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हिंदी के दम पर सफल हुईं ये 5 हास्य फिल्में, आज भी देख लो तो हंस-हंसकर दुख जाएंगे गाल

Fri, 14 Sep 2018 04:42 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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फिल्मी दुनिया में कई फिल्में बनी हैं जो हिंदी की असल पहचान को दर्शकों के पेश करती हैं। हिंदी फिल्मों में ही अगर हिंदी का इस्तेमाल उचित तौर पर ना हो तो यह फिल्म के साथ अन्याय होगा। हिंदी दर्शक होने की वजह से बॉलीवुड में हिंदी बोलने वाले सितारें सफल हो पाते हैं। ऐसा ही फिल्मों के साथ हैं। बात करेंगे उन 5 हास्य फिल्मों की जो हिंदी के दम पर सफल साबित हुईं...
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चलती का नाम गाड़ी (1958)

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इस कड़ी में सबसे पहले बात करेंगे साल 1958 में आई फिल्म चलती का नाम गाड़ी की। फिल्म में गायक किशोर कुमार अपने दोनों भाई अशोक और अनूप कुमार संग नजर आए थे। यह हिंदी सिनेमा की पहली हास्य फिल्म मानी जाती है। 
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पडोसन (1968)

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पडोसन
फिल्म पड़ोसन तो आज भी दर्शकों को बहुत गुदगुदाती है। साल 1968 में सिनेमाघरों में लगी इस फिल्म में अभिनेता सुनील दत्त, किशोर कुमार, हास्य अभिनेता महमूद और अभिनेत्री सायरा बानो भी थीं। फिल्म को लोगों ने खूब सराहा था साथ ही फिल्म बहुत बड़ी सफल साबित हुई थी। फिल्म के गाने भी बहुत उम्दा थे। 

चश्मे बद्दूर (1981)

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हास्य फिल्मों का रूप समय-समय पर बदलता रहा और नई-नई चीजें देखने को मिली। ऐसा ही कुछ 80 के दशक में आई फिल्म चश्मे बद्दूर में देखने को मिला। सई परांजपे निर्देशित यह फिल्म दिल्ली में रह रहे तीन बेरोजगार फारुख शेख, रवि वासवानी और राकेश बेदी की कहानी को पेश करती है। इन तीनों युवाओं को नौकरी के साथ एक प्रेमिका की भी जरूरत होती है। हास्य का ताना-बाना इनकी इसी दूसरी जरूरत के इर्द-गिर्द बुना गया है। 
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अंगूर (1982)

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अगले साल ही साल 1981 में फिल्म अंगूर आई जिसका निर्देशन गीतकार गुलजार ने किया था। यह हास्य फिल्म अंग्रेजी नाटक 'कॉमेडी ऑफ इरर' पर आधारित है। फिल्म में एक जैसे दिखने वाले दो आदमियों की जोड़ी दिखाई गई है। बस यही से फिल्म की कहानी विरोधाभास पैदा कर दर्शकों को हंसाती रहती हैं। फिल्म में संजीव कुमार और देवेन वर्मा की जोड़ी बहुत कमाल की है। 
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अंदाज अपना अपना (1994)

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अंदाज अपना अपना
90 के दशक में हास्य फिल्मों ने फिर अपना स्वरूप बदला। साल 1994 में आज के दो बड़े सफल अभिनेता आमिर और सलमान को फिल्म अंदाज अपना-अपना में देखा गया था। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया था। फिल्म में इतने हास्यता थी कि दर्शकों के हंस-हंस कर गाल दुखने लगे थे।  फिल्म को बड़े ही मजेदार ढंग से पेश किया गया है। बता दें कि ये सभी फिल्में अगर हिंदी का अच्छे से इस्तेमाल ना करती तो शायद आज इन्हें कोई याद ना रखता।
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