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Happy Birthday Jaya Bachchan: बिटिया की बात सुन रो पड़ी थीं जया बच्चन और छोड़ दी एक्टिंग, जानिए 10 अनसुनी कहानियां

Thu, 09 Apr 2020 04:21 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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Jaya Bachchan - फोटो : twitter
कलाकार एक लेकिन नाम अनेक। हर किरदार में अपनी छाप छोड़ देने वाली अभिनेत्री जया भादुड़ी, जो बाद में जया बच्चन बनीं, हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। सत्यजीत रे और ऋषिकेश मुखर्जी जैसे गुणी निर्माता, निर्देशकों ने उनके हुनर को दूर से देखकर ही पहचान लिया था। ये उन गिने-चुने कलाकारों में से रहीं जिन्होंने फिल्मों के साथ राजनीति में भी बराबर नाम कमाया। फिल्मों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने नौ फिल्म फेयर पुरस्कार जीते, जिसमें तीन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और तीन सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार शामिल हैं। आइए आपको बताते हैं इनकी कुछ कम सुनी या अनसुनी कहानियां।
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Jaya Bachchan - फोटो : twitter
जया बच्चन का जन्म 9 अप्रैल 1948 को जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ। इनके पिता तरुण कुमार भादुड़ी एक मशहूर लेखक और कवि थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई लिखाई भोपाल के ही सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल में हुई। पिता एक लेखक थे इसलिए घर में माहौल पढ़ाई लिखाई का ही था और अक्सर बातें भी साहित्य और कला की हुआ करती थीं। इसलिए जया का रुझान शुरुआत से ही कला में रहा।
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jaya bachchan
जया के पिता एक दिन उन्हें एक फिल्म की शूटिंग दिखाने ले गए। वहां जया को अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने देखा। उस वक्त फिल्म निर्माता सत्यजीत रे अपनी फिल्म के लिए एक ऐसी लड़की की तलाश कर रहे थे, जो उनकी फिल्म में एक खास किरदार निभा सके। उनके सामने शर्मिला टैगोर ने जया का नाम लिया। सत्यजीत रे की फिल्म 'महानगर' के किरदार में जया एकदम फिट बैठ गईं, और यहां से शुरू हुआ उनका अभिनय का सिलसिला। 

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jaya bachchan
इस फिल्म को करने के बाद जया के घर में उनके आगे के करियर को लेकर खूब सलाह मशविरा किया गया। अंत में फैसला किया गया कि अब जया को अभिनय की पढ़ाई ही कराई जाए। तब उन्हें एफटीआईआई भेजा गया। इनकी कला को देखकर एफटीआईआई में उन्हें स्वर्ण पदक से नवाजा गया। अभी इनके पढ़ाई पूरी भी नहीं हुई थी, कि उससे पहले महान निर्माता-निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी एफटीआईआई पहुंच गए। और उन्होंने प्रिंसिपल से बात करके जया को अपनी फिल्म में लेने की बात कही। यहीं से जया को फिल्म 'गुड्डी' में काम मिला।
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jaya bachchan
उस वक्त फिल्म इंडस्ट्री के हालात बदल रहे थे। 'गुड्डी' में पहले अमिताभ बच्चन को बतौर मुख्य अभिनेता लिया गया था, लेकिन जब निदेशक ऋषिकेश मुखर्जी को लगा कि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की कला व्यर्थ जाएगी। इसलिए उन्होंने इस फिल्म से अमिताभ को बाहर करना ही मुनासिब समझा। अमिताभ बच्चन को इस फिल्म से निकाल दिया गया। और यहां अमिताभ और जया का मिलन नहीं हो पाया। उस वक्त अमिताभ फिल्म 'आनंद' में काम कर रहे थे।
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Jaya Bachchan - फोटो : file photo
अभिनेता संजीव कुमार के साथ जया बच्चन का बहुत गहरा नाता रहा है। उन्होंने उनके साथ फिल्म 'अनामिका' में काम किया। उसके बाद फिर 'कोशिश' भी की। संजीव कुमार अपने परिचय में हमेशा कहा करते थे कि फिल्म 'अनामिका' में जया मेरी हीरोइन बनीं, 'कोशिश' में मेरी पत्नी, 'शोले' में मेरी बहू और 'परिचय' में मेरी बेटी बनीं। बस एक ही ख्वाहिश बाकी है कि किसी फिल्म में मैं जया के बेटे का किरदार निभाऊं।
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amitabh bachchan, jaya bachchan - फोटो : social media
जया बच्चन और अमिताभ बच्चन के मिलन का एक किस्सा बहुत मशहूर रहा है। जब जया एफटीआईआई में पढ़ती थीं, उस समय ऋषिकेश मुखर्जी के साथ अमिताभ बच्चन भी एफटीआईआई गए थे। वहां जया ने पहली बार अमिताभ बच्चन को देखा था। उस वक्त जया ने अपनी सहेलियों से कहा था, कि इस लड़के में कुछ तो अलग बात है, क्योंकि इसकी आंखों में बहुत गहराई है। कुछ लोग तो यहां तक मानते हैं कि जया और अमिताभ का वही पहली नजर का प्यार था।

