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Manu Krishna: अयोध्या से आए मनु कृष्णा के लिए ड्रेस दादा बने फरिश्ता, दिल्ली से निकाल प्रकाश झा लाए मुंबई

Fri, 03 May 2024 04:44 PM IST
रुपाली रामा जायसवाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर मुंबई मायानगरी में अपना नाम बनाने में जुटे कलाकारों की सफलता उनके गांव, घर और गलियों तक पहुंचाने की श्रृंखला ‘अपना अड्डा’ में इस बार बारी है अयोध्या जिले में सोहावल कस्बे के मनु कृष्णा की। मनु को रंगमंच पर देखकर कैमरे के सामने अदाकारी का पहला मौका दिया दिग्गज निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा ने। मुंबई में उनका अब तक का अभिनय सफर शानदार रहा है। छोटे परदे से लेकर बड़े परदे तक उनकी एक पहचान बन रही है। उनकी दो भोजपुरी फिल्में ‘जया’ और ‘रामधारी’ जल्द ही रिलीज होने वाली हैं। ‘अपना अड्डा’ सीरीज की 11वीं कड़ी में अभिनेता मनु कृष्णा से खास बातचीत..
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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपका स्क्रीन नेम ही आपका असली नाम है, या घर वालों ने कुछ और नाम भी रखा?

मेरा पूरा नाम कृष्णा मोहन त्रिपाठी है। फिल्मी दुनिया में मुझे लोग मनु कृष्णा के नाम से जानते हैँ। यही मेरा स्क्रीन नेम भी है। मेरा जन्म अयोध्या जिले में सोहावल नामक कस्बे में हुआ। पिता महेंद्र मोहन त्रिपाठी रूरल इंजीनियरिंग सर्विसस में ए क्लास के अफसर थे जो कि अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मां उषा त्रिपाठी गृहणी हैं।
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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

तो फिल्म जगत की तरफ कैसे आना हुआ?

मुंबई आने से पहले मैं लखनऊ में रहकर प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) की तैयारी कर रहा था। दो वर्षो की मेहनत के बाद भी मनचाहा रैंक न आने के बाद मैंने उसे तिलांजलि दे दी और निकल पड़ा अपने बचपन के सपने को सच करने राजधानी दिल्ली की ओर। दिल्ली में मैंने सिविल थियेटर ऑफ दिल्ली से थिएटर और एक निजी स्कूल से अभिनय का डिप्लोमा किया। लोगों ने मेरी आवाज की खूब तारीफ की तो रेडियो जॉकी का भी कोर्स मैंने इसी दौरान कर डाला।

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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

दिल्ली में तो आपके नाटकों की खूब चर्चा रही है, कैमरे के सामने पहला मौका कब और कैसे मिला?

2008 में जब मेरे एक नाटक का मंचन हो रहा था तो निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा वह नाटक देखने आए थे। नाटक के बाद वह ग्रीन रूम आए और मेरे किरदार का नाम लेकर मुझे तलाश करने लगे। वहीं उसी वक्त उन्होंने मुझे मेरे करियर का पहला धारावाहिक ‘सुनैना’ ऑफर कर दिया और इसी धारावाहिक के लिए मैं मुंबई आया। गरीब रथ ट्रेन से जब मैं बोरीबली स्टेशन पर उतरा तो डर तो था कि कहीं इस भीड़ में खो न जाऊं। लेकिन एक हौसला भी था कि नाम तो इस शहर में जरूर कमाऊंगा।

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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, फिर गाड़ी रफ्ता रफ्ता चल निकली...

