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इस डायरेक्टर ने बनाया राजेश खन्ना को पहला सुपरस्टार और शम्मी कपूर को दिलाया पोस्टर ब्वॉय का तमगा

Thu, 09 Apr 2020 05:56 PM IST
Avinash Pal अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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shakti samanta - फोटो : file photo
हिंदी सिनेमा के शौकीनों ने जिस पहले सितारे के पोस्टर अपने घरों में लगाने शुरू किए, उसका नाम है शम्मी कपूर। और, देश के इस पहले पोस्टर ब्वॉय को सुपरस्टार बनाने वाले फिल्ममेकर का नाम है, शक्ति सामंत। देहरादून में पढ़े और कलकत्ता में कढ़े शक्ति हीरो बनने के चक्कर में कई नामी निर्देशकों के असिस्टेंट डायेरक्टर भी बने, लेकिन किसे पता था कि जो खुद हीरो नहीं बन पाया, वो आगे चलकर खुद सिनेमा को इतने सुपरस्टार देगा। उनकी फिल्म आराधना में एक कमाल के डायरेक्टर ने एक्टिंग की और कमाल ये भी कि ये डायरेक्टर भी मुंबई हीरो बनने ही पहुंचा। चलिए आज आपको बताते शक्ति सामंत की 10 ऐसी फिल्में जिनमें से तमाम आपने भी देखी होंगी लेकिन शायद इसके डायरेक्टर के नाम पर इतना गौर नहीं किया होगा।
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इंस्पेक्टर (1956) - फोटो : सोशल मीडिया
इंस्पेक्टर (1956)
साल 1955 में बहू के बाद शक्ति सामंत की इंस्पेक्टर दूसरी फिल्म थी। यह थ्रिलर जॉनर की फिल्म थी। फिल्म में अशोक कुमार, गीता बाली और प्राण मुख्य किरदारों में दिखे। पूरी फिल्म की कहानी एक कत्ल के इर्द गिर्द घूमती है जिसे सुलझाने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर श्याम (अशोक कुमार) को मिलती है। यह शक्ति सामंत के शुरुआती दिनों की फिल्म थी जिसके बाद वह इंडस्ट्री में एक काबिल निर्देशक के रूप में पहचाने जाने लगे।  
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हावड़ा ब्रिज - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
हावड़ा ब्रिज (1958)
इस फिल्म में अशोक कुमार और मधुबाला ने साथ काम किया और इसी फिल्म से शक्ति सामंत ने बॉक्स ऑफिस पर सिक्का जमा दिया। फिल्म में ओपी नय्यर ने आशा भोसले से कमाल के गाने गवाए जो लोगों के दिलों पर छा गए। फिल्म का गाना मेरा नाम चिन चिन चू काफी पसंद किया गया जिसे सलाम बॉम्बे फिल्म में फिर से इस्तेमाल किया गया। फिल्म में अशोक कुमार और चमन पुरी भाइयों के किरदार में हैं। उनके पिता का रंगून में सफल व्यापार है। लेकिन तभी एक भाई (चमन) अचानक से गायब हो जाता है और फिल्म की कहानी रंगून से कलकत्ता पहुंच जाती है।