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jaya bachchan
वर्ष 1973 में नए अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ कोई भी हीरोइन काम करने के लिए तैयार नहीं थी। कहा जाता था कि यह तो पहले से ही फ्लॉप हो चुका है। बाद में जया ने अपने कदम बढ़ाए और उन्होंने उनके साथ फिल्म 'जंजीर' में काम करने की ठानी। इस फिल्म को करते हुए दोनों ने फैसला किया था, कि अगर यह फिल्म हिट होगी तो वे छुट्टी मनाने विदेश जाएंगे। फिल्म तो सुपरहिट हुई, लेकिन इन दोनों को छुट्टी मनाने की इजाजत नहीं मिली। इनके घर वालों ने कहा था कि अगर तुम्हें छुट्टी मनानी हैं, तो पहले शादी करो और फिर विदेश जाओ।

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jaya bachchan
फिल्म 'शोले' के दौरान जया गर्भवती थीं। पेट में इनकी पहली संतान श्वेता बच्चन थी। इसके बाद उन्होंने अभिषेक बच्चन को जन्म दिया। उस समय जया फिल्म सिलसिला में काम कर रही थीं, तब इनकी छोटी सी बेटी श्वेता ने कहा कि आप हमारे साथ घर पर क्यों नहीं रहती? काम सिर्फ पापा को करने दीजिए। इस बात ने जया को हिला कर रख दिया। तभी उन्होंने फैसला किया कि अब वे फिल्मों में काम नहीं करेंगी। और उसके बाद जया ने फिल्मों से किनारा कर लिया।

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जया बच्चन - फोटो : ANI
फिल्मों से लंबा ब्रेक लेने के बाद जया 1998 में फिल्म 'हजार चौरासी की मां' में नजर आईं। इसके बाद उन्होंने फिल्म 'फिजा', 'कभी खुशी कभी गम', 'लागा चुनरी में दाग' में भी काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने राजनीति की तरफ अपना रुख किया, और समाजवादी पार्टी की सदस्य बनीं। वे राजनीति में भी खूब सक्रिय रहती हैं। दादी और नानी का फर्ज निभाने के साथ ही वे समाज सेविका का पूरा फर्ज अदा करती हैं।
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jaya bachchan
वर्ष 2008 में फिल्म 'द्रोणा' के म्यूजिक लांच पर इन्हें एक भाषण देना था। फिल्म के निर्देशक ने इनका भाषण अंग्रेजी में तैयार किया था, लेकिन उन्होंने कहा, 'हम यूपी के लोग हैं, इसलिए हिंदी में बात करेंगे। महाराष्ट्र के लोग माफ कीजिए।' उनके इस वक्तव्य से बहुत विवाद खड़ा हुआ था। एमएनएस के मुखिया राज ठाकरे ने इन्हें माफी मांगने पर मजबूर भी किया। अंत में जया के बदले उनके पति अमिताभ बच्चन ने माफी मांगी।

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