इस शहर की पहली रात मैं कभी नहीं भूल सकता। वो रात मैंने प्रकाश झा के बंगले में ही बिताई थी और फिर छह महीने तक मैं वहीं टिका रहा। हालांकि, जिस दिन से मैं मुंबई आया उसी दिन से मैं जीतोड़ मेहनत करता रहा। उसी दौरान मैं दिल्ली से ही अपने परिचित एक निर्माता अंजू राजीव के ऑफिस गया, जहां मुझे आजम दादा नाम के एक ड्रेस मैन मिले। वह अश्वनी धीर के प्रोडक्शन हाउस गरिमा प्रोडक्शंस में काम करते थे। उन्होंने मुझे अश्वनी धीर से मिलवाया और गरिमा प्रोडक्शंस का पहला शो ‘जुगाडू लाल’ दिलाने वाले वही दादा थे।

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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस दौरान कोई ऐसा भी मिला जिसने आपको रंगमंच और कैमरे के सामने के अभिनय का फर्क समझाया हो और आपके हुनर को निखारा हो?

‘सुनैना’ जैसे धारावाहिक से अभिनय शुरू करना एक सपना पूरा होने जैसा था। इस धारावाहिक के सेट पर ही मेरी मुलाकात हुई ड्रामा किंग चंदर बहल सर से। थियेटर में काम करते करते बॉडी लैंग्वेज इतनी खुल जाती है कि कभी कभी एक्टर टेलीविजन के नपे तुले फ्रेम से बाहर निकल जाता है। इस पर खूब गालियं भी मिलतीं। लेकिन, मैं धीरे धीरे उनका लाडला बन गया। उन्होंने जो सिखाया, वह मैं कभी नहीं भूला। मुझे जीरो से हीरो बनाने वाले वही हैं दिवंगत चंदर बहल साब!

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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

 इसके बाद और किन किन धारावाहिकों में काम किया?

‘सुनैना’ और ‘जुगाडू लाल’ के बाद तो यूं मानिए कि मेरे पास काम की बाढ़ सी आ गई थी। उसके बाद मुझे मोती सागर का धारावाहिक ‘श्री प्राणनाथ जी’ मिला जो इमेजिन टीवी पर प्रसारित होता था। उसके बाद ‘चिड़िया घर’ (सब टीवी), ‘लापतागंज’ (सब टीवी), ‘ऐसा प्रेम कहां’ (डीडी नेशनल), ‘हम आप के हैँ इन लॉज’ (सब टीवी), ‘तेरा बाप मेरा बाप’ (बिग मैजिक), ‘फिर सुबह होगी’ (डीडी नेशनल) और ‘श्याम तुलसी’ (जी टीवी) तक ये सिलसिला बदस्तूर चला आ रहा है।

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मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, इस बीच आप बड़े परदे पर भी आ गए...

जी हां, माता-पिता का आशीर्वाद मेरे साथ शुरू से रहा। बड़े परदे पर मेरी शुरुआत साल 2016 में बतौर हीरो फिल्म ‘बबुआ’ से हुई। साल 2019 में फिल्म ‘ब्लैक बोर्ड वर्सेज वाइट बोर्ड’ रिलीज हुई। निर्देशक तरुण बिष्ट के साथ इस फिल्म में मुझे अभिनेता रघुवीर यादव से बहुत कुछ सीखने को मिला। और, बीते दो साल से तो मैं लगातार फिल्में ही कर रहा हूं। फिल्म ‘सैय्यन’ के बाद मैंने राजपाल यादव के साथ फिल्म ‘दूरबीन’ की। अवधेश मिश्रा के साथ फिल्म ‘बरात’ की खूब चर्ता हुई। ‘राज कल्याणी’ के बारे में तो अब सब जानते ही हैं। अभी हाल ही में फिल्म ‘जया’ का ट्रेलर लॉन्च हुआ है, जिसने सिर्फ दो दिन में तीन मिलियन व्यूज पाकर भोजपुरी का नया रिकॉर्ड बनाया है। इस फिल्म में मुझे रत्नाकर प्रसाद जैसे निर्माता और धीरू यादव जैसे नई सोच के निर्देशक का सहयोग मिला है। इन दिनों मैं एक वेब सीरीज की शूटिंग में व्यस्त हूं और जल्द ही मेरी एक फिल्म ‘रामधारी’ भी रिलीज होने वाली है। 
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