कविता कृष्णमूर्ति
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अपनी बात को जारी रखते हुए कविता कहती हैं, 'किसी में भी इतना साहस नहीं था कि वह आरडी बर्मन, खय्याम साहब, ओपी नैयर या रविंद्र जैन से यह कह सके कि आप इस गायक को ले लीजिए। यह सब खुद अपने फैसले लिया करते थे। अगर एक गाना किसी गायक पर फिट नहीं बैठ रहा है तो वह दूसरा संगीत बनाया करते थे। पहले संगीतकारों का कहना था कि गायक की आवाज सूट करनी चाहिए। इसलिए संगीतकार अलग-अलग आवाजों जैसे, अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और मेरे लिए संगीत बनाया करते थे।'