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बाहरी लोगों के सवाल पर बोले बॉबी देओल, पापा को जितना प्यार मिला, किसी कलाकार को नहीं मिला होगा

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बॉबी देओल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी सिनेमा के ‘एंग्री यंगबॉय’ रहे बॉबी देओल को हिंदी सिनेमा में 25 साल पूरे हो रहे हैं। बॉबी देओल अब खुद को बदलकर नए जमाने के हिसाब से खुद को नए किरदारों में देखना चाहते हैं। बॉबी देओल से अमर उजाला के लिए ये खास मुलाकात की पंकज शुक्ल ने।
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बॉबी देओल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
करियर के सिल्वर जुबली साल का एहसास कैसा है?

पता ही नहीं चला, ये 25 साल कैसे गुजर गए। ऐसा लगता है जैसे कल ही मैंने 'बरसात' की थी। आजकल का समय भी कुछ वैसा ही है। हम सब घर पर बैठे हैं। पता ही नहीं चलता, आज शनिवार था फिर से शनिवार कैसे हो गया? समय का कभी पता नहीं चलता है। लेकिन, अगर हम समय का सही इस्तेमाल करें तो सब सही रहता है।  मैंने वही कोशिश की है। बीच में थोड़ा समय खराब हो गया था तो उन दिनों मैं काफी परेशान था।
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बॉबी देओल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तो खराब समय से बाहर आने का मंत्र क्या समझा आपने?

मैंने अपने आप को बिना मतलब के और ज्यादा परेशान कर दिया था। लेकिन, जब मैंने महसूस किया कि मैं कर क्या रहा हूं अपने साथ। तो वैसे ही एकदम से घंटी बजी। और, मैंने अपने आपको तैयार करना शुरू कर दिया कि मैं बस कैसे भी करके काम लाऊंगा हाथ में और काम करता जाऊंगा। फिर से मेरी शुरुआत हुई और आज मैं आपके साथ बैठा हूं और बातें कर रहा हूं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहली बार मैं कदम रख रहा हूं।

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क्लास ऑफ 83 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हां, आपकी पहली ओटीटी फिल्म ‘क्लास ऑफ 83’ की वह लाइन मुझे याद रह गई कि कोई क्या करे अगर वह अपने आसपास काम करने वालों से बेहतर हो। और सिस्टम से बेहतर हो? 

जीवन में ऐसे मौके आते रहते हैं जहां आपको लगता है कि मैं इतना कुछ कर सकता हूं लेकिन मैं फिर भी नहीं कर पा रहा हूं। मुझे वह मौका कोई नहीं दे रहा, वह चांस नहीं मिल रहा। और खासतौर से तब जब आप सही हो, सच्चे हो। दिल सच है और सोच सही है। मैं तो यही कहना चाहूंगा कि ऐसा दिलचस्प किरदार मुझे पहले कभी मिला नहीं। पांच नए कलाकारों के साथ मैंने इसमें काम किया है। और, जब मैं उनके साथ काम कर रहा था तो मैं इतना नर्वस था। पहली बार मैंने ऐसा कोई रोल किया है जो मेरे कंफर्ट जोन के बाहर था।

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बॉबी देओल

आज की डिजिटल पीढ़ी देओल परिवार को बहुत पसंद करती है, क्या कहना चाहेंगे?

मैं तो इतना ही कहूंगा कि मेरे पापा को जितना प्यार मिला है पूरी दुनिया से, हमारे देश से। वह किसी भी कलाकार को नहीं मिला होगा। वही प्यार अब हमारी तरफ आ गया। पापा हमेशा सबको ऐसे मिलते थे जैसे उनका भाई, उनका बेटा, उनका दोस्त उनसे मिल रहा है। पापा हैं वैसे। हमें भी वही चीजें सिखाई गई थीं जब हम बड़े हो रहे थे। जब हम भी किसी से मिलते हैं तो किसी गैर को भी अपना बना लेते हैं। शायद वही प्यार लोगों के दिल में है आजतक जो डिजिटल दुनिया में भी हमें पसंद करते हैं, इतना प्यार देते हैं। बस... क्या कहूं अब और। बस, थैंक यू बोलना चाहूंगा सब फैंस को।

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धर्मेंद्र के साथ बॉबी देओल, सनी देओल
एक और बात, धर्मेंद्र ने ये भी दिखाया कि कोई भी बाहर का आदमी आकर इस इंडस्ट्री में सबसे ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है। कितना सहमत हैं इस बात से?