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चाइना टाउन (1962) - फोटो : सोशल मीडिया
चाइना टाउन (1962)
अशोक कुमार जैसे सुपरस्टार के साथ काम करने के बाद शक्ति सामंत ने इस फिल्म में शम्मी कपूर को साथ लिया। फिल्म में उन्होंने डबल रोल निभाया। शकीला के साथ हेलन भी नजर आईं। शम्मी कपूर, शेखर नामक एक गायक के रोल में हैं जो अपनी विधवा मां के साथ दार्जिलिंग में रहता है। वह रीता (शकीला) से प्यार करने लगता है जो अमीर परिवार से ताल्लुक रखती है। रीता के पिता दोनों के रिश्ते से खुश नहीं होते हैं जिसके बाद दोनों की जिंदगी में कई अनूठे मोड़ आते हैं। फिल्म में मोहम्मद रफी द्वारा गाया गाना बार बार देखो काफी पसंद किया गया।  
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कश्मीर की कली (1964) - फोटो : Twitter
कश्मीर की कली (1964)
इस फिल्म के साथ ही शम्मी कपूर और शक्ति सामंत का कॉम्बिनेशन हिट साबित हो गया था। यह शर्मिला टैगोर की डेब्यू हिंदी फिल्म थी।  फिल्म में शम्मी कपूर एक अमीर परिवार के बेटे होते हैं जो मां के द्वारा शादी का दबाव बनाने के कारण कुछ दिनों के लिए घर से दूर चले जाते हैं। वह कश्मीर पहुंच जाते हैं जहां उनकी मुलाकात शर्मिला टैगोर से होती है जिसके बाद दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं और शादी करने का निश्चय भी कर लेते हैं लेकिन दोनों की जिंदगी में एक एक करके कुछ मुश्किलें भी आती हैं जिससे कहानी में नया मोड़ आ जाता है। फिल्म का गाना ये चांद सा रोशन चेहरा काफी पंसद किया गया था।
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एन इवनिंग इन पेरिस (1967) - फोटो : सोशल मीडिया
एन इवनिंग इन पेरिस (1967)
यह एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म है। फिल्म में शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर डबल रोल में नजर आए हैं। वहीं प्राण ने विलेन का किरदार निभाया है। इस फिल्म का एक किस्सा बहुत मशहूर है कि फिल्म के अभिनेता शम्मी कपूर ने मजाक-मजाक में शक्ति सामंत से कह दिया था कि शक्ति दा अगर आप एक हेलीकॉप्टर ला दें तो गाना शूट करने में मजा आएगा। अगले ही दिन शक्ति दा ने एक हैलीकॉप्टर का इंतजाम कर दिया। जिस पर चढ़कर शम्मी कपूर ने आसमान से आया फरिश्ता प्यार का सबक सिखलाने गाना शूट किया।
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फिल्म आराधना का सीन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
आराधना (1969)
कहा जाता है कि शम्मी कपूर के साथ एक के बाद एक फिल्म में काम करने के बाद शक्ति सामंत ने राजेश खन्ना को फिल्म अराधना के अंदर एक बड़ा मौका दिया। इस फिल्म के बाद राजेश खन्ना ने कभी पलट कर नहीं देखा और उन्हें इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार का तमगा भी हासिल हुआ। इसी सफलता के साथ ही किशोर कुमार भी राजेश कुमार की प्लेबैक वॉयस बन गए। वहीं इस फिल्म के लिए शक्ति सामंत शर्मीला टैगोर की जगह हेमा मालिनी को लेना चाहते थे उनके अनुसार फिल्म की स्क्रिप्ट की तुलना में शर्मिला टैगोर की इमेज काफी ग्लैमरस थी लेकिन शर्मीला टैगोर की जिद के बाद उन्हें यह फिल्म मिल गई। फिल्म में उनकी अदाकारी की काफी तारीफ की गई। इस फिल्म ने फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवॉर्ड भी अपने नाम किया।

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फिल्म कटी पतंग का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
कटी पतंग (1970)
यह फिल्म आशा पारेख के कमाल के अभिनय के लिए याद की जाती है। इस फिल्म में उन्होंने एक विधवा का किरदार निभाया है। वहीं राजेश खन्ना उनके पड़ोसी बने हुए हैं। कटी पतंग राजेश खन्ना की लगातार 17 हिट फिल्मों में से एक है। फिल्म का संगीत आर. डी बर्मन ने दिया है जो लोगों के दिलों में छा गया। इस फिल्म का ये शाम मस्तानी और प्यार दीवाना होता है जैसे गाने आज भी याद किए जाते हैं।  

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अमर प्रेम का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
अमर प्रेम (1971)
राजेश खन्ना के साथ शक्ति सामंत ने 1972 में रोमांटिक फिल्म अमर प्रेम बनाई। इस फिल्म के गाने और डायलॉग्स लोगों की जुबान पर आज भी हैं। यह फिल्म बंगाली फिल्म निशि पद्मा की हिंदी रीमेक है। फिल्म में एक स्कूल बॉय की कहानी दिखाई गई है जिससे उसकी सौतेली माता अच्छा व्यवहार नहीं करती है और उसकी दोस्ती पड़ोस में रहने वाली एक वेश्या से हो जाती है। फिल्म में शर्मिला टैगोर ने वेश्या का किरदार निभाया है। वहीं राजेश खन्ना  तन्हाई में जीवन जी रहे व्यापारी के रोल में हैं।

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अमानुष
अमानुष (1975)
यह एक एक्शन ड्रामा फिल्म है जिसमें शर्मिला टैगोर, उत्तम कुमार और उत्पल दत्त नजर आए थे। इस फिल्म ने बंगाली फिल्म स्टार उत्तम कुमार को शोहरत की शीर्ष पर पहुंचा दिया था वहीं उत्पल दत्त की छवि एक विलेन के तौर पर भी स्थापित हुई। हिंदी और बंगाली के बाद यह फिल्म तेलुगू, मलयालम और तमिल भाषा में बनी। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर तो कुछ खास सफलता हासिल नहीं हुई लेकिन इस फिल्म को दो अवॉर्ड और नौ नॉमिनेशन प्राप्त हुए।
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बरसात की एक रात - फोटो : सोशल मीडिया
बरसात की एक रात (1981)
शक्ति सामंत ने एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म बरसात की एक रात बनाई। फिल्म में अमिताभ बच्चन के अलावा राखी, अमजद खान और उतपल दत्त भी थें। इस फिल्म को हिंदी और बंगाली भाषा में शूट किया गया था। बंगाली सिनेमा में यह फिल्म उस साल की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई थी। यह फिल्म अपने गानों जैसे अपने प्यार के सपने सच हुए और कालीराम का खुल गया पोल के लिए भी याद रखी जाती है।
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