नहीं निभाए थे। जब मैं कास्टिंग डायरेक्टर विकी सदाना से मिला तो उन्होंने ही पूछा कि नुसरत चलेगी क्या? मैंने कहा कि वही तो चाहिए, उन्हीं को तो सोचकर लिख रहा था।'
जब नुसरत भरूचा ने कर दिया मना
फिल्म 'अकेली' में नुसरत भरूचा का जिस तरह का किरदार है, पहले उन्होंने इस तरह के किरदार नहीं निभाए हैं। प्रणय मेश्राम कहते हैं, 'नुसरत को अप्रोच किया और दो दिन के बाद स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मिलने आई। उनको स्क्रिप्ट तो बहुत पसंद आई, लेकिन काम करने से मना कर दिया। फिर मुझे काफी समय लगा उनको तैयार करने में, उसके बाद वह फिल्म में काम करने के लिए राजी हुईं।'
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सिनेमा के प्रति कब रुझान हुआ पता नहीं
प्रणय मेश्राम के पिता पुलिस विभाग में थे और उनकी मां लेक्चरर थी। प्रणय कहते हैं, 'मैं नागपुर में पैदा हुआ था और तीन -चार साल की उम्र में मम्मी डैडी के साथ मुंबई आ गया था। मेरा सिनेमा के प्रति कब रुझान हुआ मुझे पता ही नहीं चला। मैं सभी फिल्में देखता था और आज भी देखता हूं। मेरे पापा विजय मेश्राम आठ साल पहले असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के पद से रिटायर हुए और मम्मी सुमन मेश्राम एसएनडीटी कॉलेज से लेक्चरर के पद से रिटायर हुई हैं।'
पहला मौका पंकज कपूर ने दिया
बचपन से ही प्रणय मेश्राम को कहानियां लिखने का शौक था। वह कहते हैं, 'मैंने मुंबई के फातिमा स्कूल से स्कूल की पढ़ाई की और सोमैया कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। लेकिन जब मैं सातवी में था, तभी से कहानियां लिख रहा हूं। अब तक मैंने बहुत सारी कहानियां लिख कर रखी हुई है, जिस पर आगे फिल्में बनाऊंगा। मैने सहायक निर्देशक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत पंकज कपूर के साथ फिल्म 'मौसम' से की थी। उनके बाद तो 'क्वीन', 'हंसी तो फंसी' के अलावा बहुत सारी वेब सीरीज में भी सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया।'