फिल्म ‘अजमेर-92’ रिलीज से पहले ही विवाद के घेरे में आ चुकी है। जी हां, कथित तौर पर कहा जा रहा है कि यह फिल्म अल्पसंख्यक समुदाय को टारगेट करती है और 30 साल पहले अजमेर में टीनएज लड़कियों पर हुए आपराधिक हमले पर बेस्ड है। वहीं, फिल्म के कंटेंट को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ‘अजमेर-92’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे बैन करने की मांग की है।
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मौलाना महमूद मदनी
- फोटो : सोशल मीडिया
जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा है, 'अजमेर शरीफ की दरगाह को बदनाम करने के लिए बनी फिल्म पर फौरन प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।आपराधिक घटनाओं को धर्म से जोड़ने के बजाय अपराधों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की जरूरत है यह फिल्म समाज में दरार पैदा करेगी।"
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मौलाना महमूद मदनी
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मौलाना मदनी ने कहा कि अजमेर शहर में जिस तरह से आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं वह पूरे समाज के लिए एक घिनौनी हरकत है। उन्होंने आगे कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक वरदान के साथ-साथ किसी भी लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसकी आड़ में देश को तोड़ने वाले विचारों और धारणा को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है।
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मौलाना महमूद मदनी
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मदनी ने आगे कहा, ''ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिनकी दरगाह अजमेर में है को हिंदू-मुस्लिम एकता का जीवंत उदाहरण और लाखों लोगों के दिलों पर राज करने वाला बताया। उन्होंने चिश्ती को देश में शांति और सद्भाव का दूत बताया जिन लोगों ने उनके पवित्र व्यक्तित्व का अपमान या अपमान करने की कोशिश की, वे खुद अपमानित हुए है।"
पुष्पेंद्र सिंह के डायरेक्शन में बनी ‘अजमेर 92’में जरीना वहाब, सयाजी शिंदे, मनोज जोशी और राजेश शर्मा मुख्य किरदार में नजर आएंगे। फिल्म रियल बेस्ड स्टोरी बताई जा रही है। फिल्म में अजमेर में सालों पहले 100 से ज्यादा युवा लड़कियों के ब्लैकमेल किए जाने और फिर उनके सीरियल सेक्सुअल असॉल्ट का शिकार होने की कहानी दिखाई गई है। फिल्म के कंटेंट को लेकर ही विवाद गहरा रहा है।