अदिति राव हैदरी के नाम का मध्य राव उनकी मां विद्या राव से लिया गया है और उनका कुलनाम हैदरी है उनके पिता एहसान हैदरी की विरासत का। हैदरी परिवार हैदराबाद की निजाम रियासत का वफादार रहा और उनसे चार पीढ़ी पहले के अकबर हैदरी हैदराबाद रियासत के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। बचपन में ही अपने मां के साथ दिल्ली आ गईं अदिति ने ‘दिल्ली 6’, ‘रॉकस्टार’, ‘वजीर’, ‘फितूर’ और ‘दास देव’ जैसी तमाम हिंदी फिल्मों में काम किया है, लेकिन उनकी असल धमक हिंदी सिनेमा में बनी बीते साल रिलीज हुई वेब सीरीज ‘जुबली’ से। ‘अमर उजाला टॉप 10 ओटीटी स्टार्स 2023’ की लिस्ट में नंबर वन रहीं अदिति से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की खास बातचीत।
‘जुबली’ की अदाकारा अब ‘हीरामंडी’ की फनकारा बन गई है! गाने भी वह गा रही है। कंपनियां उसका विनाइल रिकॉर्ड निकालने को बेताब हैं। कहानियां दोनों अतीत की हैं, कितना चुनौती भरा रहा इन दो पीरियड कहानियों में काम करना?
उसी में तो मजा है। दोनों पीरियड फिल्म जैसी कहानियां हैं लेकिन दोनों का कालखंड अलग है और दोनों की कहानियां बिल्कुल अलग हैं। मुझे ये अनुभव बिल्कुल सपनों में घूमने वाले चित्रों (सरियल) जैसा लगा। आप तो जानते ही हैं कि ‘जुबली’ के निर्देशक विक्रमादित्य मोटवानी ने सिनेमा संजय लीला भंसाली की शागिर्दी में सीखा है। वह संजय सर के सहायक रहे हैं।
बतौर निर्देशक संजय लीला भंसाली के बारे में आपका क्या मानना है?
संजय सर एक गुरु शिष्य परंपरा के तहत काम करते हैं। देखा जाए तो वह बहुत सारे महान लोगों का एक तरह से मिश्रित अवतार हैं। उनके निर्देशन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह कैमरे क सामने एक कलाकार को खिलने का पूरा मौका देते हैं। हर कलाकार की एक छवि उन्होंने अपने मन में बना रखी होती हैं, और जो उनके सपने होते हैं, इन किरदारो के लिए वे भी आश्चर्यचकित कर जाते हैं। किरदारों की भावनाओं को लेकर उनकी समझ इतनी विशाल है कि उनके सेट पर होना ही मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं था।
एक और बात जो मुझे ये सीरीज देखते समय नजर आई, वह थी आपके चेहरे पर दिखने वाली एक अनोखी चमक। इतना तो कोई युवती सिर्फ प्रेम में ही दमकती है। क्या ये सिद्धार्थ से मोहब्बत का सुरुर माना जाए?
अरे, वह तो संजय सर का आशीर्वाद था मुझ पर। यही मैं कह सकती हूं आपके सवाल के जवाब में। या, मुझे पता नहीं..। लेकिन, थैंक यू, थैंक यू, थैंक यू!