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Best Actress Amrapali Dubey: मेरी दादी कहतीं, “इतना काम करेलू जिला जवार में केहू नाही जानी त कवन फायदा बा…”

Sat, 04 Mar 2023 11:16 AM IST
पलक शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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आम्रपाली दुबे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
भोजपुरी सिनेमा स्क्रीन एंड स्टेज अवार्ड्स 2023 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाली आम्रपाली दुबे गोरखपुर में भैंसाबाजार के पास बसे गांव चनहर से ताल्लुक रखती हैं। मनोरंजन जगत में उनकी सफलता की कहानी तमाम उन बेटियों को प्रेरित करने वाली है जिनके सपने यही रहते हैं कि ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’। तमाम फिल्मों के दृश्यों में गुमनाम चेहरा लिए भीड़ का हिस्सा बनती रहीं आम्रपाली ने संयम, संघर्ष और सतत मेहनत से भोजपुरी सिनेमा में अपना एक अलग मुकाम बनाया है ‘अमर उजाला’ ने उनसे की ये खास मुलाकात।
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आम्रपाली दुबे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आम्रपाली, हिंदी धारावाहिकों में इतना नाम कमाने के बाद आपका भोजपुरी सिनेमा में आने का संयोग कैसे बना?
सिनेमा से पहले तो धारावाहिक की हीरोइन बनने का संयोग ही बड़ा दिलचस्प है। आपको जानकर यकीन नहीं होगा कि जिस धारावाहिक में मुझे एक्स्ट्रा का काम मिला, उसी धारावाहिक की मैं बाद में हीरोइन बनी। यह धारावाहिक था, 'सात फेरे'। लीड किरदार मिलने के बाद मैंने अपना पहला दृश्य दिग्गज अभिनेत्री सुरेखा सीकरी के साथ किया। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला। मुझे याद है मेरा पहला सीन सीढ़ियों से उतरने का था। सीढ़ियों से उतरकर मैं केक काटती हूं और सुरेखाजी को खिलाती हूं। वह इस धारावाहिक में मेरी दादी बनी थीं। सीढ़ियों से जब मैं उतर रही थी तो मेरे पैर कांप रहे थे।
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आम्रपाली दुबे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इसके पहले भी आपने एक्स्ट्रा के तौर पर भीड़ में खड़े होने के काम किए?
बहुत सारी फिल्मों में मैं भीड़ का हिस्सा बनी हूं। मेरी शुरुआत ही मनोरंजन जगत में जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर हुई। बहुत सारी हिंदी फिल्में हैं जहां मैं किसी पार्टी सीन में हाथ में ग्लास पकड़े खड़ी दिख जाती हूं। लोग ये फिल्में देखते हैं तो उसका स्क्रीनशॉट लेकर मुझे भेजते रहते हैं। हीरोइन बनना शायद मेरे लिए कुदरती संयोग है। बचपन में मैं बहुत ही नौटंकीबाज और नखरेवाली थी। लोग मुझे ताना मारते हुए बुलाते थे, ए हीरोइन इधर आ। और, ये लोगों ने इतनी बार कहा कि कायनात ने मुझे हीरोइन बना ही दिया।

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आम्रपाली दुबे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, अब तो आप भोजपुरी सिनेमा की भी अव्वल नंबर हीरोइन हैं?
भोजपुरी फिल्मों में मैं अपने दादी की ही वजह से मैं आई। मैं धारावाहिकों की शूटिंग करके घर आती थी तो मेरी दादी हमेशा कहतीं, “अरे इतना काम करेलू जिला जवार में केहू नाही जानी त कवन फायदा बा अइसन काम कइले से।” उनको लगता था कि भोजपुरी फिल्में करूंगी तो गांव के लोग भी मुझे पहचानेंगे। वह मुझे अपने पास बिठाकर भोजपुरी चैनलों पर आने वाली फिल्में दिखाती रहती थीं। भोजपुरी फिल्म 'परिवार' तो दादी ने मुझे कम से कम 50 बार दिखाई होगी।
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आम्रपाली दुबे, निरहुआ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिर कैसे मिला भोजपुरी सिनेमा में पहला ब्रेक?
धारावाहिक 'सात फेरे' के बाद मैंने 'रहना है तेरी पलकों की छाव में', 'मायका', 'मेरा नाम करेगी रोशन' जैसे कई धारावाहिकों में काम किया। इसी दौरान मैंने दूरदर्शन के लिए प्रस्तावित एक धारावाहिक का पायलट एपिसोड शूट किया। वहां मेरी मुलाकात संतोष शुक्ला से हुई। वह जब बिग बॉस सीजन 6 में गए तो वहां उनकी मुलाकात दिनेश लाल यादव निरहुआ से हुई। फिल्म ‘निरहुआ हिंदुस्तानी’ के लिए जब हीरोइन की तलाश हो रही थी तो संतोष शुक्ला ने मेरा नाम निरहुआ को सुझाया। मैंने फिल्म की कहानी सुनी और बिना झिझक के तुरंत ये फिल्म साइन कर ली।
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आम्रपाली दुबे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, फिर आपको भोजपुरी सिनेमा भा गया?
फिल्म ‘निरहुआ हिंदुस्तानी’ को लोगों ने खूब पसंद किया। मैं अपने को भाग्य़शाली मानती हूं कि ये फिल्म मुझे मिली। मुझसे भी बेहतर दिखने वाले और अभिनय करने वाले लोग इंडस्ट्री में हैं लेकिन ये रोल मुझे मिला तो सौभाग्य से ही। मुझे एक भोजपुरी फिल्म सिर्फ दादी का मन रखने के लिए करनी थी लेकिन इसके बाद सिनेमा का जादू मुझ पर ऐसा चला कि अब तक उतरा नहीं है। दिनेश लाल यादव निरहुआ के साथ अब तक 40-45 फिल्मों में काम कर चुकी हूं। बाकी भोजपुरी सितारों के साथ भी अच्छी फिल्में मिल रही हैं।
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आम्रपाली दुबे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपके दादा सूरज नारायण दुबे की तस्वीरें गोरखपुर और आसपास से आने वाले तमाम लोगों के घरों में लगी दिखती हैं, इसकी क्या कहानी है?
मेरे नाना नरसिंह खिलावन दुबे देवरिया से मुंबई आकर नालासोपारा में बसे थे। मेरे दादा सूरज नारायण दुबे भी गोरखपुर से मुंबई आकर प्रेमनगर, बोरीवली में बसे। उसके बाद की दोनों परिवारों की अगली पीढ़ियों ने मुंबई में ही जन्म लिया। दादा जी महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में चीफ इंजीनियर थे। कांदिवली के एकता नगर में गोरखपुर और आसपास से मेरे दादाजी के लाए हुए तमाम परिवार रहते हैं। इन सबकी नौकरी दादाजी ने ही लगवाई। तभी से ये लोग अपने घरों में दादाजी की फोटो लगाने लगे।
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आम्रपाली दुबे - फोटो : social media
इन दिनों अपने गांव जाना होता है?
मैं दर्शकों के प्यार और दादी के आशीर्वाद से ही यहां तक पहुंची हूं। गोरखपुर में भैंसा बाजार के पास मेरा गांव चनहर है। बहुत ही खूबसूरत गांव है मेरा। मैं अपने गांव में दादाजी के नाम पर एक स्कूल बनाने की योजना पर काम कर रही हूं। गोरखपुर शूटिंग करने जाती हूं तो समय मिलते ही एक बार गांव जरूर जाती हूं।
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