हिंदी सिनेमा के नए शो मैन संजय लीला भंसाली जब भी किसी अभिनेत्री के साथ काम करना शुरू करते हैं तो उन्हें एक ही अदाकारा की फिल्में देखने को कहते हैं, और वह अभिनेत्री हैं नूतन। चर्चित अभिनेत्री शोभना समर्थ की बेटी, तनूजा की बहन और हाल ही में फिल्म नोटबुक से सिनेमा में कदम रखने वाली अभिनेत्री प्रनूतन बहल की दादी। नूतन के छह फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने के रिकॉर्ड की बराबरी उनकी भतीजी काजोल ने 2011 में अपना छठा फिल्मफेयर पुरस्कार जीतकर की। नूतन के जन्मदिन (4 जून) पर आइए बताते हैं आपको उन 10 कालजयी किरदारों के बारे में, जो अब भी हिंदी सिनेमा की अभिनेत्रियों के लिए मील के पत्थर माने जाते हैं। देखिए आगे की स्लाइड्स
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फिल्म सीमा का पोस्टर
- फोटो : मुंबई टीम
किरदार - गौरी
फिल्म- सीमा (1955)
अमेय चक्रवर्ती के निर्देशन में बनी फिल्म सीमा में नूतन ने एक अनाथ लड़की गौरी के किरदार में बेहतरीन अदाकारी की। उनके हाव भाव, उनके अभिनय और उनकी चितवन ने हिंदी सिनेमा के दर्शकों का मन मोह लिया। इसी फिल्म के लिए नूतन को फिल्मफेयर का पहला बेस्ट एक्टर फीमेल खिताब मिला।
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फिल्म पेइिंग गेस्ट का पोस्टर
- फोटो : मुंबई टीम
किरदार - शांति
फिल्म - पेइंग गेस्ट (1957)
सुबोध मुखर्जी के निर्देशन में बनी कॉमेडी ड्रामा फिल्म पेइंग गेस्ट में नूतन, देव आनंद और शुभा खोटे मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म में नूतन ने एक जमीदार की बेटी शान्ति का किरदार निभाया और विचारों व परंपराओं के द्वंद्व में फंसी एक लड़की का अभिनय कर अपने लिए ही अभिनय की एक बड़ी लकीर खींच दी जिसे आगे चलकर वह बार बार और लंबी करती रहीं। एस डी बर्मन के संगीत से सजी इस फिल्म में नूतन का अभिनय शानदार रहा और इसे फिल्म समीक्षकों की खूब सराहना मिली।
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फिल्म सुजाता का पोस्टर
- फोटो : मुंबई टीम
किरदार - सुजाता
फिल्म - सुजाता (1959)
बंगाली लघुकथा सुजाता पर आधारित इस फिल्म ने नूतन को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। 1960 के कान फिल्म फेस्टिवल में ये फिल्म प्रदर्शित हुई तो पूरा विदेशी मीडिया इस नई अभिनेत्री को जानने के लिए बेताब हो उठा। इस फिल्म में नूतन ने मुख्य पात्र सुजाता का किरदार निभाया। प्रसिद्ध निर्देशक बिमल रॉय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नूतन के अलावा सुनील दत्त, ललित पवार और शशिकला मुख्य भूमिका में थे। एक ब्राह्मण पुरुष और एक दलित महिला के प्रेम संबंधों पर आधारित इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में पहली बार जाति विभेद पर गहरी चोट की। बेहतरीन अदाकारी के लिए नूतन को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर फीमेल का पुरस्कार दिया गया। फिल्म ने एक राष्ट्रीय और चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते।
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छलिया का पोस्टर
- फोटो : मुंबई टीम
किरदार - शान्ति
फिल्म - छलिया (1960)
मशहूर अभिनेता राज कपूर की वैसे तो नरगिस के साथ बनी फिल्मों को ही लोग खूब चाव से अब भी देखते हैं लेकिन उनकी जिस फिल्म को नूतन के अभिनय की वजह से देखा जाता है, वह है छलिया। फ्योडोर दोस्तोयेव्स्की की किताब व्हाइट नाइट्स पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन मनमोहन देसाईं ने किया। शादीशुदा महिला शांति के किरदार को नूतन ने बखूबी निभाया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और नूतन को फिल्मफेयर बेस्ट ऐक्टर फीमेल के लिए नामित किया गया।
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बंदिनी का पोस्टर
- फोटो : मुंबई टीम
किरदार - कल्याणी
फिल्म- बंदिनी (1963)
