फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये हैं बॉलीवुड की 5 अजीबोगरीब नाम वाली फिल्में, कोई 'दूसरी दुल्हन' तो कोई 'दिलरूबा तांगेवाली'

Tue, 27 Mar 2018 02:26 PM IST
Presented by: अंशुल
विज्ञापन
1 of 6
किसी भी फिल्म का नाम पूरी तरह कहानी के प्लॉट पर आधारित होता है, जिसके इर्द-गिर्द ही पूरी फिल्म आगे बढ़ती है। सोचिए कि अगर फिल्मों के ऐसे नाम रखे जाने लगे, जिसका उसकी कहानी, थीम से कोई लेना-देना ही नहीं तो क्या होगा? आइए आपको भारतीय फिल्म इतिहास की ऐसी ही कुछ चुनिंदा फिल्मों और उनके नामों से परिचित करवाते हैं, जिन्हें पढ़ते ही आप भी कह उठेंगे, क्या ऐसा भी होता है?
विज्ञापन

2 of 6
अब अगर जान होती तो वो मुर्दा ही क्यों कहलाता? वैसे अगर बात फिल्म की करें तो रोमा मलिक और कुणाल कपूर जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म 'मुर्दे की जान खतरे में' की कहानी बेहद दिलचस्प थी। कहानी में लड़का मर जाता है, जिसे दिखाया जाता है कि वो अभी भी जीवित है। खैर कहानी का नाम से कोई लेना-देना नहीं था।
विज्ञापन

3 of 6
अब फिल्म का नाम है उधार का सिंदूर। इससे आपको क्या पता चलेगा फिल्म के बारे में। 1976 में आई इस फिल्म में जितेंद्र, आशा पारेख और रीना रॉय जैसे सितारे थे। कहानी में लड़का, अमीर लड़की से शादी करना चाहता है, जिसका मकसद सिर्फ पैसा होता है। कहानी में आगे चलकर ट्व‌िस्ट आता है, जिसका भी फिल्म के नाम से कोई लेना-देना नहीं।

4 of 6
फिल्म 'दूसरी दुल्हन' के नाम पर नजर डालते ही आप कुछ और सोचने लगेंगे, मगर फिल्म में वैसा होता कुछ नहीं। हालांकि, यह फिल्म एक कपल पर आधारित है जो सरोगेसी मदर के तौर पर एक वेश्या को चुनते हैं। शबाना आजमी ने उसी किराए की मां की भूमिका निभाई है।
विज्ञापन

5 of 6

फिल्म 'सोने का दिल, लोहे का हाथ' में राजेंद्र कुमार ने अहम भूमिका निभाई है। फिल्म उस शादीशुदा मर्द के इर्द-गिर्द घूमती है जिस पर हत्या का आरोप होता है, जो साबित नहीं होता।

विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
1962 में रिलीज हुई इस हिंदी रोमांटिक फिल्म में भारत भूषण और माला सिन्हा ने अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी रोमांटिक है। फिल्म में सामाजिक मापदंड है, कष्टों से गुजरता शख्स है, झूठा हत्या का मामला है, मगर कहीं 11 हजार लड़कियां नहीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें