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अभय देओल : बॉलीवुड का ऐसा अभिनेता, जिसके बयानों ने बनाईं सुर्खियां

Mon, 15 Mar 2021 05:49 PM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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अभय देओल - फोटो : फाइल फोटो
अभिनेता अभय देओल 15 मार्च को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। वे 45 साल के हो गए हैं। अभय अलग तरह की फिल्में करने के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा वह खुलकर कई मुद्दों पर अपनी राय भी रखते हैं। इस वजह से अभय विवादों में भी घिरे और वह लगातार सुर्खियों में रहे। तो चलिए उनके जन्मदिन के मौके पर बताते हैं ऐसे ही पांच बयान जिन पर आमतौर पर सितारे कुछ भी कहने से बचते हैं।
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अभय देओल - फोटो : फाइल फोटो
'आयशा' पर उठाए थे सवाल
साल 2010 में आई फिल्म आयशा जेन ऑस्टन की किताब एम्मा पर आधारित थी। फिल्म में सोनम कपूर और अभय देओल मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की कहानी एक ऐसी युवा महिला के इर्द गिर्द थी जिसे फैशन से बहुत प्यार है और जो जिंदगी के बारे में अवास्तविक विचार रखती है। फिल्म को लेकर अभय ने 11 साल पहले कहा था कि 'फिल्म का जेन ऑस्टन की एम्मा से कोई लेना देना नहीं है जैसा कि कई रिपोर्ट में कहा जा रहा है। जब मैं शूटिंग कर रहा था तो मुझे एहसास हुआ कि फिल्म अभिनय से ज्यादा कपड़ों के बारे में हैं। मैंने भी फिल्म की समीक्षा पढ़ी जिसमें कपड़ों की तारीफ की गई थी। मैं आज यह कहना चाहूंगा कि मैं अपने जीवनकाल में कभी भी आयशा जैसी फिल्म का हिस्सा नहीं बनूंगा। यह उस तरह की फिल्म नहीं है जैसा मैं करना चाहता हूं।'
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अभय देओल - फोटो : फाइल फोटो
गोरेपन की क्रीम का प्रचार करने वाले सितारों को सुनाई खरी खोटी
पिछले साल अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉएड की मौत के बाद ब्लैक लिव्स मैटर आंदोलन छिड़ गया। कई बॉलीवुड सितारों ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में मैसेज साझा किए। अभय ने यह कहकर उन सितारों पर निशाना साझा था जो अपने ही देश में रंगभेद को बढ़ावा देते हैं और गोरेपन का दावा करने वाली क्रीम का प्रचार करते हैं। अभय ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा- 'शायद अब समय है। अब भारतीय सितारे और मध्यम वर्ग अमेरिका में रंगभेद के खिलाफ आवाज उठा रहा है। शायद वह खुद को नहीं देखते।'

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अभय देओल, ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर - फोटो : फाइल फोटो
नेपोटिज्म का मुद्दा उठाया
अभय देओल ने फिल्म जिंदगी ना मिलेगी दोबारा फिल्म को नेपोटिज्म का शिकार बताया था। फिल्म की कहानी तीन दोस्तों पर आधारित थी लेकिन फिल्म के लिए अभय और फरहान को एक भी अवॉर्ड नहीं मिला। अभय ने लिखा, 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, 2011 में रिलीज हुई थी। इन दिनों अपनी इस फिल्म का बहुत नाम लेना पड़ रहा है। परेशान होने पर इस फिल्म को देखना बहुत सही है। मैं ये बताना चाहूंगा कि सभी अवॉर्ड शोज ने मुझे और फरहान को मुख्य किरदार से डिमोट कर दिया था। हमें सह अभिनेता के तौर पर नॉमिनेट किया गया था। जबकि ऋतिक और कटरीना को मुख्य किरदार के लिए नॉमिनेट किया गया था। इंडस्ट्री के हिसाब से ये एक लड़के और लड़की की प्रेम कहानी थी, जिसमें लड़के के दोस्तों ने उसकी मदद की। मैंने इस बात के खिलाफ बगावत की लेकिन फरहान को इससे दिक्कत नहीं थी।' इसके आगे अभय ने हैशटैग में लिखा, 'फैमिली फेयर अवॉर्ड'।
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अभय देओल
धर्मेंद्र से तुलना होने पर कही ये बात
अभय देओल ने धर्मेंद्र के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की और लिखा, 'मेरे चाचा, जिन्हें मैं प्यार से पिताजी कहता हूं, एक बाहरी व्यक्ति थे लेकिन इंडस्ट्री में बड़ा नाम कमाया। मुझे खुशी है कि पर्दे के पीछे चलने वाले सीन पर सक्रिय बहस हो रही है। नेपोटिज्म ऊंचाई का एक सिरा है। मैंने अपने परिवार के साथ केवल एक फिल्म की है। मैं धन्य हूं कि मुझे यह विशेषाधिकार मिला है। मैंने अपने करियर के लिए खुद रास्ता बनाया। मेरे पिताजी ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। मेरे लिए वह प्रेरणा थे।

नेपोटिज्म हमारी संस्कृति में हर जगह है, चाहें वह राजनीति हो बिजनेस हो या फिल्म हो। मैं इसके बारे में अच्छी तरह से जानता था और इसने मुझे अपने पूरे करियर में नए निर्देशकों और निर्माताओं के साथ मौके बनाने के लिए प्रेरित किया। इस तरह मैं ऐसी फिल्में बनाने में सक्षम हो गया जिन्हें अलग तरह की फिल्म माना गया। मुझे खुशी है कि उन कलाकारों और फिल्मों में से कुछ को जबरदस्त सफलता मिली।'  
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अभय देओल - फोटो : फाइल फोटो
'रांझणा' की कहानी की आलोचना
अभय देओल ने अपनी फिल्म रांझणा को लेकर कहा कि यह यौन उत्पीड़न को दर्शाता है। उनका कहना था कि फिल्म रांझणा एक गलत संदेश देती थी और यह फिल्म यौन उत्पीड़न को बढ़ावा देती है।
अभय ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'इतिहास इस फिल्म को गलत संदेश के लिए माफ नहीं करेगा। यह बॉलीवुड में दशकों से एक विषय रहा है, जहां एक लड़का एक लड़की का तब तक पीछा करता है जब तक वह हां नहीं करती। केवल सिनेमा में ही वह इच्छाशक्ति से काम करती है। वास्तव में हमने बार-बार देखा है कि यह कैसे यौन हिंसा को जन्म देता है।'
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