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Exclusive: ‘हमें कभी पांच फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिलता’, अदिति राव हैदरी ने बताई बॉलीवुड से दूरी की वजह

सार

Aditi Rao Hydari Exclusive Interview: एक्ट्रेस अदिति राव हैदरी हाल ही में ‘गांधी टॉक्स’ में विजय सेतुपति के अपोजिट नजर आईं। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि यह साइलेंट फिल्म उनके लिए कितनी खास थी?
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अदिति राव हैदरी - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला डिजिटल से बातचीत के दौरान अदिति ने आर्ट फिल्मों की किस्मत पर बात की। साथ ही बीते कुछ साल में हिंदी फिल्मों में कम काम करने का कारण भी खुलकर बताया। पढ़िए इस बातचीत के कुछ प्रमुख अंश: 

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'गांधी टॉक्स' में अदिति राव हैदरी और विजय सेतुपति - फोटो : यूट्यूब ग्रैब

गांधी टॉक्स के लिए हामी भरने की सबसे बड़ी वजह क्या रही? 
मेरा हमेशा से सपना रहा कि मैं किसी मूक फिल्म में काम करूं। जब गांधी टॉक्स मेरे पास आई, तो मैं सच में बेहद खुश हुई। फिल्म की टीम ने इसे और भी दिलचस्प बना दिया। जिस तरह किशोर (निर्देशक) ने इसका ढांचा बनाया, रहमान ने शानदार संगीत दिया और विजय सेतुपति, अरविंद स्वामी व सिद्धार्थ जाधव जैसे बेहतरीन कलाकार मिले। सबने मिलकर इस फिल्म को खास बना दिया। इसके अलावा मेरे किरदार को लेकर किशोर ने साफ कहा था कि यह सिर्फ एक लव इंटरेस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि कहानी का भावनात्मक हिस्सा भी है। 


 
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अदिति राव हैदरी  - फोटो : इंस्टाग्राम@aditiraohydari

एक मूक फिल्म में अभिनय करना कितना मुश्किल होता है? 
एक्टर होने के नाते हर फिल्म अपने आप में चुनौती होती है पर मूक फिल्म की चुनौतियां थोड़ी अलग ही होती हैं। इसमें संवाद ही नहीं होते। सब कुछ आपकी बॉडी लैंग्वेज, आपकी आखों और भीतर क्या महसूस हो रहा है उस पर निर्भर करता है। बिन कुछ कहे अपनी भावनाएं दिखाने की यह प्रक्रिया मुझे बहुत पसंद है।

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अदिति राव हैदरी  - फोटो : इंस्टाग्राम@aditiraohydari

आज का दर्शक प्रयोगात्मक फिल्में देखता है? या फिर जज करते हुए आगे बढ़ जाता है?
यह सच है कि मूक फिल्म कई लोगों के लिए नई चीज है, इसलिए इसकी पेस थोड़ी धीमी है। दुर्भाग्य से, हम फिल्मों को थिएटर में बढ़ने ही नहीं देते क्योंकि हम शुक्रवार के अंत तक ही फिल्म की किस्मत का फैसला कर देते हैं। सच ताे यह है कि ऐसी फिल्मों को समय चाहिए। इन्हें ध्यान देकर महसूस करना पड़ता है। 

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अदिति राव हैदरी - फोटो : इंस्टाग्राम@aditiraohydari
चार साल में हमने आपको ज्यादा हिंदी फिल्मों में नहीं देखा। क्या वजह रही?
बात बस इतनी सी है कि अगर मुझे अच्छा काम मिलेगा तो ही मैं हिंदी फिल्में करूंगी। सच्चाई यह है कि हम जैसे लोग जो बाहर से बॉलीवुड में आते हैं, हमें हर फिल्म के साथ बॉलीवुड में खुद को साबित करना पड़ता है और मैं यह बिना किसी शिकायत या नकारात्मकता के कह रही हूं। ऐसा कभी नहीं होता कि हमने पांच फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिए हों। हमें हर नई फिल्म में खुद को फिर से प्रूव करना पड़ता है। मैं 2011 से काम कर रही हूं और मेरा मानना है कि टैलेंट अपना रास्ता खुद बना लेता है। बाकी मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे देश के कई शानदार निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिला।



 
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