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तीन साल तक पाकिस्तान की जेल में कैद था ये अभिनेता, 50 की उम्र में बॉलीवुड में एंट्री कर दी थी हिट फिल्में

Wed, 12 May 2021 09:17 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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ए०के० हंगल - फोटो : सोशल मीडिया
सिनेमा की दुनिया में ऐसे कई अभिनेता हुए हैं, जिनके अभिनय का लोगों ने लोहा माना। बीते हुए जमाने के अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के बारे में आज की पीढ़ी काफी कम जानती है। जो लोग एक्टिंग की पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें पुराने कलाकारों की फिल्में जरूर देखनी चाहिए। ऐसे ही एक बेहतरीन अभिनेता के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिनके अभिनय को देखकर दर्शक ताली जरूर बजाते थे। उन्होंने रुपहले पर्दे पर पिता, दादा, चाचा, दोस्त, नौकर हर किरदार निभाया और दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बना ली। आज हम अभिनेता ए के हंगल के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। एके हंगल ने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं लेकिन अपनी जिंदगी के अंतिम दिनों में वो पाई-पाई को मोहताज हो गए थे। तो चलिए जानते हैं एके हंगल के बारे में और उनसे जुड़ी कुछ खास बातें...
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फिल्म शोले के दृश्य में ए०के० हंगल
कई लोग ऐसे होंगे जो शायद अभिनेता एके हंगल को नाम से नहीं पहचानते होंगे, तो आपको याद दिला दें फिल्म 'शोले' का वो मशहूर डायलॉग 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई'। आज भी ये डायलॉग लोग अक्सर बोल जाते हैं लेकिन फिल्म 'शोले' में इस डायलॉग को रहीम चाचा के किरदार में अभिनेता एके हंगल ने बोला था। हंगल साहब का पूरा नाम अवतार किशन हंगल था। जन्म एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनका बचपन पाकिस्तान के पेशावर में बीता। 
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ए०के० हंगल
फिल्मों में आने से पहले एके हंगल एक स्वतंत्रता सेनानी थे। साल 1929 से लेकर 1947 तक हंगल साहब ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। मार्क्सवादी होने की वजह से वो कराची की जेल में तीन साल तक कैद रहे। साल 1949 में जेल से छूटने के बाद हंगल अपने पूरे परिवार के साथ मुंबई आ गए। पेशावर में अभिनेता थिएटर किया करते थे, उन्हें एक्टिंग का शौक था। मुंबई आने के बाद उन्होंने फिल्मों में काम करने के बारे में सोचा।

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ए०के० हंगल
एके हंगल ने अपना फिल्मी करियर 50 साल की उम्र में शुरू किया। 1966 रिलीज हुई बासु भट्टाचार्य की फिल्म 'तीसरी कसम' उनकी पहली फिल्म थी। 70, 80 और 90 के दशक में उन्होंने खूब फिल्में कीं। हंगल साहब इतना शानदार अभिनय किया करते कि वो हर किरदार में फिट हो जाते। एके हंगल ने सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ 16 फिल्मों में काम किया था। इसके अलावा भी उन्होंने कई बड़े अभिनेताओं के साथ फिल्मों में काम किया।
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फिल्म नमक हराम के दृश्य में ए०के० हंगल
कहा जाता है कि शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने साल 1993 में एके हंगल की फिल्मों पर बैन लगा दिया था। बाल ठाकरे को अभिनेता का पाकिस्तान के नेशनल डे में हिस्सा लेना पसंद नहीं था। इस वजह से उनकी फिल्मों की रिलीज पर रोक लगा दी गई थी। एके हंगल ने हीर रांझा, नमक हराम, शौकीन, आइना, अर्जुन, आंधी, तपस्या, कोरा कागज, बाबर्ची, छुपा रुस्तम, बालिका बधु, गुड्डी, नरम गरम जैसी कई फिल्मों में अपने अभिनय का जादू चलाया।
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ए०के० हंगल
साल 2006 में सिनेमा में योगदान देने के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इतनी फिल्में करने और सम्मान पाने वाले अभिनेता एके हंगल की जिंदगी के अंतिम दिन बड़ी मुश्किलों में गुजरे। हंगल साहब 95 साल की उम्र में अपने बेटे के साथ खंडहर जैसे घर में रहा करते थे। एक वक्त ऐसा भी था जब अभिनेता एके हंगल की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उनके पास दवाईयों और मेडिकल बिल भरने तक के पैसे नहीं थे। 
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ए०के० हंगल
इसके बाद अभिनेता अपने घर में बाथरूम में फिसलकर गिर गए थे, जिसके बाद उनकी जांघ की हड्डी टूट गई और पीठ में भी चोट आई थी। उन्हें अस्पताल में सर्जरी के लिए ले जाया गया लेकिन सांस लेने में तकलीफ के चलते सर्जरी नहीं की जा सकी। हालत और खराब होती चली गई और फिर हंगल साहब को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रख दिया गया। धीरे-धीरे उनके फेंफड़ों ने काम करना बंद कर दिया और 98 साल की उम्र में 26 अगस्त 2012 को हंगल साहब ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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