अभिनय की चाह रखने वाली हर युवती को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। एक खून के सिलसिले में आजीवन कारावास की सजा झेल रही कल्याणी के किरदार से नूतन में सबका दिल जीत लिया। इस फिल्म के लिए नूतन को तीसरा फिल्मफेयर बेस्ट ऐक्टर फीमेल का पुरस्कार मिला। 1963 में बनी फिल्म बंदिनी में नूतन ने एक बार फिर बिमल रॉय के साथ काम किया और इस बार भी नतीजा सुपरहिट फिल्म के रूप में निकला। इस फिल्म को एक राष्ट्रीय और बेस्ट फिल्म सहित 6 फिल्मफेयर पुरस्कार मिले।
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फिल्म मिलन का पोस्टर
- फोटो : मुंबई टीम
किरदार – राधा
फिल्म - मिलन (1967)
1963 की तेलुगू सुपरहिट फिल्म मूगा मनसूलु की रीमेक फिल्म मिलन में नूतन ने राधा का किरदार निभाया। अदुरथी सुब्बा राव के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नूतन, सुनील दत्त, प्राण और जमुना जैसे सितारे मुख्य भूमिका में थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में भी नूतन की अदाकारी बेहतरीन रही और इस फिल्म के लिए नूतन को चौथी बार फिल्मफेयर बेस्ट ऐक्टर फीमेल का पुरस्कार दिया गया इसके अलावा नूतन को बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन का सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार भी मिला।
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सौदागर का पोस्टर
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किरदार- माजूबी
फिल्म – सौदागर (1973)
अमिताभ बच्चन तब सुपरस्टार नहीं बने थे। अमिताभ की जंजीर के पहले की जिन फिल्मों को उनके प्रशंसक आज भी देखना पसंद करते हैं, उनमें से एक फिल्म सौदागर भी है। लेकिन, इसकी बड़ी वजह है फिल्म में नूतन का एक विधवा का किरदार। नरेन्द्रनाथ मित्रा की कहानी रस पर आधारित फिल्म सौदागर को सुधेन्दु रॉय ने निर्देशित किया सौदागर को ऑस्कर में भारत की तरफ से बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म की कैटेगरी में भी भेजा गया।
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फिल्म अनुराग का पोस्टर
- फोटो : मुंबई टीम
किरदार - अनु राय
फिल्म - अनुराग (1972)
सत्तर का दशक शुरू होते होते नूतन के बाद की अभिनेत्रियों ने बॉक्स ऑफिस पर रंग जमाना शुरू कर दिया तो नूतन धीरे धीरे हाशिये पर जाने लगीं। लेकिन हिंदी सिनेमा के तमाम निर्देशक नूतन की दमदार अदाकारी को भूले नहीं। 1972 में शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी फिल्म अनुराग में नूतन ने सहायक अभिनेत्री की भूमिका निभाई और एक और फिल्मफेयर पुरस्कार जीत लिया। फिल्म में विनोद मेहरा और मौसमी चटर्जी लीड रोल में थे, लेकिन तालियां सबसे ज्यादा नूतन के हिस्से में आईं।
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फिल्म मैं तुलसी तेरे आंगन की का पोस्टर
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किरदार - संयुक्ता चौहान
फिल्म - मैं तुलसी तेरे आंगन की (1978)
नूतन के करियर की सबसे बड़ी बात यही रही कि जब जब उन्हें अच्छी कहानियों के दमदार किरदार मिले, उन्होंने परदे पर कमाल कर दिखाया। चंद्रकांत काकोदकर के मराठी उपन्यास 'अशी तुझी प्रीत' पर आधारित फिल्म मैं तुलसी तेरे आंगन की में भी नूतन ने ये साबित किया। जीनत अमान, परवीन बॉबी और हेमा मालिनी के दौर में नूतन ने इस फिल्म में अपने अभिनय के चलते पांचवा फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। राज खोसला निर्देशित इस फिल्म में नूतन ने एक कुलीन महिला संयुक्ता चौहान का किरदार निभाया।
किरदार- आरती
फिल्म - मेरी जंग (1985)
हिंदी सिनेमा के 80 के दशक के शोमैन सुभाष घई भी नूतन की अदाकारी से प्रभावित रहे। उनकी फिल्म मेरी जंग अपने समय की ट्रेंड सेटर फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म में वह अनिल कपूर की मां के किरदार में नजर आईं। फिल्म ने नूतन को उनके करियर का छठा फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया। सुभाष घई की एक और फिल्म कर्मा में भी नूतन ने शानदार अभिनय किया।