बिल्कुल सही बात। आज तक कितने बाहर से आए हैं और कितना नाम बनाया है अपना। पापा उस वक्त उनमें से थे जब मनोज जी भी आए थे। काफी सारे कलाकार आए होंगे उनके साथ लेकिन सबने उतनी मेहनत भी की होगी। लेकिन किसी के भाग्य का सहारा उतना नहीं होता जितना दूसरों का होता है। लेकिन मेहनत सभी ने की है। आज भी हम बैठकर सोचें तो जो भी कलाकार थे उस वक्त के। सबने कितना अच्छा काम किया। सबने बहुत अच्छी फिल्में की हैं। तो कुछ लोग किस्मतवाले होते हैं।
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बॉबी देओल

आपसे कितनी मेहनत करवाई गई जब यह तय हुआ कि आपको हीरो बनना है?

पापा उस वक्त भी काफी व्यस्त रहते थे शूटिंग में। लेकिन, उन्होंने मेरे साथ डांस क्लासेस, एक्टिंग क्लास, हॉर्स राइडिंग क्लास, एक्शन क्लास, फिर मोटर बाइक पर स्टंट करने की क्लास सब करवाईं। ये सारी क्लास मैंने की थीं। औ, बहुत मजा आता था।

और, पैर कब टूटा था?

मेरी पहली फिल्म के आखिरी दिन की शूटिंग पर टूटा था। मेरा घोड़ा दूसरे घोड़े से टकरा गया था। मैं घोड़ा दौड़ा रहा था। और सामने एक घोड़ा हमेशा खड़ा रखा जाता था ताकि मेरा वाला घोड़ा वहां जाकर रुक जाए। लेकिन, उस दिन वह घोड़ा बीच में आ गया और मेरी रान उससे टकरा गई। मेरी काफी फिल्में हैं जिनकी इस दुर्घटना के बाद मैंने शूटिंग शुरू की थी। ये फिल्में मैंने पहले ही साइन कर ली थीं। उन दिनों मैं ठीक से डांस नहीं कर पा रहा था, सिर्फ हाथ हिलाता था, और वही मेरे स्टेप्स मशहूर हो गए।

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रेस 3

शाहरुख खान एक निर्माता के तौर पर कैसे लगे?

बहुत ही शानदार इंसान हैं वह। दिल के बहुत अच्छे हैं। वैसे तो वह काफी व्यस्त रहते हैं लेकिन शूटिंग के दौरान वह एक दो बार आए थे सेट पर। बहुत अच्छा लगा था कि वह हम सब से मिलने आए। जो नए कलाकार हैं वह तो बहुत खुश हो गए थे। मुझे ये सुनकर अच्छा लगा कि शाहरुख को हमारी ये फिल्म ‘क्लास ऑफ 83’ इतनी पसंद आई है।

तो जैसे सलमान का फोन आया था ‘रेस 3’ के लिए शाहरुख का कभी कॉल नहीं आया है कि मामू, शर्ट उतारेगा क्या?

आता तो करने में मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। सलमान के साथ तो मेरा रिश्ता ही अलग है। बहुत पुराना है। हमारी दोस्ती अलग है। तो हम दोनों एक दूसरे को प्यार से मामू बुलाते हैं। हमारी दोस्ती बरसों पुरानी है। उनकी पहली फिल्म रिलीज हो गई थी। सुपर हिट हो गई थी। फिर भी वह बहुत साधारण तरीके से हमारे पास आते थे। हम मिलते थे और बातें करते थे। उससे दोस्ती बन गई थी उस तरह की, तो फिर मस्ती मजाक चलता रहता है। तभी से हम एक दूसरे का नाम ऐसे ही मामू बुलाने लगते हैं। 

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बॉबी देओल

राहत इंदौरी ने आपकी 'करीब' फिल्म का गाना 'चोरी चोरी जब नजरे मिलीं' लिखा था, उनके बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

बहुत कमाल के लिखने वाले थे। वैसे लिखने वाले अब मिलते नहीं हैं। लेकिन क्या करें? जमाना भी बदल गया है। आजकल के नौजवान, आजकल की न्यू जनरेशन। उन्हें चाहिए जैसा म्यूजिक बज रहा है। कभी-कभी क्या होता है कि पुराने गानों का रीमिक्स बनता है और उनको ज्यादा अच्छा लगता है। और हम बोलते हैं कि उस गाने को क्यों खराब कर दिया? क्योंकि हमने असली गाने सुने हुए होते हैं। लेकिन हर चीज को उस दौर के हिसाब से चलना पड़ता है। तो शायद इसलिए हमें वह बात समझ में नहीं आती जो यह यंगस्टर्स हैं उनके समझ में आती है।


(बॉबी देओल के इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का पूरा वीडियो आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके  देख सकते हैं)

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