साकिब सलीम
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साकिब ने आगे लिखा, 'हर कोई एक दूसरे पर उछालने के लिए तैयार है, एक जगह जो कि बदमाशियों से भर गई है, एक ऐसी जगह जहां लोगों को गाली देना एक सामान्य आचार संहिता है। पिछले कुछ दिनों ने मुझे यह महसूस करने के लिए मजबूर किया है कि मुझे अपने जीवन में इस तरह की ऊर्जा की आवश्यकता नहीं है, जहां मैं घृणा के लिए रहूं, जहां दयालुता खो जाती है।'