आमिर खान दो साल बाद बड़े परदे पर वापसी कर रहे हैं। हिंदी सिनेमा में वह पहले कलाकार हैं जिसने किरदार के हिसाब से शरीर को ढालने, एक बार में एक ही फिल्म करने और लोकेशन पर ही संवाद रिकॉर्ड करने की शुरुआत की। आमिर अपने सबसे बड़े आलोचक खुद हैं और दूसरों की कही बात का जल्दी बुरा नहीं मानते हैं। 'दंगल' की रिलीज पर पढ़िए आमिर खान के साथ अमर उजाला की विशेष बातचीत...
प्रश्न- जब भी आप कोई किरदार चुनते हैं तो आमतौर पर हिन्दी सिनेमा होता ये है कि कोई इतिहास का किरदार चुनता है या मायथोलॉजी चुनता है लेकिन जो लिविंग कैरेक्टर्स हैं, उन पर फिल्म बनाना बहुत ही चैलेजिंग माना जाता है। ऐसे में कितना चैलेंज रहता है आपको कि वो जो किरदार हम करने जा रहे हैं जो ऑलरेडी लिविंग है हमारे बीच में।
आमिर – चैलेंज तो हर किरदार में रहता है पहले तो मैं ये कह दूं कि चाहे वो फिक्शन हो या नॉन-फिक्शन हो, चैलेंज एक्टर के लिए रहता है। अगर आप नॉन-फिक्शन में कर रहे हैं जो वाकई में एक इंसान है या रहा है तो आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। आप एक इंसान के ऊपर कहानी बना रहे हैं मतलब उस इंसान को आप दोबारा जीवित कर रहे हैं। उसमें एक सच्चाई हो, एक एक्यूरेसी हो, ये जिम्मेदारी हम पर होती है।
प्रश्न- जो भी किरदार आपने महावीर फोगट के पहले भी किए हैं, उतनी ही मेहनत हर किरदार में करते दिखते हैं चाहे गजनी हो, धूम हो, या सरफरोश हो, जो डेडिकेशन है एक्टिंग को लेकर, जो पैशन है इसमें इंपिरेशन कहा से मिलती है आपको?
आमिर– इसका जवाब देना मुश्किल इसलिये है कि मुझे खुद नहीं पता कि कहां से मिलती है। मुझे लगता है कि शायद मेरा नेचर ऐसा है कि मैं जो भी काम करता हूं मैं पूरे ध्यान से करता हूं, पूरे लगाव के साथ करता हूं। चाहे कोई फिल्म हो या कोई खेल हो या दो रोटी खाना खा रहा हूं तो मेरा ध्यान पूरा उस पर ही लगा रहता है। मैं हर चीज़ को इंज्वाय कर के करता हूं। तो वो शायद मेरा नेचर है। और एक बात वो है कि जब आप वो काम करते हैं जिसमें आपको दिलचस्पी हो तो ऑटोमैटिकली उसमें आपका पैशन उसमें निकलता है आपका जोश उसमें आता है। तो मुझे बहुत पसंद है फिल्म मेकिंग, कहानियों की दुनिया। हर वक्त मैं अलग किरदार निभाने की कोशिश करता हूं तो ये जो दुनिया है मुझे बहुत पसंद है क्योंकि मेरा दिल इसमें इतना है कि पैशन आ जाता है।
प्रश्न- थोड़ी देर पहले हम बात कर रहे थे आपके पढ़ाई छोड़ने के फैसले की। जब आपकी अम्मी ने डांटा कि बेटा पढ़ाई छोड़कर क्यों जा रहे हो फिल्मों में, तो आपने कहा कि नहीं पढ़ाई अब शुरू करनी है। तो ये जो आज का यूथ है, जो जेनरेशन हैं उसको आप बताये कि उस वक्त जब आपने फैसला लिया लाइफ का तो वो कितने कमिटमेंट का था और उसको पाने के लिये कितनी मेहनत की आपने फिर।
आमिर – जब मैंने फिल्मों में आना डिसाइड किया तो अम्मी, अब्बाजान खुश नहीं थे मेरे फैसले से हालांकि वह खुद फिल्म प्रोड्यूसर रह चुके हैं। 12वीं मैंने किया था और आगे की पढ़ाई ग्रेजुएशन नहीं करना चाह रहा था मैं, तो वह बड़े अपसेट हुए मुझसे। मैंने उनको समझाने की कोशिश कि कि मैं पढ़ाई छोड़ नहीं रहा हूं मैं पढ़ाई दरअसल शुरू कर रहा हूं। मैं आपको बताऊं कि जब मैं स्कूल में था, कॉलेज में था मेरी पढ़ाई में बिलकुल दिलचस्पी नहीं थी। स्पोर्ट्स में ज्यादा मेरा ध्यान था। फिल्म में फिर मेरा इंटरेस्ट बढ़ा तो स्कूल और कॉलेज के दौरान तो मैंने पढ़ाई मैंने बहुत कम की हालांकि वहां से निकलने के बाद मेरी पढ़ाई शुरू हुई है। केवल सिनेमा के बारे में ही नहीं, आज मैं फिजिक्स की बुक पढ़ता हूं। बायलॉजी की बुक्स पढ़ता हूं। एंथ्रोपोलॉजी की बुक्स पढ़ता हूं और हिस्ट्री की बुक्स पढ़ता हूं। हाल ही में मैं बुक पढ़ रहा हूं जिसका नाम है जीन। जिसमें जीन के बारे में बताया गया है कि कहां से ये इंसानो को समझ में आया कि जीन जैसी कोई चीज होती है। डीएनए, आरएनए क्या होता है?